विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अगरबत्ती की सुगंध से महकी जिंदगी, भागलपुर की सपना ने बदली कई परिवारों की तकदीर

Published: Mon, 12 Oct 2026 08:49 PM (IST)

सपना देवी ने अगरबत्ती निर्माण का उद्यम शुरू कर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि बिहपुर के ...और पढ़ें

अगरबत्ती बनाती महिलाएं। सौजन्य स्वयं

अगरबत्ती बनाती महिलाएं। सौजन्य स्वयं

HighLights

  1. सपना देवी ने अगरबत्ती उद्योग से आत्मनिर्भरता हासिल की।

  2. उनके उद्यम ने 14-16 महिलाओं को रोजगार दिया।

  3. पीएमईजीपी और जीविका से मिली वित्तीय सहायता।

ललन तिवारी, भागलपुर। जिस अगरबत्ती की सुगंध पूजा के समय घर-आंगन और मंदिरों को भक्तिमय बनाती है, उसी सुगंध ने बिहपुर प्रखंड के मिल्की गांव की सपना देवी के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई रोशनी बिखेर दी।

कभी सीमित संसाधनों के बीच परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए संघर्ष करने वाली सपना आज अपने उद्यम से न केवल परिवार की तकदीर संवार रही हैं, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं और युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं।

उनकी कहानी बताती है कि हौसले, हुनर और सही अवसर मिल जाएं तो गरीबी की चुनौतियों को भी पीछे छोड़ा जा सकता है।

सरकारी सहायता से बढ़ा कारोबार

सपना देवी ने वर्ष 2017 में अगरबत्ती निर्माण का काम शुरू किया। शुरुआती दौर में पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्होंने जीविका स्वयं सहायता समूह से 60 हजार रुपये का ऋण लिया और घर से भी कुछ राशि जुटाकर पुरानी मशीन खरीदी।

सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत और लगन से कारोबार को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखा। जनवरी 2023 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 4.80 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलने से उनके उद्यम के विस्तार का रास्ता खुला।

आज वह 'आर्यन अगरबत्ती गृह उद्योग' का संचालन कर रही हैं। उनकी इकाई में छह मशीनें लगी हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 400 से 450 किलोग्राम अगरबत्ती का उत्पादन होता है।

महिलाओं को काम, युवाओं को मिला रोजगार

सपना की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी इकाई में 14 से 16 महिलाएं काम कर रही हैं। इससे उन्हें भी आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।

वहीं, तैयार अगरबत्तियों को गांव-गांव और स्थानीय बाजारों तक पहुंचाने तथा बिक्री करने के काम में पांच से छह युवाओं को रोजगार मिला है। मोटरसाइकिल के माध्यम से उत्पादों की आपूर्ति ने कारोबार को बाजार तक पहुंचाने में मदद की है।

संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक का सफर बनी प्रेरणा

सपना देवी की पहल दिखाती है कि उचित मार्गदर्शन, पूंजी और बाजार तक पहुंच मिलने पर महिलाएं अपना उद्यम खड़ा कर सकती हैं और दूसरों के लिए भी आजीविका के अवसर पैदा कर सकती हैं।

कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली सपना आज अपने हुनर और मेहनत के बल पर कई परिवारों की उम्मीद बन गई हैं।

अगरबत्ती की सुगंध की तरह उनकी सफलता भी गांव की दूसरी महिलाओं तक आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का संदेश पहुंचा रही है।

यह भी पढ़ें- कभी सिर्फ पत्तियां तोड़ती थीं जीविका दीदियां, अब किशनगंज में खुद चला रही हैं अपनी टी फैक्ट्री