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भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर पहली बार लांच हुआ स्टील गर्डर; अब भार क्षमता और मजबूती की होगी जांच

Published: Mon, 02 Nov 2026 08:15 AM (IST)

Vikramshila Setu Restoration: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर क्षतिग्रस्त हिस्से में पहली बार सफलतापूर्वक स्टील गर्डर स्थापित किया गया है। ...और पढ़ें

Vikramshila Setu Restoration: विक्रमशिला सेतु के जीर्णोद्धार में बड़ी कामयाबी

Vikramshila Setu Restoration: विक्रमशिला सेतु के जीर्णोद्धार में बड़ी कामयाबी

HighLights

  1. विक्रमशिला सेतु पर पहला स्टील गर्डर स्थापित।

  2. पुनर्स्थापन कार्य अब निर्णायक और संवेदनशील चरण में।

  3. भार क्षमता और स्थिरता की होगी उच्चस्तरीय जांच।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Setu Restoration: उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली जीवन रेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के जीर्णोद्धार एवं पुनर्स्थापन कार्य ने रविवार को एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी पड़ाव पार कर लिया। सेतु के जो कंक्रीट स्लैब क्षतिग्रस्त होकर सीधे गंगा नदी में समा गए थे, उसके ठीक पीछे वाले क्षतिग्रस्त हिस्से में पहली बार भारी-भरकम स्टील गर्डर को सफलतापूर्वक लांच कर दिया गया।

इस स्टील गर्डर के स्थापित होने के साथ ही सेतु पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अब बेहद संवेदनशील और निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। इंजीनियरों और विशेषज्ञों की देखरेख में अब इस लांच किए गए स्टील गर्डर का सुदृढ़ीकरण (स्ट्रेंथनिंग) कार्य तेजी से कराया जा रहा है।

मजबूती और स्थिरता की जांच पर टिका है आगे का काम

पुनर्स्थापन कार्य से जुड़े तकनीकी अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस पहले हिस्से में किए जा रहे कार्य का परिणाम पूरे सेतु के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा। स्टील गर्डर को पूरी तरह फिक्स करने के बाद इसकी भार वहन क्षमता (लोड कैपेसिटी), कंपन प्रतिरोधक क्षमता और तकनीकी स्थिरता की उच्चस्तरीय जांच की जाएगी।

यदि इस पहले हिस्से में स्टील गर्डर लगाने और उसे मजबूती प्रदान करने का प्रयोग पूरी तरह सफल और संतोषजनक पाया जाता है, तो सेतु के बाकी सभी क्षतिग्रस्त हिस्सों में भी बिना किसी देरी के इसी उन्नत तकनीक से बारी-बारी से स्टील गर्डर चढ़ाए जाएंगे।

समानांतर रूप से चल रहा बेयरिंग बदलने का काम

एक तरफ जहां मुख्य क्षतिग्रस्त स्पैन में स्टील गर्डर लांच किया गया है, वहीं समानांतर रूप से सेतु के दूसरे हिस्सों में पाए गए तकनीकी दोषों को भी सुधारा जा रहा है। दूसरे हिस्से में सेतु के खंभों (पियर्स) पर लगे पुराने और घिस चुके बेयरिंग को हटाकर नए आधुनिक बेयरिंग लगाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। बेयरिंग के दुरुस्त होने से सेतु पर वाहनों के आवागमन के दौरान होने वाला कंपन संतुलित रहेगा और पुल के बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।

क्षतिग्रस्त स्लैब को काटकर हटाने के बाद हुई लांचिंग

गौरतलब है कि विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा अप्रत्याशित रूप से टूटकर गंगा नदी की तेज धारा में गिर गया था। इसके बाद सुरक्षा मानकों को देखते हुए पुल के अन्य कमजोर और क्षतिग्रस्त हिस्सों को विशेष कटर मशीनों की मदद से काटकर पूरी तरह हटा दिया गया था।

ढांचे को फिर से टिकाऊ और दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्टील गर्डर तकनीक को सबसे मुफीद माना गया। रविवार को क्रेन और भारी मशीनों की सहायता से गर्डर की सफल लांचिंग से निर्माण एजेंसी और पथ निर्माण विभाग ने राहत की सांस ली है। अब तकनीकी परीक्षण के परिणाम सामने आते ही शेष बचे हिस्सों पर काम की गति और तेज कर दी जाएगी।

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