ईरान-इजराय युद्ध से भागलपुर कपड़ा उद्योग प्रभावित, सिल्क और सूती के कपड़ों में 30% तक वृद्धि
पश्चिमी एशिया संकट के कारण भागलपुर के वस्त्र उद्योग पर प्रतिकूल असर पड़ा है। धागे और रंग के दाम बढ़ने, ...और पढ़ें
जागरण संवाददाता, भागलपुर। पश्चिमी एशिया संकट का प्रतिकूल असर भागलपुर के वस्त्र उद्योग पर भी पड़ा है। वस्त्र निर्माण का लागत बढ़ने के कारण यहां तैयार होने वाले सिल्क और सूती कपड़ों की कीमत में 30 प्रतिशत तक की तेजी आई है। रही सही कसर गैस सिलिंडर की कमी ने पूरी कर दी है।
बुनकर भवेश कुमार दास ने कहा कि युद्ध का असर हमारे उत्पाद पर पड़ रहा है। कपड़ा बनाने के लिए जो धागा हमारे पास आता है, उसका दाम बढ़ गया है। धांगा को रंगने के लिए जिस रंग का उपयोग होता है, वह भी महंगा हो गया है।
कपड़ों की कीमतों में तीस प्रतिशत तक की वृद्धि
रंगाई का कार्य करने वाले मजदूरों ने अपनी मजदूरी बढ़ा दी है। इसके अलावा गैस की कमी है। जिस वजह से रंगाई का काम लकड़ी और कोयला से किया जा रहा है। इसमें भी ज्यादा खर्च होता है। कुल मिला कर यहां के कपड़े में तीस प्रतिशत तक वृद्धि देखी जा रही है।
हालात न सुधरने पर और बढ़ेंगे दाम
बुनकर कहते हैं कि अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में कपड़े का दाम और ज्यादा बढ़ सकता है। करीब पांच साल के बाद रंग की कीमत में दस प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
लकड़ी और कोयला पर रंगाई करने में समय भी अधिक लगता है और मजदूरी भी। जो काम एक दिन में होता है, उसको करने में दो दिन का समय लग रहा है।
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