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‘डीएम मेम...! सुल्तानगंज-अगवानी में जहाज चलवा दें’; भागलपुर गंगा घाटों पर कम होगी भीड़, वि‍क्रमश‍िला पुल बंद है अभी

Published: Tue, 06 Oct 2026 11:59 PM (GMT+05:30)

Vikramshila Setu Traffic Crisis: विक्रमशिला सेतु के मरम्मत कार्य के कारण बंद होने से भागलपुर और कोसी क्षेत्र के यात्रियों ...और पढ़ें

Vikramshila Setu Traffic Crisis: सुल्‍तानगंज घाट।

Vikramshila Setu Traffic Crisis: सुल्‍तानगंज घाट।

HighLights

  1. विक्रमशिला सेतु बंद होने से यात्रियों की दुश्वारियां बढ़ीं।

  2. सुल्तानगंज-अगवानी घाट पर नियमित जहाज सेवा की मांग।

  3. निजी नावों का किराया अधिक, सरकारी सेवा की जरूरत।

संवाद सूत्र, सुल्तानगंज (भागलपुर)। Vikramshila Setu Traffic Crisis: विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत कार्य को लेकर आवागमन पूरी तरह बंद किए जाने के बाद भागलपुर से नवगछिया, खगड़िया और पूरे कोसी क्षेत्र की ओर आने-जाने वाले यात्रियों की दुश्वारियां चरम पर पहुंच गई हैं। भागलपुर के बियाडा घाट और नवगछिया के जहान्वी घाट के बीच प्रशासन द्वारा संचालित नौ जहाजों की मुफ्त सेवा यात्रियों के भारी दबाव के आगे नाकाफी साबित हो रही है। घाटों पर सुबह से देर रात तक मुसाफिरों की लंबी कतारें लग रही हैं।

इस विकट स्थिति को देखते हुए अब सुल्तानगंज से खगड़िया के अगवानी घाट के बीच नियमित व पर्याप्त जहाज सेवा शुरू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों का कहना है कि सुल्तानगंज-अगवानी जलमार्ग को फौरन सक्रिय करने से विक्रमशिला सेतु के दोनों छोरों पर स्थित मुख्य घाटों पर यात्रियों और दोपहिया वाहनों का दबाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Sultanganj Agwani Boat Service Demanded Amidst Vikramshila Setu Closure (1)

ज्ञात हो कि 3 मई को विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद से ही परिचालन प्रभावित था, लेकिन अक्टूबर की शुरुआत से पुल को पूरी तरह बंद किए जाने के बाद स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है।

खगड़िया, परबत्ता व कोसी के यात्रियों को मिलेगा सीधा विकल्प

सुल्तानगंज और अगवानी घाट के बीच यदि प्रशासन निर्धारित समय-सारिणी के तहत बड़े जहाज उतार दे, तो खगड़िया, परबत्ता, गोगरी और मधेपुरा की ओर जाने वाले मुसाफिरों को भागलपुर शहर या बियाडा घाट जाने की मजबूरी नहीं रहेगी। मई माह में भी जब सेतु पर संकट आया था, तब इस मार्ग पर आवाजाही काफी बढ़ गई थी, लेकिन उस वक्त स्थायी व नियमित जहाज सेवा की व्यवस्था नहीं की जा सकी।

सुल्तानगंज-अगवानी जलमार्ग: वर्तमान स्थिति व किराया विवरण

  • यात्रा समय: 30 से 45 मिनट (गंगा में तेज बहाव/जलस्तर बढ़ने पर समय अधिक)।

  • वर्तमान साधन: निजी नावों द्वारा फेरी सेवा।

  • प्रति यात्री किराया: ₹40 से ₹50।

  • बाइक का किराया: ₹70 से ₹100।

  • साइकिल का किराया: लगभग ₹60।

  • सामान ढुलाई: ₹20 से ₹30 (वजन के अनुसार)।

  • प्रमुख मांग: बियाडा घाट पर दबाव घटाने के लिए सुल्तानगंज-अगवानी के बीच नियमित व सुरक्षित सरकारी जहाज का परिचालन।

स्थानीय व्यापारी रामेश्वर यादव ने बताया कि भागलपुर से व्यापारिक माल लाने-ले जाने में मुख्य घाटों पर घंटों जाम और कतार में खड़े रहना पड़ रहा है। यदि सुल्तानगंज से अगवानी के बीच जहाज सेवा शुरू होती है, तो समय और भाड़े दोनों की भारी बचत होगी। खासकर महिला यात्रियों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को बियाडा घाट की धक्का-मुक्की से निजात मिल सकेगी।

रोजमर्रा के दूध, सब्जी और केला कारोबार पर मार

पुल बंदी का सीधा और गंभीर असर गंगा के दोनों किनारों के पारंपरिक व्यापार पर पड़ रहा है। नवगछिया, खरीक और बिहपुर के इलाके से रोजाना भारी मात्रा में केला, मक्का, हरी सब्जियां और दूध भागलपुर के बाजारों (बरारी, जीरोमाइल, सबौर) में पहुंचता है। वहीं, भागलपुर से थोक किराना, जीवनरक्षक दवाएं, कपड़ा और निर्माण सामग्री ग्रामीण क्षेत्रों में जाती है। जहाजों की सीमित संख्या और माल ढुलाई में हो रही देरी के कारण रोजमर्रा का यह कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

Sultanganj Agwani Boat Service Demanded Amidst Vikramshila Setu Closure (2)

वर्तमान में निजी नावों की मनमानी

वर्तमान में सुल्तानगंज से अगवानी घाट के बीच केवल निजी स्तर पर छोटी नावों और फेरी का संचालन हो रहा है। सामान्य दिनों में इस पार से उस पार पहुंचने में 30 से 45 मिनट का समय लगता है, लेकिन बहाव तेज होने पर जोखिम और समय दोनों बढ़ जाते हैं।

वसूला जा रहा भारी किराया

निजी नाव चालक प्रति यात्री 40 से 50 रुपये, बाइक के लिए 70 से 100 रुपये और साइकिल के लिए 60 रुपये तक वसूल रहे हैं। सामान का वजन देखकर 20 से 30 रुपये अतिरिक्त लिए जा रहे हैं। लोगों ने जिला प्रशासन और बिहार सरकार से मांग की है कि जब तक अगुवानी पुल पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक इस मार्ग पर सुरक्षा मानकों से लैस पर्याप्त सरकारी जहाज चलाए जाएं।

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