विक्रमशिला सेतु पर स्टील गर्डर लांचिंग शुरू! ढलाई के 28 दिन बाद लोड टेस्ट, क्या 14 जनवरी तक पूरा हो पाएगा काम?
Vikramshila Setu Rehabilitation Bhagalpur: विक्रमशिला सेतु पर स्टील गर्डर लॉन्चिंग का काम शुरू हो गया है, जिससे जर्जर स्लैब हटाने ...और पढ़ें

Vikramshila Setu Rehabilitation Bhagalpur: विक्रमशिला सेतु पर स्टील गर्डर लांचिंग शुरू
HighLights
विक्रमशिला सेतु पर स्टील गर्डर लॉन्चिंग का कार्य प्रारंभ।
14 जनवरी की समयसीमा, 28 दिन के लोड टेस्ट से चुनौती।
पुल के वजन घटाने को हल्के स्टील फुटपाथ लगेंगे।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Setu Rehabilitation Bhagalpur: उत्तर और दक्षिण बिहार की जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य को शुरू हुए एक माह का समय पूरा हो चुका है। इस दौरान कार्यदायी एजेंसी ने सेतु के जर्जर तीनों स्लैबों और कंक्रीट गर्डरों को हटाने का जटिल कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
अब परियोजना सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी पड़ाव यानी 'स्टील गर्डर लांचिंग' के दौर में प्रवेश कर चुकी है। नवगछिया छोर की ओर पहले स्टील गर्डर की लांचिंग पूरी कर ली गई है, जबकि रविवार को दूसरे गर्डर को लांच किया जाएगा। हालांकि, तकनीकी प्रक्रियाओं, स्लैब ढलाई और उसके बाद अनिवार्य 28 दिनों की भार क्षमता जांच (लोड टेस्टिंग) को देखते हुए 14 जनवरी की तय समयसीमा तक पुल को पूरी तरह चालू करना एक बड़ी प्रशासनिक और तकनीकी चुनौती बना हुआ है।
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक (एमडी) जितेंद्र कुमार ने बताया कि कार्य पूर्व-निर्धारित वर्क प्लान के तहत युद्धस्तर पर चल रहा है। चारों प्रभावित हिस्सों में एक-एक कर स्टील गर्डर लांच किए जा रहे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि निर्माण कार्य के दौरान गंगा नदी के पर्यावरण को सुरक्षित रखने और नदी में मलबा न गिरने देने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
20-22 दिन में गर्डर लांचिंग, फिर 28 दिन का लोड टेस्ट
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, स्टील गर्डर लांचिंग की प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और जटिल है। अन्य तीन स्थानों पर गर्डर रखने से पहले बेयरिंग लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है। इसी बेयरिंग के ऊपर स्टील गर्डर को स्थापित किया जाएगा। इसके समानांतर बरारी स्थित रेलवे यार्ड में स्टील गर्डर के कलपुर्जों को असेंबल करने का कार्य अंतिम चरण में है।
हालिया मानसूनी बारिश और त्योहारों के कारण प्रारंभिक कार्यों में थोड़ी बाधा जरूर आई थी, जिसके चलते चारों गर्डर की लांचिंग पूरी करने में अभी कम से कम 20 से 22 दिन का समय और लगेगा। गर्डर लांच होने के बाद उस पर आरसीसी स्लैब की ढलाई की जाएगी।
सिविल इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार, कंक्रीट स्लैब की मजबूती (क्योरिंग पीरियड) पूरी होने में 28 दिन का समय लगता है। इस 28 दिन की अवधि पूरी होने के बाद ही पुल पर भारी वाहनों को चलाकर लोड डिफ्लेक्शन और भार क्षमता की अंतिम जांच होगी। इस गणना के लिहाज से 14 जनवरी तक यातायात बहाल करने के आसार बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं।
लोहे की रेलिंग और स्टील फुटपाथ से घटेगा सेतु का वजन
पुल की दीर्घकालिक आयु और मजबूती को ध्यान में रखते हुए इस बार इसके मूल डिजाइन में रणनीतिक बदलाव किया गया है। पुराने भारी कंक्रीट फुटपाथ और कंक्रीट रेलिंग को कटर मशीनों से काटकर हटाया जा रहा है।
इनके स्थान पर हल्के लेकिन अत्यधिक मजबूत स्टील का फुटपाथ और लोहे की सुरक्षा रेलिंग लगाई जाएगी। इससे पूरे सुपरस्ट्रक्चर का डेड लोड (स्थिर भार) काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे पुल के पिलरों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।
नए एक्सपेंशन ज्वाइंट व इंस्पेक्शन चेंबर भी लगेंगे
पुनर्स्थापन कार्य के तहत केवल गर्डर और स्लैब ही नहीं बदले जा रहे, बल्कि पुल के सभी पुराने एक्सपेंशन ज्वाइंट्स को भी हटाया जा रहा है। नए फैब्रिकेटेड आधुनिक एक्सपेंशन ज्वाइंट लगाए जा रहे हैं, ताकि वाहनों की आवाजाही के दौरान झटके न लगें।
साथ ही, पुल के आंतरिक हिस्सों की नियमित निगरानी के लिए नए इंस्पेक्शन चेंबर बनाए जा रहे हैं। पुल निर्माण निगम भविष्य में सेतु के नियमित रखरखाव के लिए एक स्थायी प्रोटोकॉल भी तैयार कर रहा है, जिससे समय रहते तकनीकी दोषों की पहचान हो सके।
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