बेल, कटहल, अनार और आंवले की खेती पर सरकार देगी ₹1 लाख प्रति एकड़; भागलपुर के इन गांवों में बनेंगे क्लस्टर
भागलपुर में उद्यान विभाग फलदार पौधों की खेती को बढ़ावा दे रहा है, जिसके तहत बेल, कटहल, अनार और आंवले ...और पढ़ें
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एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
भागलपुर में 100 एकड़ में फलदार पौधों की खेती।
बेल, कटहल, अनार, आंवले के क्लस्टर विकसित होंगे।
किसानों को प्रति एकड़ एक लाख रुपये की सहायता।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिले में फलदार पौधों की खेती को बढ़ावा देने और दूसरे राज्यों से बेल, कटहल, अनार व आंवले की आपूर्ति पर निर्भरता कम करने के लिए उद्यान विभाग ने पहल की है।
इसके तहत जिले के तीन स्थानों पर चार फलदार फसलों की खेती के लिए कलस्टर विकसित किए जा रहे हैं। प्रत्येक फसल के लिए 25-25 एकड़ जमीन पर खेती की योजना है।
किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग की ओर से प्रति एकड़ एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ही जिले में फल उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
उद्यान विभाग के अनुसार, कहलगांव प्रखंड के कैरिया में 25 एकड़ में कटहल और 25 एकड़ में बेल की खेती की जाएगी। इसी प्रखंड की सिया पंचायत में 25 एकड़ में अनार के पौधे लगाए जाएंगे।
वहीं, सन्हौला प्रखंड के भोल्सर में 25 एकड़ क्षेत्र में आंवले की खेती की योजना है। इस तरह जिले में कुल 100 एकड़ भूमि पर चार प्रकार के फलदार पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
तीन वर्षों तक संचालित होगी योजना
यह योजना वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2027-28 तक तीन वर्षों के लिए राज्य योजना मद से संचालित की जाएगी। कृषि विभाग की पहल पर 'गांव की बागवानी, हमारे गौरव की कहानी' कार्यक्रम के तहत उद्यानिक फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके लिए किसानों को कलस्टर के रूप में संगठित कर बड़े क्षेत्र में एक ही प्रकार की फसल लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे उत्पादन बढ़ाने और फल आधारित आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
पौधों की देखभाल पर मिलेगा शेष अनुदान
योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। पहले वर्ष किसानों को स्वीकृत राशि का 60 प्रतिशत यानी 60 हजार रुपये मिलेंगे।
शेष 40 प्रतिशत राशि अगले वर्ष तभी दी जाएगी, जब खेत में लगाए गए कम से कम 90 प्रतिशत पौधे जीवित रहेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य पौधों के रोपण के साथ उनकी नियमित देखभाल और बेहतर रखरखाव सुनिश्चित करना है।
हालांकि, अच्छी गुणवत्ता वाले पौधों की व्यवस्था, ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाने और खेतों की घेराबंदी करने की जिम्मेदारी किसानों को स्वयं निभानी होगी। ऐसे में किसानों को शुरुआत में इन व्यवस्थाओं के लिए भी तैयारी करनी होगी।
विभाग की इस पहल से जिले में पारंपरिक खेती के साथ फल उत्पादन के नए विकल्प विकसित होने की संभावना है। बेल, कटहल, अनार और आंवले की स्थानीय स्तर पर खेती बढ़ने से भविष्य में बाजार की मांग पूरी करने और किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल सकता है।
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