बाढ़ के सीने पर भारी पड़ा फौजी पिता का हौसला, बेटी को परीक्षा दिलाने हर दिन दो KM पानी चीरकर पहुंचे कॉलेज
भारतीय सेना के जवान मुन्ना कुमार राय ने भागलपुर में बाढ़ के पानी से घिरे अपने गांव से बेटी सुंदरी ...और पढ़ें

बाढ़ के सीने पर भारी पड़ा फौजी पिता का हौसला
HighLights
फौजी पिता ने बेटी को परीक्षा दिलाने बाढ़ से जंग लड़ी।
रोज 2 किलोमीटर पानी चीरकर कॉलेज पहुंचे पिता-पुत्री।
बाढ़ के बावजूद बेटी की पढ़ाई नहीं रुकने दी।
कौशल किशोर मिश्र, भागलपुर। सरहद पर दुश्मनों से लड़ने वाला फौजी जब बेटी की परीक्षा की बारी आई तो बाढ़ के पानी से भी भिड़ गया। नाथनगर प्रखंड के बाढ़ प्रभावित गौरीपुर गांव निवासी भारतीय सेना के जवान मुन्ना कुमार राय अपनी बेटी सुंदरी को स्नातक की परीक्षा दिलाने रोज शहर के टीएनबी कालेज आते रहे। गांव बाढ़ के पानी से घिरा है।
रास्ते में तेज बहाव था और करीब दो किलोमीटर का सफर बाढ़ के पानी में। परीक्षा के लिए रोज इस चुनौती को पार करने वाले मुन्ना और उनकी बिटिया का हौसला मंगलवार को आखिरी दिन भी नहीं टूटा। दोनों बाढ़ के पानी में उतर गए।
गांव की पगडंडियों की बेहतर जानकारी
बाढ़ के पानी में प्रवेश करने से पहले मुन्ना ने अंजुरी में गंगा मइया का पानी लिया और प्रणाम किया। फिर बेटी को साथ लेकर डूबे रास्ते पर आगे बढ़े। घुटने तक पानी में दोनों चलते रहे। मुन्ना को गांव की पगडंडियों की बेहतर जानकारी है।
इसी वजह से तेज बहाव के बीच भी वह कदमों का संतुलन साधते रहे। जहां बहाव अधिक था, वहां बेटी का हाथ थामा। पीठ पर वाटरप्रूफ पिट्ठू बैग और बेटी को साथ लेकर पानी का सीना चीरते हुए गंतव्य की ओर बढ़ते रहे।
बिटिया टिया की परीक्षा नहीं छूटने देंगे
रन्नुचक, मकंदपुर, गौरीपुर, शाहपुर समेत नाथनगर प्रखंड के दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। ऐसे में मुन्ना के सामने सबसे बड़ी चिंता बेटी की परीक्षा थी। उनका कहना था कि चाहे कुछ भी हो जाए, बिटिया की परीक्षा नहीं छूटने देंगे।
उन्होंने कहा, 'मैं ठहरा फौजी। हमेशा किसी भी परिस्थिति में डटकर सामना करने का आदी रहा हूं। इसलिए बाढ़-सुखाड़, आग-पानी से क्या डरना। यह छोटी चुनौती है हमारे लिए। हां, बिटिया की चिंता जरूर सता रही थी कि बाढ़ के पानी में कैसे जाएगी, लेकिन यह संकट भी बाप-बेटी ने मिलकर दूर कर लिया।'
पिता साथ हो तो किस बात की चिंता
बाढ़ का पानी भयावह मंजर पैदा कर रहा था, लेकिन सुंदरी को जरा भी चिंता नहीं थी। उसने कहा, 'अकेली होती तो कभी परीक्षा देने नहीं आ पाती, लेकिन जब पापा साथ में हैं तो किस बात की चिंता।' पिता के साथ होने का भरोसा ही उसके लिए हिम्मत था। तेज बहाव के बीच भी वह निडर होकर पिता के साथ चलती रही।
बाढ़ नियति, गरीबों के लिए बर्बादी
मुन्ना ने बताया कि नाथनगर प्रखंड के अधिकतर गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। पूरा इलाका वाटर लाक हो गया है। बाढ़ इस इलाके की नियति बन गई है। इसलिए लोग पहले से तैयारी करने लगते हैं, ताकि कुछ दिनों तक घर में कैद रहना पड़े तो परेशानी कम हो। आर्थिक रूप से सबल लोगों के लिए ही यह तैयारी काम आती है लेकिन रोज कमाने-खाने वाले और खेतिहर मजदूरों के लिए बाढ़ बर्बादी के सिवा कुछ नहीं लाती।
