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'12 दिसंबर 2026 को खत्म हो रही फरक्का जलसंधि, बिहार के साथ 30 साल पुराना अन्याय नहीं दोहराने देंगे'

Published: Wed, 04 Nov 2026 12:30 AM (IST)

Farakka Treaty Bihar JDU Nitish Samvad: फरक्का जलसंधि की मियाद 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है, जिसके बाद ...और पढ़ें

Farakka Treaty Bihar JDU Nitish Samvad: जदयू नेता फरक्का जलसंधि से बिहार को 73% पानी का नुकसान।

Farakka Treaty Bihar JDU Nitish Samvad: जदयू नेता फरक्का जलसंधि से बिहार को 73% पानी का नुकसान।

HighLights

  1. फरक्का जलसंधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होगी।

  2. बिहार के जल हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं।

  3. वैज्ञानिक आकलन से बिहार की जरूरतें तय हों।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। फरक्का जलसंधि में बिहार के हितों की अनदेखी अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 12 दिसंबर 2026 को संधि की 30 वर्षीय मियाद पूरी होने जा रही है। इसके बाद बांग्लादेश के साथ होने वाली किसी भी नई बातचीत या समझौते में बिहार की पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक आवश्यकताओं का वैज्ञानिक आकलन किया जाना अनिवार्य है।

तीन दशक पहले बिहार के साथ जो ऐतिहासिक अन्याय हुआ था, उसे अब दोबारा दोहराने नहीं दिया जाएगा। ये बातें जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने मंगलवार को भागलपुर के टाउन हॉल में आयोजित 'फरक्का जलसंधि पर नीतीश संवाद' को संबोधित करते हुए कहीं।

30 साल में दोगुनी हुई आबादी, जल वितरण व्यवस्था में भारी असंतुलन

संजय झा ने तथ्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि जब वर्ष 1996 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने बांग्लादेश के साथ फरक्का जलसंधि की थी, तब बिहार और झारखंड एक ही राज्य थे और सम्मिलित आबादी करीब सात करोड़ थी। आज बिहार की आबादी बढ़कर दोगुनी से अधिक हो चुकी है, लेकिन उस समय संधि की शर्तों में बिहार की भविष्य की जरूरतों का कोई आकलन नहीं किया गया।

उन्होंने दावा किया कि जनवरी से मई के शुष्क महीनों के दौरान गंगा में बिहार की सहायक नदियों से आने वाले जल का बड़ा हिस्सा बांग्लादेश की ओर बह जाता है। स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश से बक्सर के रास्ते गंगा में महज 400 क्यूसेक पानी आता है, जबकि संधि के तहत बांग्लादेश को 1500 क्यूसेक पानी देने की बाध्यता तय की गई है। इस असंतुलन की भारी कीमत बिहार चुका रहा है।

Farakka Water Treaty Ends 2026 Bihar Demands Fair Share

गाद और कटाव से गहराता बाढ़ का संकट

कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि बिहार दोहरा दंश झेलने को विवश है—बरसात में विनाशकारी बाढ़ और गर्मियों में पेयजल व सिंचाई के लिए जलसंकट। फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद (सिल्ट) का जमाव निरंतर बढ़ रहा है, जिससे नदी उथली हो गई है और उसकी जलधारण क्षमता घट गई है। इसके चलते हर साल बिहार सरकार को बाढ़ राहत और बचाव कार्यों पर भारी राजस्व खर्च करना पड़ता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि गंगा की अविरल धारा बनाए रखते हुए फरक्का बराज की मौजूदा उपयोगिता और उसके दुष्प्रभावों का नए सिरे से व्यापक मूल्यांकन होना चाहिए। पार्टी में किसी भी मतभेद को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जदयू पूरी तरह एकजुट है।

संधि से बिहार को 73 फीसदी पानी का नुकसान : उमेश कुशवाहा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि फरक्का जलसंधि से सबसे गंभीर आघात बिहार के किसानों पर पड़ा है। पर्याप्त पानी न मिलने से कृषि क्षेत्र प्रभावित है, वहीं गंगा तटीय गांवों में भीषण कटाव हो रहा है।

उन्होंने दावा किया कि मौजूदा संधि प्रावधानों के चलते बिहार को करीब 73 प्रतिशत पानी का नुकसान उठाना पड़ रहा है। भविष्य में कोई भी फैसला देश और बिहार के जल अधिकारों को सर्वोपरि रखकर ही लिया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि जल अधिकारों की रक्षा के लिए 5 सितंबर को बक्सर से शुरू हुआ यह जन-जागरण अभियान भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया समेत 14 जिलों से गुजरते हुए बुधवार को कटिहार में औपचारिक रूप से संपन्न होगा।

'नीतीश संवाद' में नेताओं ने उठाई तकनीकी पुनर्मूल्यांकन की मांग

संवाद कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल ने कहा कि वर्ष 2016 की प्रलयंकारी बाढ़ के बाद से ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फरक्का बराज और गाद प्रबंधन का मुद्दा राष्ट्रीय पटल पर लगातार उठाया है। वहीं पूर्व विधायक लक्ष्मीकांत मंडल, पूर्व राज्यसभा सांसद कहकशां परवीन, कहलगांव विधायक शोभानंद मुकेश, धौरेया विधायक मनीष कुमार, विधायक ललित नारायण मंडल, विधान पार्षद विजय सिंह और प्रदेश उपाध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने एक स्वर में कहा कि औद्योगिक विस्तार और सांस्कृतिक अस्मिता के लिए बिहार के जल संसाधनों का संरक्षण अपरिहार्य है।

कार्यक्रम के आरंभ में जदयू जिलाध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता व कार्यकर्ताओं ने शीर्ष नेताओं का चांदी का मुकुट पहनाकर स्वागत किया। मंच संचालन शैलेंद्र तोमर और नवगछिया जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह कुशवाहा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संजय साह ने किया। मौके पर प्रहलाद सरकार, सुड्डू साईं, रामाधार सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी मौजूद थे।

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