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दो मिनट की देरी और जहाज छूटा! भागलपुर में विक्रमशिला पुल बंद होने से शिक्षिकाओं का संघर्ष, उसके बाद रास्ते में जाम

Published: Tue, 06 Oct 2026 04:22 PM (GMT+05:30)

Bhagalpur Vikramshila Setu Closed: विक्रमशिला पुल बंद होने के कारण भागलपुर से नवगछिया जाने वाले सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर शिक्षिकाओं और ...और पढ़ें

Bhagalpur Vikramshila Setu Closed: भागलपुर में पुल बंद होने के बाद जहाज पकड़ने के लिए दौड़ते शिक्षक।

Bhagalpur Vikramshila Setu Closed: भागलपुर में पुल बंद होने के बाद जहाज पकड़ने के लिए दौड़ते शिक्षक।

HighLights

  1. विक्रमशिला पुल बंद होने से जहाज बना एकमात्र सहारा।

  2. शिक्षिकाओं और स्वास्थ्यकर्मियों को समय पर पहुंचने में दिक्कत।

  3. जहाज के अनियमित समय से दैनिक जीवन में तनाव।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Vikramshila Setu Closed: विक्रमशिला पुल बंद होने के बाद गंगा पार कर नवगछिया जाने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए जहाज अब रोज की मजबूरी बन गया है। इनमें सबसे अधिक परेशानी शिक्षिकाओं और स्वास्थ्यकर्मियों को हो रही है। उनके लिए जहाज महज यात्रा का साधन नहीं, बल्कि रोजी-रोटी तक समय पर पहुंचने का रास्ता है। जहाज के निर्धारित समय पर नहीं खुलने से उनकी परेशानी और भी बढ़ गई है।

Bhagalpur Teacher Daily Ferry Struggle After Vikramshila Bridge Closure (4)

सुबह के चार बजते ही घर में नींद से जागने का समय होता है, लेकिन नवगछिया में नौकरी करने वाली कई महिला शिक्षिकाओं की दिनचर्या शुरू हो जाती है। बच्चों को तैयार करना, उनका खाना बनाना, उन्हें स्कूल भेजना और फिर खुद तैयार होकर घर से निकलना। इसके बाद शुरू होती है दूसरी दौड़—समय पर जहाज पकड़ने की। घाट पर पहुंचने के बाद नजर घड़ी पर होती है और जहाज पर। डर रहता है कि दो मिनट की देरी हुई तो अगला जहाज पकड़ना पड़ेगा और स्कूल पहुंचने में और देर हो जाएगी।

Bhagalpur Teacher Daily Ferry Struggle After Vikramshila Bridge Closure (1)

करीब डेढ़ घंटे की पूरी यात्रा के बाद स्कूल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की चिंता अलग है। जहाज निर्धारित समय पर नहीं खुला तो यह समय और बढ़ जाता है। मंगलवार को सुबह आठ बजे खुलने वाला जहाज करीब 8:35 बजे रवाना हुआ। इससे उन शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई, जो समय पर स्कूल पहुंचने के लिए सुबह 7:15 बजे वाले जहाज का इंतजार कर रहे थे। कुछ शिक्षक महज दो मिनट की देरी से जहाज नहीं पकड़ सके। इसके बाद उन्हें अगले जहाज पर निर्भर रहना पड़ा।

Bhagalpur Teacher Daily Ferry Struggle After Vikramshila Bridge Closure (5)

घाटा पर जहाज लगते ही तस्वीर बदल जाती है। महिला शिक्षिकाएं हाथ में बैग और जरूरी सामान संभालते हुए तेजी से जहाज की ओर बढ़ती हैं। जहाज छूटने का डर ऐसा कि कई बार दौड़ते हुए चढ़ना पड़ता है। भीड़ और जल्दबाजी में महिलाओं के गिरने तक की स्थिति बन जाती है। किसी तरह जहाज पर जगह मिलती है तो राहत की सांस लेती हैं, लेकिन सफर अभी बाकी रहता है।

Bhagalpur Teacher Daily Ferry Struggle After Vikramshila Bridge Closure (2)

महिला शिक्षिका सुनीता व अमृता ने बताया कि घर से निकलने से पहले बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी पूरी करनी होती है। इसके बाद जहाज के भरोसे नौकरी तक पहुंचना पड़ता है। रास्ते में पानी होने के कारण कपड़े भीगने की चिंता रहती है। इसलिए कई महिला शिक्षिकाएं अतिरिक्त कपड़े लेकर चलती हैं। उनका कहना है कि स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन सुबह से ही जहाज पकड़ने और समय पर वापस आने का तनाव बना रहता है।

कई शिक्षकों ने भी बताया कि स्कूल में 9:30 बजे तक पहुंचना होता है। उपस्थिति का रिकार्ड भी दर्ज कराना होता है। उनका कहना है कि जहाज में देरी उनके हाथ में नहीं है, लेकिन उसका असर उनकी उपस्थिति और काम पर पड़ता है। प्रशासन को समय सारिणी के अनुसार ही जहाज चलाना चाहिए। ऐसी ही स्थिति स्वास्थ्यकर्मियों के सामने भी है। उनका कहना है कि अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र में समय पर पहुंचना जरूरी है।

Bhagalpur Teacher Daily Ferry Struggle After Vikramshila Bridge Closure (3)

पुल बंद होने के बाद जहाज ही सहारा है, इसलिए इसके समय में नियमितता बेहद जरूरी है। दूसरी ओर से जहाज कर्मियों का कहना है कि जहाज भरने में समय लग जाता है, जिससे कभी-कभी परिचालन में देरी होती है। जबकि कर्मचारियों की मांग है कि जहाज निर्धारित समय पर खोले जाएं। उनके लिए यह महज यात्रा का साधन नहीं, रोजी-रोटी तक समय पर पहुंचने का रास्ता है।

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