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भागलपुर विक्रमशिला पुल के जोड़ों में दिखे गैप की क्या है सच्चाई? इंजीनियर ने बताया च‍िंंता ना करें खतरा नहीं है

Published: Thu, 11 Jun 2026 09:13 PM (IST)

भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के एक्सपेंशन ज्वाइंट में दिख रहे गैप को लेकर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह ...और पढ़ें

भागलपुर: विक्रमशिला सेतु के गैप को लेकर सोशल मीडिया पर उड़ी अफवाह, अब आईआईटी के एक्सपर्ट ने बताई असली सच्चाई

भागलपुर: विक्रमशिला सेतु के गैप को लेकर सोशल मीडिया पर उड़ी अफवाह, अब आईआईटी के एक्सपर्ट ने बताई असली सच्चाई

HighLights

  1. पुल के जोड़ों में गैप सामान्य तकनीकी प्रक्रिया।

  2. तापमान परिवर्तन से पुल का सिकुड़ना-फैलना स्वाभाविक।

  3. विक्रमशिला सेतु पर आवागमन पूरी तरह सुरक्षित, कोई खतरा नहीं।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। गंगा नदी की विस्तृत धारा पर भागलपुर के विकास की जीवनरेखा बनकर खड़ा विक्रमशिला सेतु इन दिनों सुर्खियों में है। दरअसल, सेतु के एक्सपेंशन ज्वाइंट (पुल के जोड़ों) में दिख रहे गैप को लेकर सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं। अब इन तमाम चर्चाओं और डर पर तकनीकी विशेषज्ञों ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यह गैप किसी खतरे का संकेत नहीं, बल्कि पुल निर्माण की एक स्वाभाविक तकनीकी व्यवस्था है।

तापमान के कारण पुल का सिकुड़ना और फैलना स्वाभाविक

भागलपुर अभियंत्रण महाविद्यालय (BCE) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुबोध कुमार ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कंक्रीट, स्टील और अन्य निर्माण सामग्रियों से बने बड़े ढांचों में मौसम और तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण फैलाव (Expansion) और सिकुड़न (Contraction) होना एक स्वाभाविक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसी वजह से बड़े पुलों और भवनों में एक्सपेंशन ज्वाइंट जानबूझकर बनाए जाते हैं, ताकि मुख्य संरचना पर कोई अतिरिक्त दबाव न पड़े और पुल का संतुलन हमेशा बना रहे।

जानें कितना गैप होने पर माना जाता है सामान्य?

तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. सुबोध कुमार के अनुसार, एक्सपेंशन ज्वाइंट के बीच जानबूझकर एक निश्चित अंतर छोड़ा जाता है। यदि यह गैप 100 से 150 मिलीमीटर (mm) तक भी घटता या बढ़ता है, तो इसे सामान्य तकनीकी स्थिति ही माना जाता है। चिंता की बात तब होती है जब यह गैप असामान्य रूप से लगातार बढ़ता चला जाए या पुल के पिलर और स्लैब में किसी अन्य प्रकार की विकृति दिखाई दे। राहत की बात यह है कि वर्तमान में विक्रमशिला सेतु में ऐसी कोई भी चिंताजनक स्थिति नहीं है।

पुल पर आवागमन पूरी तरह सुरक्षित, दहशत की जरूरत नहीं

डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि आम लोगों को यह गैप देखकर डर या असुविधा होती है, तो प्रशासन की ओर से इसे धातु अथवा मजबूत रबर की प्लेट से ढका जा सकता है। हालांकि, पुल की सुरक्षा की दृष्टि से ऐसा करना कोई अनिवार्य नहीं है। उन्होंने भागलपुर और नवगछिया के लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति में विक्रमशिला सेतु पर आवागमन पूरी तरह सुरक्षित है और किसी को भी किसी प्रकार की दहशत या अफवाह में आने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है।

जानिए क्यों और कब बनाए गए थे चार बेली ब्रिज?

इस ऐतिहासिक पुल के इतिहास पर गौर करें तो 3 मई की मध्यरात्रि को पी-2 और पी-3 पिलर के बीच का 34 मीटर लंबा सस्पेंडेड स्पैन क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद आईआईटी पटना (IIT Patna) की प्रारंभिक तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर सीमा सड़क संगठन (BRO) को प्रभावित हिस्से पर बेली ब्रिज निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके तहत वी-5-पी-1, पी-1-पी-2, पी-2-पी-3 और पी-3-पी-4 के ऊपर कुल चार मजबूत बेली ब्रिज स्थापित किए गए थे, ताकि भारी वाहनों का परिचालन न रुके।

हालिया जांच रिपोर्ट में भी नहीं मिली कोई गड़बड़ी

बेली ब्रिज निर्माण के दौरान किए गए विजुअल इंस्पेक्शन (दृश्य निरीक्षण) में बैलेंस्ड कैंटिलीवर स्पैन के एक्सपेंशन ज्वाइंट की पैमाइश की गई थी। उस समय भागलपुर वाले छोर पर गैप औसतन 90 से 100 मिलीमीटर तथा नवगछिया वाले छोर पर 40 से 50 मिलीमीटर पाया गया था। हाल ही में विभाग द्वारा की गई ताजा जांच में भी यही पुरानी स्थिति बरकरार मिली है। इससे यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि पुल के गैप में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है और पुल का स्ट्रक्चर पूरी तरह स्थिर है।