मछली पालन का नया हब बनेगा मुंगेर, 195 जलक्षेत्र बनेंगे वेटलैंड क्लस्टर; मछुआरों की बढ़ेगी कमाई
मुंगेर जिले के 195 जलक्षेत्रों को वेटलैंड क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे मछली पालन को बढ़ावा मिलेगा और मछुआरों की आय बढ़ेगी।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
195 जलक्षेत्र वेटलैंड क्लस्टर के रूप में विकसित होंगे।
मछली पालन से मछुआरों की आय में वृद्धि होगी।
सहकारिता विभाग की पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत।
जागरण संवाददाता, मुंगेर। जिले के 195 जलक्षेत्रों का अब कायाकल्प होगा। इन्हें वेटलैंड क्लस्टर के रूप में विकसित कर मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मछुआरों की आमदनी बढ़ाने की योजना तैयार की गई है।
इसके तहत छोटे-छोटे मत्स्यपालकों को सहकारिता के दायरे में लाकर संगठित किया जाएगा। साथ ही मछली पालन और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए उन्हें सरकारी सब्सिडी का लाभ भी दिया जाएगा।
इस दिशा में पहली बार सहकारिता विभाग के माध्यम से पहल की जा रही है। योजना के तहत जिले के सभी नौ प्रखंड में पैक्स स्तर पर विशेष फिशरी क्लस्टर तैयार किए जाएंगे।
इसके लिए मत्स्य पालन सहयोग समितियों का गठन किया जाएगा। जिले में पहले से गठित समितियों को भी सक्रिय और सशक्त बनाया जाएगा।
समितियों के माध्यम से जल क्षेत्रों का सामूहिक प्रबंधन, आधुनिक तकनीक से मछली पालन और उत्पादित मछलियों की बेहतर कीमत पर बिक्री की व्यवस्था विकसित करने पर जोर रहेगा।
इससे छोटे मत्स्यपालकों को बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और सामूहिक रूप से आर्थिक लाभ हासिल करने का अवसर मिलेगा।
रेहु और कतला से मुंगेर की पहचान
जिले में रेहु और कतला मछली का पालन प्रमुखता से होता है। बेहतर वृद्धि और बाजार में मांग के कारण मत्स्यपालक इन प्रजातियों को प्राथमिकता देते हैं।
इसके अलावा मृगल, पंगास और कामन कार्प का भी पालन किया जा रहा है। वेटलैंड क्लस्टर विकसित होने से इन प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हवेली खड़गपुर झील बनेगी आजीविका का आधार
हवेली खड़गपुर झील को जिले के बड़े वेटलैंड क्लस्टर के रूप में चिह्नित है। झील के जलक्षेत्र का बेहतर प्रबंधन कर इसे स्थानीय मछुआरों के लिए रोजगार और आय का प्रमुख साधन बनाने की योजना है।
जलस्रोतों के पुनर्जीवन के साथ मत्स्य उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वेटलैंड क्लस्टर योजना को धरातल पर उतारने के लिए सहकारिता विभाग ने पहल शुरू कर दी है। सभी बीडीओ और पैक्स अध्यक्षों को इच्छुक मत्स्यपालकों का समूह बनाने के लिए निर्देशित किया गया है।
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क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सहकारिता विभाग को सौंपी गई है। वहीं, मत्स्य विभाग तकनीकी समन्वय स्थापित कर योजना को प्रभावी बनाने में सहयोग करेगा। मत्स्यपालकों को आधुनिक तकनीक से मछली पालन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा। जलक्षेत्रों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, मत्स्य पालन की बेहतर व्यवस्था विकसित करने और मत्स्यपालकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने में विभाग की भूमिका होगी। दोनों विभागों के समन्वय से योजना को प्रभावी बनाया जाएगा।
आशीष कुमार ,जिला मत्स्य पदाधिकारी
छोटे-छोटे मत्स्यपालकों को समूह से जोड़कर सहकारिता के माध्यम से मछली पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए प्रखंड एवं पैक्स स्तर पर फिशरी क्लस्टर विकसित करने की योजना है। समूह के माध्यम से मत्स्यपालकों को सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और सामूहिक विपणन का लाभ दिलाने की पहल की जाएगी।
मीनू कुमारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी