भागलपुर शिक्षा विभाग में 98 लाख के गबन के बाद बड़ा बदलाव; बिहार में बनेगा वेतन कोषांग, DEO की अनुमति बिना वेतन नहीं
Bihar Education Salary Cell New Rules: भागलपुर शिक्षा विभाग में 98 लाख के गबन के बाद, बिहार में पहली बार ...और पढ़ें

Bihar Education Salary Cell New Rules: प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
भागलपुर गबन के बाद बिहार में वेतन कोषांग गठित।
DEO की सीधी अनुमति बिना वेतन जारी नहीं।
शिक्षकों के वेतन भुगतान में अब तीन-स्तरीय जांच।
अभिषेक प्रकाश, भागलपुर। Bihar Education Salary Cell New Rules: जिला शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा में फर्जी शिक्षिका के नाम पर हुए करीब 98 लाख 12 हजार रुपये के बहुचर्चित गबन कांड के बाद प्रशासनिक महकमे में व्यापक स्तर पर ओवरहालिंग शुरू हो गई है। वित्तीय हेराफेरी के रास्ते हमेशा के लिए बंद करने के उद्देश्य से अब पूरे राज्य में पहली बार भागलपुर प्रमंडल के भागलपुर और बांका जिले में एक विशेष 'वेतन कोषांग' (सैलरी सेल) का गठन किया जा रहा है।
क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (RDD) सुभाष कुमार गुप्ता की इस सख्त पहल को दुर्गा पूजा की छुट्टियों से पहले दोनों जिलों में पूरी तरह प्रभावी कर दिया जाएगा। इस नई प्रणाली के लागू होने के बाद अब जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के प्रत्यक्ष अनुमोदन के बिना किसी भी शिक्षक अथवा कर्मचारी का वेतन जारी नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही भुगतान से पूर्व फाइलों को तीन कड़े जांच चक्रों से गुजरना होगा।
वेतन भुगतान से पहले 3 स्तरों पर होगी स्क्रूटनी
अब तक की कार्यप्रणाली में स्थापना शाखा के डीपीओ स्तर से ही वेतन एडवाइस आगे बढ़ाकर ट्रेजरी भेज दी जाती थी, जिसका फायदा उठाकर बर्खास्त ऑपरेटर ने गोपनीय पासवर्ड से बड़ा खेल कर दिया था। नई व्यवस्था में इस अधिकार को विकेंद्रीकृत और बहुस्तरीय बनाया गया है:
प्रथम चरण: लिपिक स्तर पर वेतन विपत्रों, उपस्थिति पंजी और बैंक विवरणों का सूक्ष्म परीक्षण होगा।
द्वितीय चरण: डीपीओ (स्थापना) दावों की प्रामाणिकता की जांच कर अपनी अनुशंसा के साथ जिम्मेदारी तय करेंगे।
तृतीय चरण: डीईओ और उनकी विशेष सेल द्वारा बिल की अंतिम समीक्षा की जाएगी।
डीईओ की अंतिम डिजिटल संस्तुति के बाद ही राशि ट्रेजरी को प्रेषित होगी। यह सख्त नियम शिक्षकों के नियमित वेतन के साथ-साथ एरियर, मकान किराया भत्ता (HRA) और सीटीए (CTA) के एकमुश्त भुगतानों पर भी सख्ती से लागू रहेगा।
डीईओ ऑफिस रखेगा हर पाई का हिसाब
नई व्यवस्था के तहत डीपीओ स्थापना को प्रत्येक माह डीईओ कार्यालय को वेतन भुगतान का पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इसमें कितने शिक्षकों को वेतन निर्गत हुआ, कितने मामलों में एरियर जारी हुआ और किस मद से कितनी राशि निकली, इसका पूरा ब्योरा डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित रहेगा।
लापरवाही पर नपेंगे अफसर
डीईओ कार्यालय में डाटा समीक्षा के दौरान किसी भी स्तर पर विसंगति या जानकारी छिपाने की बात सामने आई, तो संबंधित लिपिक और पदाधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डीईओ स्तर से समेकित रिपोर्ट हर माह क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय को भेजी जाएगी।
संविदाकर्मियों की आईडी और काम की होगी विशेष पड़ताल
गबन कांड में जिस तरह सेवामुक्त संविदा ऑपरेटर नियमित लिपिक की आईडी-पासवर्ड का महीनों तक दुरुपयोग करता रहा, उससे सबक लेते हुए विभाग ने कड़ा फैसला लिया है। जिला शिक्षा कार्यालय में तैनात सभी संविदाकर्मियों का नए सिरे से ओरिएंटेशन कराया जाएगा।
कौन सा संविदाकर्मी कौन सा काम कर रहा है और वह किस अधिकृत पदाधिकारी या लिपिक की आईडी का उपयोग कर रहा है, इसका विस्तृत रजिस्टर डीईओ कार्यालय में संधारित होगा। किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के हाथ में सिस्टम का एक्सेस पाए जाने पर संबंधित शाखा प्रभारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
शिक्षकों की हाजिरी की रोजाना मॉनिटरिंग
वेतन में पारदर्शिता के साथ-साथ शिक्षकों की कार्यशैली और विद्यालयों में समयबद्ध उपस्थिति पर भी शिकंजा कसा जाएगा। प्रखंड स्तर पर बीईओ (प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी) और जिला स्तर पर डीईओ की सीधी निगरानी रहेगी।
ई-शिक्षाकोष पर नजर
ई-शिक्षाकोष पोर्टल के जरिए रोजाना यह ट्रैक किया जाएगा कि कितने शिक्षकों ने ससमय इन-आउट दर्ज किया, कितने अवकाश पर रहे और कितने 'मार्क ऑन ड्यूटी' पर थे। यह दैनिक रिपोर्ट डीईओ कार्यालय में कंपाइल होगी और साप्ताहिक आधार पर समीक्षा कर ही उस माह के वेतन का आधार बनेगी।
"राज्य में पहली बार भागलपुर और बांका में वेतन कोषांग की नई व्यवस्था दुर्गा पूजा की छुट्टी से पहले लागू की जा रही है। इसका एकमात्र उद्देश्य वेतन निकासी की पूरी प्रक्रिया को त्रुटिहीन, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, ताकि भविष्य में कोई भी विभागीय भरोसे का दुरुपयोग न कर सके।"
