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गंगा में गाद से बक्सर से भागलपुर तक आफत! संजय झा बोले- केंद्र बनाए ठोस सिल्ट पॉलिसी, फरक्का संधि में तय हो बिहार का हक

Published: Wed, 04 Nov 2026 12:38 AM (IST)

Sanjay Jha Naugachia Visit Farakka Treaty: जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने गंगा में गाद की गंभीर समस्या ...और पढ़ें

Sanjay Jha Naugachia Visit Farakka Treaty: फरक्का संधि का न हो नवीनीकरण

Sanjay Jha Naugachia Visit Farakka Treaty: फरक्का संधि का न हो नवीनीकरण

HighLights

  1. केंद्र से राष्ट्रीय सिल्ट पॉलिसी बनाने की मांग।

  2. फरक्का संधि नवीनीकरण से पहले बिहार का हक तय हो।

  3. गंगा से बालू के टीले हटाना बेहद जरूरी।

संवाद सूत्र, नवगछिया (भागलपुर)। Sanjay Jha Naugachia Visit Farakka Treaty: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा है कि गंगा में निरंतर जमा हो रही गाद (सिल्ट) की गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार को अविलंब प्रभावी राष्ट्रीय सिल्ट पॉलिसी बनानी चाहिए।

नदी के बीच में जमा हो चुके बालू और गाद के बड़े-बड़े टीलों (शोल) को हटाया जाना बेहद जरूरी है, ताकि गंगा का मूल जलप्रवाह सुचारू हो सके और क्षेत्र में हर साल आने वाली प्रलयंकारी बाढ़ व कटाव के संकट को कम किया जा सके।

वे मंगलवार को भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत काजीकोरैया-राघोपुर जमींदारी बांध के स्थलीय निरीक्षण के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल और जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा भी उनके साथ उपस्थित थे।

बक्सर से भागलपुर तक गाद की समस्या, नदी का जलप्रवाह बाधित

संजय झा ने कहा कि गंगा में सिल्ट जमाव की विभीषिका केवल भागलपुर तक सीमित नहीं रह गई है। फरक्का बैराज के बैकवाटर प्रभाव के कारण गंगा के ऊपरी हिस्सों—भागलपुर से लेकर पटना और बक्सर तक—भारी मात्रा में गाद जमा हो रही है। इसके चलते नदी के बीचों-बीच कई स्थानों पर विशालकाय शोल बन गए हैं, जिन्होंने गंगा की जलधारण क्षमता को कम कर दिया है और प्रवाह को किनारों की ओर धकेल दिया है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से इन शोलों को हटाने की ठोस पहल की जाए, तो पानी का मुख्य बहाव नदी के बीच से सुगमता से होगा, जिससे तटवर्ती इलाकों पर कटाव का दबाव काफी कम हो जाएगा।

फरक्का संधि के नवीनीकरण पर दो टूक रुख

फरक्का जलसंधि के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए संजय झा ने स्पष्ट कहा कि इस संधि का नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार इस दिशा में कोई कदम उठाती भी है, तो किसी भी औपचारिक बातचीत से पहले बिहार के हिस्से के पानी का स्पष्ट और न्यायसंगत निर्धारण होना चाहिए। गंगा के प्राकृतिक प्रवाह, गाद के संकट और बाढ़ से मुक्ति का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब बिहार के हितों को सर्वोपरि रखा जाए।

तकनीकी अध्ययन और शीट पाइलिंग तकनीक पर जोर

सांसद ने कहा कि नदी की प्राकृतिक गहराई बहाल रखने के लिए गाद प्रबंधन की समयबद्ध तकनीकी रूपरेखा आवश्यक है। इसके लिए जल संसाधन विशेषज्ञों के अध्ययन के आधार पर गाद हटाने की वैज्ञानिक व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने तटबंधों को कटाव से बचाने के लिए शीट पाइलिंग जैसी आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के उपयोग का भी सुझाव दिया।

जमींदारी बांध का निरीक्षण कर जानी जमीनी हकीकत

इससे पूर्व, संजय झा ने ऊर्जा मंत्री और जदयू नेताओं के साथ काजीकोरैया-राघोपुर जमींदारी बांध का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने जल संसाधन विभाग के अभियंताओं से बाढ़ पूर्व तैयारियों, सुरक्षात्मक कार्यों और गंगा के कटाव की वर्तमान स्थिति का ब्योरा लिया। इस दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा जिला और प्रदेश स्तर के कई प्रमुख जदयू पदाधिकारी व स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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