3145 एकड़ जमीन ₹1329 करोड़ मुआवजा; भागलपुर अजगैवीनाथ ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की जमीन पर बाढ़ का पानी, रनवे को बचाना होगा
Ajgaivinath Greenfield Airport Flood Risk: प्रस्तावित अजगैवीनाथ ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट स्थल पर गंगा के बढ़ते जलस्तर से जलजमाव हो गया है, ...और पढ़ें

Ajgaivinath Greenfield Airport Flood Risk: प्रस्तावित अजगैवीनाथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट की जमीन पर चढ़ा गंगा का पानी; ₹1329 करोड़ मंजूर, सुरक्षा पर सवाल
HighLights
प्रस्तावित अजगैवीनाथ एयरपोर्ट स्थल पर गंगा के पानी का व्यापक जलजमाव।
स्थानीय लोग रनवे बचाने को बांध, फोरलेन 10 फीट ऊंचा करने की मांग।
3145 एकड़ भूमि अधिग्रहण, ₹1329 करोड़ मुआवजा स्वीकृत, फिर भी बाढ़ का खतरा।
संवाद सूत्र, अजगैवीनाथ धाम (भागलपुर)। Ajgaivinath Greenfield Airport Flood Risk: धार्मिक और पर्यटन नगरी अजगैवीनाथ धाम (सुल्तानगंज) के विकास और आर्थिक गतिविधियों को नई ऊंचाई देने के लिए प्रस्तावित ग्रीनफील्ड अजगैवीनाथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना के निर्माण की कवायद तेज होते ही एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गंगा नदी के उफान पर होने से एयरपोर्ट के लिए चिह्नित प्रस्तावित क्षेत्र में व्यापक जलजमाव हो गया है।
चारों ओर पानी फैल जाने से स्थानीय ग्रामीणों और विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ गई हैं। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण शुरू होने से पूर्व जल निकासी और बाढ़ सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए गए, तो भविष्य में बरसात और बाढ़ के दौरान एयरपोर्ट के रनवे के जलमग्न होने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
सरकार ने इस महत्वाकांक्षी अंतरराष्ट्रीय परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए भागलपुर और मुंगेर जिलों को मिलाकर कुल 3,145 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इसके लिए 1,329.58 करोड़ रुपये की भारी-भरकम मुआवजा राशि भी स्वीकृत हो चुकी है। सिविल विमानन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एयरपोर्ट के लिए भागलपुर जिले में 1,425.11 एकड़ तथा मुंगेर जिले में 1,720.12 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा रही है।
प्रस्तावित ग्रीनफील्ड अजगैवीनाथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट क्षेत्र में गंगा के बढ़ते जलस्तर से जलभराव, स्थानीय लोगों में चिंता
परियोजना के लिए भागलपुर और मुंगेर जिले की कुल 3,145 एकड़ भूमि अधिग्रहण को मंजूरी, ₹1329.58 करोड़ का मुआवजा स्वीकृत
भागलपुर में 1,425.11 एकड़ और मुंगेर जिले में 1,720.12 एकड़ जमीन पर बनना है आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निचले इलाके में स्थित होने से हर साल आता है सैलाब; अजगैवीनाथ धाम-दर्दमारा फोरलेन और मंझली बांध को 10 फीट ऊंचा करने की मांग
हर साल डूबता है इलाका, 10 फीट ऊंचा करना होगा फोरलेन और बांध
स्थानीय बाशिंदों का कहना है कि जिस स्थल को एयरपोर्ट के लिए चिह्नित किया गया है, वह भौगोलिक रूप से अपेक्षाकृत काफी निचला इलाका है। गंगा और उसकी सहायक धाराओं में आने वाली सालाना बाढ़ का पानी हर साल इस भूभाग को अपनी चपेट में ले लेता है। इस वर्ष भी गंगा के बढ़े जलस्तर का असर पूरे निर्माण स्थल पर साफ नजर आ रहा है।
ग्रामीणों और तकनीकी जानकारों की मांग है कि एयरपोर्ट के रनवे और टर्मिनल को सुरक्षित रखने के लिए प्रक्रियाधीन 'अजगैवीनाथ धाम - दर्दमारा फोरलेन' और 'मंझली बांध' की ऊंचाई वर्तमान स्तर से कम से कम 10 फीट और बढ़ाई जानी चाहिए। यदि तटबंध और पहुंच पथ की ऊंचाई नहीं बढ़ाई गई और जल निकासी के लिए बड़े क्षमता वाले ड्रेनेज व स्लुइस गेट नहीं बने, तो भविष्य में करोड़ों-अरबों का यह ढांचा पानी में घिर सकता है।
प्रशासनिक निरीक्षण के बाद भी फाइलों में अटका ऊंचाई बढ़ाने का काम
उल्लेखनीय है कि पूर्व में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने प्रस्तावित एयरपोर्ट स्थल का व्यापक भौगोलिक निरीक्षण किया था। उस दौरान उन्होंने भी अजगैवीनाथ धाम-मुंगेर पथ और प्रक्रियाधीन अजगैवीनाथ धाम-दर्दमारा फोरलेन की सड़क सतह को काफी ऊंचा उठाने की आवश्यकता पर बल दिया था।
बावजूद इसके, अब तक इस दिशा में मैदानी स्तर पर कोई ठोस तकनीकी पहल नहीं की जा सकी है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की इस विशाल परियोजना को सुरक्षित रूप से जमीन पर उतारने से पहले बाढ़ प्रबंधन और मजबूत रिंग बांध का निर्माण करना नागरिक उड्डयन विभाग और जिला प्रशासन के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होगा।
