जेन-जी के लिए मिसाल! 20 की उम्र में भागलपुर में बनीं Officer, बैंककर्मी की बेटी पुनम का शेखपुरा से दिल्ली तक का सफर
Laxmi Meri Lado Poonam Kumari: 20 वर्षीय पूनम कुमारी ने अपने पहले ही प्रयास में भागलपुर की पीरपैंती नगर पंचायत ...और पढ़ें
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Laxmi Meri Lado Poonam Kumari: महज 20 साल की उम्र में पहले ही प्रयास में अफसर बनीं शेखपुरा की पुनम; पीरपैंती में कार्यपालक पदाधिकारी, अब UPSC का लक्ष्य
HighLights
20 साल की पूनम कुमारी बनीं कार्यपालक अधिकारी।
पहले प्रयास में ही हासिल की बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि।
शेखपुरा से दिल्ली तक का संघर्ष, अब UPSC लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Laxmi Meri Lado Poonam Kumari: उम्र महज 20 साल, लेकिन इरादे किसी मंजे हुए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जैसे। जिस उम्र में युवा पीढ़ी मौज-मस्ती, दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और करियर की दिशा तय करने में वक्त बिताती है, उस नाजुक उम्र में शेखपुरा की बेटी पुनम कुमारी ने अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर सरकारी अधिकारी की कुर्सी हासिल कर ली है।
एक साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर बड़े सपने संजोने वाली पुनम आज भागलपुर जिले की नवगठित पीरपैंती नगर पंचायत में कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) के पद पर पूरी गंभीरता से प्रशासनिक दायित्व संभाल रही हैं। उनकी यह कामयाबी इसलिए भी ऐतिहासिक और प्रेरणादायी है, क्योंकि उन्होंने यह मुकाम अपने पहले ही प्रयास में हासिल किया है।
शेखपुरा से दिल्ली तक का संघर्ष, एकाग्रता से मिली पहली बार में सफलता
बिहार के शेखपुरा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर नगर पंचायत के शीर्ष प्रशासनिक पद तक पहुंचने का पुनम का यह सफर अनुशासन, त्याग और अटूट समर्पण की मिसाल है। बैंक अधिकारी पिता की बेटी पुनम ने अपनी स्कूली और स्नातक स्तर तक की पढ़ाई शेखपुरा से ही पूरी की।
स्नातक के उपरांत उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया। दिल्ली में एक वर्ष रहकर उन्होंने कोचिंग और ऑनलाइन शिक्षण माध्यमों के समन्वय से दिन-रात एकाग्र होकर अध्ययन किया। अपनी इसी ठोस तैयारी की बदौलत वह बिहार सरकार द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में सम्मिलित हुईं और प्रथम प्रयास में ही सफलता का परचम लहरा दिया। इतनी कम उम्र में मिली इस शानदार उपलब्धि ने उन्हें पूरे प्रमंडल के युवाओं के बीच प्रेरणास्रोत बना दिया है।
नौकरी मिली, लेकिन मंजिल अभी बाकी: अब UPSC पर नजर
पुनम कुमारी के लिए नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी बनना मंजिल नहीं, बल्कि उनके जीवन के बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने का महज एक पड़ाव है। प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच भी उनके भीतर की अध्येता पूरी तरह सक्रिय है। पुनम बताती हैं कि कार्यालयी दायित्वों और व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी निरंतर जारी रखी है।
उनका मानना है कि सीखने और ज्ञान अर्जन करने की कोई उम्र तय नहीं होती। जीवन में निरंतर प्रगतिशील रहने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सकारात्मक बदलाव पहुंचाने के लिए लगातार अध्ययनरत रहना बेहद आवश्यक है।
जेन-जी के लिए बनीं प्रेरणा
साधारण परिवेश से निकलकर 20 साल की उम्र में कार्यपालक पदाधिकारी की कुर्सी तक पहुंचीं पुनम की यह प्रेरक दास्तान नई पीढ़ी (जेन-जी) को यह स्पष्ट संदेश देती है कि सफलता किसी की उम्र की मोहताज नहीं होती। इसके लिए लक्ष्य के प्रति अटूट निष्ठा और निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है।
छोटे शहरों और गांवों में प्रतिभाओं का अभाव नहीं है, कमी केवल सही मार्गदर्शन, समयोचित अवसर और खुद पर अटूट भरोसे की होती है। पुनम ने अपनी इस असाधारण सफलता से यह साबित कर दिया है कि सपनों को पंख देने के लिए किसी महानगर में जन्म लेना अनिवार्य नहीं, बल्कि मन में बड़ा लक्ष्य और उसे हर हाल में पाने का संकल्प होना चाहिए।
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