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बिहार में टीचरों के वेतन भुगतान की होगी जांच, 98 लाख के फर्जीवाड़े के बाद जागा वित्त विभाग

By Abhishek PrakashEdited By: Piyush Pandey
Published: Sat, 10 Oct 2026 11:58 PM (IST)Updated: Sun, 11 Oct 2026 12:10 AM (IST)

भागलपुर में फर्जी शिक्षिका को 98.12 लाख रुपये के वेतन भुगतान के मामले के बाद बिहार वित्त विभाग सख्त हो गया है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. भागलपुर में फर्जी शिक्षिका को 98 लाख का भुगतान।

  2. बिहार वित्त विभाग ने वेतन जांच के दिए आदेश।

  3. सभी सरकारी कर्मियों के वेतन की होगी शत-प्रतिशत जांच।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिला शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षिका के नाम पर 98.12 लाख रुपये के वेतन भुगतान का मामला सामने आने के बाद बिहार सरकार का वित्त विभाग सख्त हो गया है।

वित्त विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र जारी कर राज्यभर में पदाधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों के वेतन एवं भत्तों की शत-प्रतिशत जांच करने का निर्देश दिया है। अगले माह के वेतन भुगतान से पहले यह जांच अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी।

नौ अक्टूबर को जारी पत्र में वित्त विभाग ने कहा है कि राज्यकर्मियों का वेतन विपत्र एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से तैयार किया जाता है।

मेकर, चेकर और अप्रूवर स्तर पर सत्यापन के बाद सीएफएमएस के माध्यम से भुगतान होता है। शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों के वेतन भुगतान से जुड़े आंकड़ों की जांच में प्रथम दृष्टया कई विसंगतियां सामने आई हैं।

वित्त विभाग ने मुख्यालय सहित सभी कार्यालयों में वेतन और भत्तों की जांच वरिष्ठ पदाधिकारियों के निर्देशन में कराने को कहा है।

साथ ही, जिन मेकर, चेकर और अप्रूवर के स्तर पर अनियमितता पाई जाएगी, उनके विरुद्ध विधिसम्मत आपराधिक एवं अनुशासनिक कार्रवाई करने और अधिक भुगतान की राशि वसूलने का निर्देश दिया गया है।

इसके अलावा मेकर, चेकर और अप्रूवर की जिम्मेदारी प्राथमिकता के आधार पर नियमित पदाधिकारियों को ही देने को कहा गया है।

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