भागलपुर विक्रमशिला सेतु पर फिर मंडराया बड़ा खतरा, एक स्लैब गिरने के बाद अब दूसरे को लोहे के पिलर का अस्थाई सहारा
भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के कमजोर दूसरे स्लैब को सहारा देने के लिए गंगा नदी में लोहे के पिलर लगाकर ...और पढ़ें

विक्रमशिला सेतु को सुरक्षित करने की बड़ी कवायद: अब दूसरे कमजोर स्लैब को नीचे से मिलेगा लोहे के पिलर का 'सपोर्ट'
HighLights
विक्रमशिला सेतु के दूसरे कमजोर स्लैब को मिल रहा सहारा।
गंगा नदी में लोहे के पिलर से दिया जा रहा सपोर्ट।
मानसून में तेज बहाव से अस्थाई सपोर्ट पर सवाल।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु के कमजोर हिस्सों को अतिरिक्त सहारा देने की दिशा में प्रशासन ने एक और बड़ा कदम उठाया है। पुल के दूसरे स्लैब के नीचे लोहे के मजबूत पाइप से सपोर्ट (सहारा) देने की प्रशासनिक तैयारी अब धरातल पर शुरू कर दी गई है।
गंगा में खड़े किए जाएंगे लोहे के भारी-भरकम पिलर
इस विशेष तकनीकी कार्य के लिए गंगा नदी के भीतर लोहे के मजबूत पिलर खड़े किए जाएंगे, जिनके ऊपरी सिरे से कमजोर हो चुके स्लैब को नीचे से सीधा सपोर्ट दिया जाएगा।
पुल निर्माण निगम का मकसद: अप्रिय घटना पर रोक
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम का मुख्य उद्देश्य सेतु के इस संवेदनशील हिस्से को अतिरिक्त मजबूती देना है, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय हादसे की आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
नया एक्शन: विक्रमशिला सेतु के दूसरे कमजोर स्लैब को सुरक्षित करने के लिए गंगा में लोहे के पिलर खड़े कर पाइप सपोर्ट देने का काम शुरू हुआ।
बैकग्राउंड: 3 मई को 35 मीटर स्लैब गिरने के कारण आस-पास के स्लैब पर भी गंभीर असर पड़ा था, जिन्हें मजबूत करना बेहद जरूरी है।
बड़ी चुनौती: मानसून के समय गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने और पानी का तेज बहाव होने पर इस अस्थाई लोहे के सपोर्ट की मजबूती को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
3 मई के हादसे से हिल गया था विक्रमशिला सेतु
बता दें कि बीते 3 मई की रात को पुल का एक 35 मीटर लंबा स्लैब ध्वस्त होकर सीधे गंगा नदी में गिर गया था, जिसके जोरदार झटके से आगे और पीछे के स्लैब भी प्रभावित हुए थे। पुल निर्माण निगम के तकनीकी अधिकारियों का मानना है कि इस नई पाइप स्पोर्टिंग व्यवस्था से कमजोर पड़ चुके स्लैब पर वाहनों के परिचालन से पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
एक हिस्से को पहले ही दिया जा चुका है मजबूत सहारा
पुल को सुरक्षित करने की यह प्रक्रिया नई नहीं है, क्योंकि इससे पहले भी सेतु के एक अन्य प्रभावित स्लैब के नीचे ठीक इसी तरह की लोहे की पाइप स्पोर्टिंग सफलतापूर्वक दी जा चुकी है। जो स्लैब पूर्व में गंगा में समा गया था, उसके पिछले हिस्से को पहले ही सहारा दिया जा चुका है और अब उसी ध्वस्त हिस्से के ठीक अगले स्लैब को सुरक्षित करने की तैयारी चल रही है।
तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर के बीच प्रभावशीलता पर सवाल
हालांकि, इस पूरी व्यवस्था को लेकर तकनीकी हलकों में एक बड़ा सवाल भी तैर रहा है कि बाढ़ के दिनों में जब गंगा का जलस्तर बढ़ेगा, तब तेज बहाव में ये लोहे के पिलर कितने टिक पाएंगे। इस मानसूनी चुनौती और चर्चाओं के बीच, फिलहाल पुल निर्माण निगम का पूरा फोकस युद्धस्तर पर काम करके इस कमजोर स्लैब को अतिरिक्त सपोर्ट देना है ताकि पुल पर ट्रैफिक सुचारू रहे।
