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भागलपुर विक्रमशिला सेतु के ढांचे में होगा बड़ा बदलाव; RCC की जगह बनेगी स्टील रेलिंग व फुटपाथ, दूसरे स्लैब की कटिंग पूरी

Published: Fri, 16 Oct 2026 11:53 PM (IST)

Vikramshila Setu Repair Work Bhagalpur: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर पुनर्स्थापन कार्य के दौरान महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव किए जा रहे ...और पढ़ें

Vikramshila Setu Repair Work Bhagalpur: विक्रमशिला सेतु पर तेजी से घटाया जा रहा दबाव!

Vikramshila Setu Repair Work Bhagalpur: विक्रमशिला सेतु पर तेजी से घटाया जा रहा दबाव!

HighLights

  1. पुरानी कंक्रीट रेलिंग व फुटपाथ की जगह स्टील का उपयोग।

  2. पुल की उम्र बढ़ाने और स्थायी भार कम करने का लक्ष्य।

  3. दूसरे स्लैब की कटिंग पूरी, तीसरे पर काम जारी।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Setu Repair Work Bhagalpur: भागलपुर को सीमांचल और कोसी क्षेत्र से जोड़ने वाले लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य के दौरान इसकी मूल संरचना और ढांचे में महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं। पुल की उम्र बढ़ाने और इस पर स्थायी भार (डेड लोड) कम करने के उद्देश्य से कंक्रीट (RCC) से बनी पुरानी भारी रेलिंग और फुटपाथ को पूरी तरह हटाकर उसकी जगह आधुनिक स्टील रेलिंग और स्टील फुटपाथ तैयार किया जाएगा।

पुरानी आरसीसी रेलिंग और फुटपाथ को सुरक्षित तरीके से काटने और हटाने की जिम्मेदारी पटना की फर्म 'सुहानी प्रोजेक्ट' को सौंपी गई है। तकनीकी सूत्रों के अनुसार, कंक्रीट के स्थान पर हल्के लेकिन अत्यधिक मजबूत स्टील का उपयोग करने से पुल के पिलरों और स्पैन पर अतिरिक्त दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।

दूसरे स्लैब की कटिंग पूरी, तीसरे पर काम शुरू

पुल के कमजोर स्पैन और स्लैब को तेजी से हटाने के लिए बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने बहु-एजेंसी मॉडल पर काम शुरू किया है। पूर्व से कार्यरत महाराष्ट्र की 'मैटे एसोसिएट्स' के साथ अब दिल्ली की 'मंगलम फर्म' भी पूरी मशीनरी के साथ मैदान में उतर चुकी है।

दोनों एजेंसियों की संयुक्त सक्रियता का असर यह हुआ है कि सेतु के दूसरे कमजोर स्लैब की कटिंग का काम लगभग पूरा कर लिया गया है, जबकि तीसरे स्लैब की कटिंग का काम भी समानांतर रूप से तेज कर दिया गया है।

सेतु के कैंटीलीवर को काटने के साथ-साथ स्पैन में बड़े छेद (ड्रिलिंग) किए गए हैं, ताकि आधुनिक डायमंड वायर आरी (Diamond Wire Saw) से कंक्रीट को आसानी से और बिना किसी झटके के काटा जा सके। कार्यस्थल पर धूल नियंत्रण के लिए डस्ट सप्रेशन प्रणाली का उपयोग हो रहा है और तोड़े गए कंक्रीट मलबे को बार्ज (विशेष नौकाओं) के जरिए सुरक्षित रूप से बरारी स्थित एसपी सिंगला के यार्ड में पहुंचाया जा रहा है।

800 एमएम ड्रिलिंग कर जाम किए जाएंगे पैजिस्टल

उधर, नवगछिया की ओर नए स्टील गर्डर को स्थापित करने की तैयारी भी अंतिम चरण में पहुंच गई है। तकनीकी योजना के अनुसार, तैयार स्टील गर्डर 90 एमएम मोटे लोहे से बने विशेष पैजिस्टल पर टिकाए जाएंगे।

सेतु के ढांचे में इन पैजिस्टल को पूरी मजबूती से स्थापित करने के लिए सतह पर 800 एमएम की गहरी ड्रिलिंग कर उन्हें कंक्रीट व केमिकल से पूरी तरह जाम (फिक्स) किया जाएगा। बरारी यार्ड से बड़ी फ्लोटिंग क्रेनों की मदद से गर्डर के विशाल स्टील पार्ट्स को सेतु पर लाकर असेंबल किया जा रहा है।

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"विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य को निर्धारित समय-सीमा के भीतर त्रुटिरहित पूरा करने के लिए विभिन्न तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी अलग-अलग विशेषज्ञ एजेंसियों को दी गई है। सेतु पर दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित करने और भार कम करने के लिए आरसीसी की जगह स्टील रेलिंग और फुटपाथ का निर्माण कराया जाएगा।"

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— जितेंद्र कुमार, प्रबंध निदेशक (MD), बिहार राज्य पुल निर्माण निगम।