भागलपुर बियाडा गंगा घाट पर जलयान बने लाइफलाइन! प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को मिली एंबुलेंस, पशुओं को भी मिला भोजन
Bhagalpur Water Transport BIADA Ghat: विक्रमशिला सेतु पर पाबंदियों और बाढ़ के कारण भागलपुर-नवगछिया के बीच गंगा जलमार्ग जीवनरेखा बन ...और पढ़ें

Bhagalpur Water Transport BIADA Ghat: जहाज का हो रहा परिचालन
HighLights
जलमार्ग ने विक्रमशिला सेतु की पाबंदियों के बीच कनेक्टिविटी दी।
प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को तत्काल चिकित्सा सहायता मिली।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारा पहुंचाना आसान हुआ।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Water Transport BIADA Ghat: विक्रमशिला सेतु पर आवागमन की पाबंदियों और बाढ़ के संकट के बीच गंगा के दोनों किनारों को जोड़ने वाला जलमार्ग अब भागलपुर और नवगछिया के लोगों के लिए सच्ची 'लाइफलाइन' साबित हो रहा है। सुबह की पहली किरण के साथ ही गंगा की शांत लहरों पर जिंदगी फिर रफ्तार पकड़ती नजर आई। शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी और आंगनबाड़ी सेविकाएं जहां ड्यूटी पर पहुंचने की जल्दी में जलयानों में सवार हो रहे हैं, वहीं राहत शिविरों में बंधे मवेशियों के लिए महिलाएं सिर पर हरा चारा लेकर गंगा पार कर रही हैं।
बियाडा घाट पर रविवार सुबह आठ बजे तक तीन जलयान नवगछिया की ओर रवाना हो चुके थे, जबकि नवगछिया छोर से दो जलयान यात्रियों को लेकर सुरक्षित बियाडा पहुंचे। जलस्तर में आई आंशिक गिरावट के बाद तीनों जेटी पर जलयानों का लगना और यात्रियों का चढ़ना-उतरना काफी सहज हो गया है।
प्रसव पीड़ा से कराहती पहुंची महिला
जलमार्ग की संवेदनशीलता और उपयोगिता उस वक्त देखने को मिली, जब नवगछिया छोर से आए एक जलयान से प्रसव पीड़ा से कराहती गुलसाना खातून अपने परिजनों के साथ बियाडा घाट पर उतरीं। उनके पति नवाज आलम ने बताया कि रात से ही पत्नी की तबीयत बिगड़ने लगी थी। नवगछिया में समुचित चिकित्सा व्यवस्था न मिलने के कारण वे सुबह भागलपुर आने को मजबूर हुए। बाढ़ के पानी के बीच काफी दूर पैदल चलकर वे किसी तरह जलयान तक पहुंचे थे।
घाट पर मिला देवदूत जैसा सहारा
बियाडा घाट पर कदम रखते ही जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए मेडिकल कैंप के स्वास्थ्यकर्मियों ने तुरंत गुलसाना को संभाला। प्राथमिक जांच के बाद बिना समय गंवाए घाट पर तैनात एंबुलेंस से उन्हें मायागंज (जेएलएनएमसीएच) अस्पताल भेजा गया। परिजनों ने घाट पर प्रशासन के इस त्वरित इंतजाम की जमकर सराहना की।
पशुओं के लिए सिर पर हरा चारा
जलमार्ग केवल इंसानों का ही सहारा नहीं बना है, बल्कि यह राहत शिविरों में बंधे बेजुबानों की भूख मिटाने का भी जरिया बन चुका है। नवगछिया से सिर पर भारी हरा चारा लेकर बियाडा पहुंचीं झिंगली देवी ने बताया कि पॉलिटेक्निक स्थित राहत शिविर में उनके मवेशी रखे हैं। घरों में पानी होने के कारण उन्हें वापस नहीं ले जा पा रहे हैं।
जलमार्ग ने आसान की राह
शहर के शिविरों में हरे चारे का अभाव है, इसलिए वे नवगछिया से चारा काटकर ला रही हैं। उन्होंने बताया कि जलयान चलने से बिना किसी अतिरिक्त खर्च और झंझट के वे चारा लेकर पहुंच सकीं। इसी मार्ग से किसान केला, सब्जी और अन्य दैनिक जरूरत की चीजें भी आसानी से शहर पहुंचा रहे हैं।
3 मंजिला जलयान में गंगा विहार सा नजारा
यातायात के लिए चल रहे तीन मंजिला बड़े जलयान में यात्रियों के बैठने की माकूल व्यवस्था है। जलयान की ऊपरी मंजिल से गंगा की शांत धारा का मनोहारी दृश्य यात्रियों को सफर के साथ एक अलग 'गंगा विहार' का आनंद भी दे रहा है।
प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद
व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए बियाडा घाट पर प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट है। जलमार्ग के नोडल पदाधिकारी सह एडीएम (विधि-व्यवस्था) राकेश रंजन और एडीएमओ (आपदा) ज्ञानेश गुंजन के नेतृत्व में अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। जेटी या रैंप पर किसी भी प्रकार की खामी या कीचड़ दिखने पर बुलडोजर से तत्काल रास्ता दुरुस्त कराया जा रहा है। आपदा मित्र अमित, तुलसी, जनार्दन और अल्ताफ भी यात्रियों की सहायता में मुस्तैदी से डटे हैं।
घाट किनारे छोटे कारोबारियों की बढ़ी आमदनी
यात्रियों की निरंतर आवाजाही ने घाट के आसपास छोटे फुटपाथी कारोबारियों के चेहरे पर भी मुस्कान ला दी है। बादाम-चना, बोतलबंद पानी, बिस्कुट और चाय-नाश्ते की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि जलमार्ग के सुचारू होने से उनकी दैनिक बिक्री दो से तीन गुना तक बढ़ गई है। कुल मिलाकर यह जलमार्ग अब केवल एक वैकल्पिक रास्ता नहीं, बल्कि दोनों किनारों की आजीविका, सेहत और उम्मीदों को जोड़ने वाला मजबूत सेतु बन चुका है।
