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विक्रमशिला सेतु की 30 साल बढ़ेगी उम्र; कार्बन प्लेटिंग शुरू, ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम से डिजिटल निगरानी की तैयारी

Published: Sat, 07 Nov 2026 06:15 AM (IST)

Vikramshila Setu Repair Bhagalpur: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु की उम्र बढ़ाने के लिए आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का प्रयोग किया जा ...और पढ़ें

Vikramshila Setu Repair Bhagalpur: न‍िर्माण कार्य जारी है।

Vikramshila Setu Repair Bhagalpur: न‍िर्माण कार्य जारी है।

HighLights

  1. सेतु की ऊपरी सतह पर कार्बन प्लेटिंग शुरू हुई।

  2. आधुनिक तकनीक से पुल की आयु 25-30 साल बढ़ेगी।

  3. ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम से डिजिटल निगरानी होगी।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Setu Repair Bhagalpur: भागलपुर में गंगा नदी पर बने अतिमहत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु की उम्र और मजबूती बढ़ाने के लिए आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का प्रयोग तेजी से किया जा रहा है। सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्सों के आंतरिक भाग में रेट्रोफिटिंग और स्ट्रेंथनिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद अब ऊपरी सतह पर ग्राइंडिंग कर कार्बन फाइबर, कार्बन लैमिनेट और कार्बन प्लेट लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।

अंदरूनी हिस्सों में इस प्रक्रिया को पूरा करने में करीब चार माह का समय लगा था। कार्यदायी एजेंसी के अनुसार, ऊपरी हिस्से में भी इस काम को पूरा करने में कम से कम तीन माह लगेंगे। इस कार्य के पूर्ण होने के उपरांत ही सेतु पर वाहनों का सुगम और सुरक्षित परिचालन बहाल हो सकेगा।

लोड डिवाइड होगा, 25 से 30 साल बढ़ जाएगी सेतु की उम्र

इंजीनियरों के मुताबिक, सेतु की ऊपरी सतह पर कार्बन प्लेटिंग और लैमिनेटिंग करने से वाहनों का वजन (लोड) समान रूप से विभाजित (डिवाइड) होगा। इससे पुल की भार वहन क्षमता काफी सुदृढ़ हो जाएगी। विशेषज्ञों का आकलन है कि इस आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से विक्रमशिला सेतु की आयु में 25 से 30 साल तक का विस्तार हो सकता है।

वहीं दूसरी ओर, सेतु के दो हिस्सों में स्टील गर्डर लॉन्चिंग का काम पहले ही पूरा कर लिया गया है, जबकि दो अन्य हिस्सों में गर्डर लॉन्चिंग की तैयारी अंतिम चरण में है। इसमें लगभग 8 से 10 दिनों का समय लगेगा। स्टील गर्डर लॉन्चिंग का काम समाप्त होते ही स्लैबों की ढलाई का कार्य शुरू कराया जाएगा।

सेंसर और IoT से होगी 24 घंटे सेतु की सेहत की डिजिटल निगरानी

सेतु की भौतिक मरम्मत के साथ-साथ अब इसकी संरचनात्मक स्थिति (Structural Health) पर भी डिजिटल नजर रखने की ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है। पुराने विक्रमशिला सेतु पर अब अत्याधुनिक 'ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम' (BHMS) स्थापित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि गंगा पर ही निर्माणाधीन समानांतर फोरलेन पुल में यह सिस्टम लगाने की योजना पहले से स्वीकृत है, लेकिन अब पुराने सेतु की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए यहां भी इसे लगाने का निर्णय लिया गया है।

अभियंताओं के अनुसार, ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम मूलतः सेंसर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और डेटा एनालिटिक्स पर आधारित तकनीक है। इससे पुल के विभिन्न हिस्सों में होने वाले सूक्ष्म संरचनात्मक बदलावों को रियल-टाइम में ट्रैक किया जा सकेगा।

तनाव, कंपन या झुकाव होने पर तुरंत मिलेगा ऑटोमेटेड अलर्ट

इस प्रणाली के तहत सेतु के अलग-अलग पिलरों, स्पैन और संवेदनशील हिस्सों में उच्च क्षमता वाले सेंसर लगाए जाएंगे। ये सेंसर वाहनों के आवागमन के दौरान पुल पर पड़ने वाले अतिरिक्त तनाव, कंपन, झुकाव और सूक्ष्म विस्थापन (Displacement) जैसी गतिविधियों का लगातार डिजिटल डेटा जुटाएंगे।

यदि किसी हिस्से में निर्धारित सुरक्षा मानकों से अधिक हलचल या बदलाव दर्ज होता है, तो सिस्टम सीधे संबंधित तकनीकी अधिकारियों को ऑटोमेटेड अलर्ट भेज देगा। इससे सेतु की सुरक्षा केवल पारंपरिक मानवीय निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सटीक तकनीकी आंकड़ों के आधार पर समय रहते संभावित खतरों की पहचान कर त्वरित रखरखाव किया जा सकेगा।

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