भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस देने का विरोध, स्वदेशी जागरण मंच ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठाए सवाल
स्वदेशी जागरण मंच ने भारत में अमेरिकी कंपनी स्टारलिंक को उपग्रह इंटरनेट सेवा का लाइसेंस देने का कड़ा विरोध किया है।

एआई द्वारा जनरेट की गई सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस देने का विरोध।
राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा संप्रभुता पर चिंता व्यक्त की।
स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देने की मांग।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। अमेरिकी कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को भारत में उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा संचालित करने की अनुमति नहीं दिए जाने की मांग को लेकर स्वदेशी जागरण मंच मुखर हो गया है।
गुरुवार को मंच के भागलपुर कार्यालय में जिला संयोजक रणजीत कुमार राय की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता, सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के अंत में मंच ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि स्टारलिंक को भारत में व्यावसायिक संचालन के लिए लाइसेंस या अंतिम अनुमति बिल्कुल न दी जाए।
बैठक को संबोधित करते हुए जिला संयोजक रणजीत कुमार राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज के समय में इंटरनेट केवल संवाद या मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वतंत्रता से जुड़ा एक संवेदनशील क्षेत्र है।
इसलिए, किसी भी विदेशी कंपनी को देश की संचार व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका सौंपने का निर्णय केवल तकनीकी सुविधा या व्यावसायिक लाभ को ध्यान में रखकर नहीं लिया जाना चाहिए, बल्कि इसके संभावित दूरगामी जोखिमों का गंभीरता से आकलन किया जाना अनिवार्य है।
डेटा सुरक्षा और निगरानी पर विशेष जोर
बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं के असीमित विस्तार के साथ-साथ नागरिकों के डेटा की सुरक्षा, संवेदनशील क्षेत्रों में सेवाओं पर कड़ा नियंत्रण तथा सुरक्षा एजेंसियों को भारतीय कानूनों के तहत पूरा सहयोग मिलने जैसे विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भारतीय नागरिकों और देश के महत्वपूर्ण संस्थानों के डेटा पर केवल भारतीय कानूनों का ही प्रभावी नियंत्रण हो। मंच ने सीमावर्ती और सामरिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में उपयोग होने वाले इंटरनेट टर्मिनलों की सटीक पहचान, उनके भौतिक स्थान के सत्यापन और सेवाओं की निरंतर निगरानी को भी बेहद जरूरी बताया।
वक्ताओं का मानना था कि अंतरराष्ट्रीय तनाव या नीतिगत मतभेदों की स्थिति में विदेशी कंपनियों की सेवाओं के बाधित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए रणनीतिक संचार व्यवस्था में घरेलू आत्मनिर्भरता बढ़ाना आज समय की सबसे बड़ी मांग है।
स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता देने की अपील
रणजीत कुमार राय ने अपने संबोधन में कहा कि "स्वदेशी" का वास्तविक अर्थ केवल देश में निर्मित भौतिक वस्तुओं का उपयोग करना भर नहीं है, बल्कि अपनी खुद की तकनीक, मजबूत उद्योग और उच्च स्तरीय अनुसंधान क्षमता को विकसित करना भी है। भारत की घरेलू कंपनियों और वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों को उपग्रह संचार तकनीक के विकास में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
इस उच्चस्तरीय बैठक में जिला सह-संयोजक डा. सुभांकर सिंह, विभाग संयोजक निर्दोष कुमार मिश्रा, डा. कृष्ण बिहारी, मीडिया प्रभारी इंदु भूषण झा, डा. वैभव सान्याल सहित कई अन्य प्रमुख कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक एवं प्रमुख मांग संबंधी विवरण
| विवरण | तथ्य एवं बिंदु |
| आयोजक संगठन | स्वदेशी जागरण मंच, भागलपुर इकाई |
| अध्यक्षता | रणजीत कुमार राय (जिला संयोजक) |
| प्रमुख मांग | अमेरिकी कंपनी स्टारलिंक को भारत में उपग्रह इंटरनेट लाइसेंस न देना |
| मुख्य चिंताएं | राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता, सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी एवं विदेशी निर्भरता |
| प्रमुख उपस्थितगण | डॉ. सुभांकर सिंह, निर्दोष कुमार मिश्रा, डॉ. कृष्ण बिहारी, इंदु भूषण झा, डॉ. वैभव सान्याल |
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