भागलपुर में शिक्षकों को बंटा अतिरिक्त वेतन, 381 ने लौटाए ₹1.60 करोड़, किसी को ₹181 तो किसी को मिले 4 लाख एक्स्ट्रा
Bhagalpur Teacher Salary Scam: भागलपुर शिक्षा विभाग में अतिरिक्त वेतन भुगतान की बड़ी अनियमितता सामने आई है, जिसमें 381 शिक्षकों ...और पढ़ें

Bhagalpur Teacher Salary Scam: भागलपुर में शिक्षकों को अतिरिक्त वेतन भुगतान का मामला। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
381 शिक्षकों ने ₹1.60 करोड़ अतिरिक्त वेतन लौटाया।
CFMS से HRMS शिफ्टिंग में हुई बड़ी गड़बड़ी।
शिक्षक बार-बार दस्तावेज मांगे जाने से परेशान।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Teacher Salary Scam: जिला शिक्षा विभाग में अतिरिक्त वेतन भुगतान और वित्तीय अनियमितता के बड़े मामले में विभाग की सख्ती के बाद अब तक 381 शिक्षकों ने अतिरिक्त प्राप्त राशि डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) के माध्यम से शिक्षा विभाग के बैंक खाते में वापस जमा करा दी है।
विभागीय आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह कुल राशि लगभग 1.60 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। इस राशि में 98.12 लाख रुपये के चर्चित फर्जी वेतन भुगतान मामले में बैंक खातों में पहले से होल्ड (फ्रीज) कराए गए 46 लाख रुपये भी शामिल हैं। विभाग ने अतिरिक्त राशि वापस लौटाने के लिए आज तक की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की है।
न्यूनतम 181 रुपये से लेकर अधिकतम 4 लाख तक हुआ था अतिरिक्त भुगतान
जिला शिक्षा विभाग की आंतरिक जांच में बेहद हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। कई शिक्षकों के खाते में जहां न्यूनतम 181 रुपये की अतिरिक्त राशि गई, वहीं कुछ शिक्षकों के खातों में अधिकतम चार लाख रुपये तक का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया। यह अतिरिक्त राशि मूल वेतन के साथ-साथ मकान किराया भत्ता (एचआरए) और नगर परिवहन भत्ता (सीटीए) मद की थी।
इतना ही नहीं, तकनीकी व प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह रहा कि कतिपय शिक्षकों के बैंक खातों में एक ही माह के भीतर तीन से चार बार तक वेतन क्रेडिट कर दिया गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे अतिरिक्त राशि पाने वाले शिक्षकों की संख्या में और इजाफा हो रहा है।
CFMS से HRMS शिफ्टिंग में गड़बड़ी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गड़बड़ी का शिकार अधिकांश वे शिक्षक हुए हैं, जो पूर्व में नियोजित शिक्षक थे और बाद में सक्षमता परीक्षा उत्तीर्ण कर विशिष्ट शिक्षक बने। इनमें से कई शिक्षक वर्तमान में प्रधान शिक्षक अथवा प्रधानाध्यापक पद पर प्रोन्नत हुए हैं।
बिल बनाने वाले कर्मियों पर उठे सवाल
दरअसल, पहले नियोजित शिक्षकों का वेतन व्यापक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (सीएफएमएस) से भुगतान किया जाता था, जबकि विशिष्ट शिक्षक बनने के बाद इनका भुगतान मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) पोर्टल पर स्थानांतरित कर दिया गया।
पोर्टल परिवर्तन के दौरान डाटा अपलोडिंग और सत्यापन में बड़े पैमाने पर लापरवाही बरती गई। एक ही शिक्षक के दोहरे बिल जनरेट हो गए और बिना किसी भौतिक मिलान के भुगतान भी कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण में वेतन विपत्र (बिल) तैयार करने वाले स्थापना शाखा के कर्मियों और भुगतान से पूर्व फाइलों की जांच करने वाले उत्तरदायी लिपिकों व अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वेतन के लिए बार-बार दस्तावेज मांगने पर भड़का शिक्षक संघ
इधर, प्रारंभिक विद्यालयों के शिक्षकों के नियमित वेतन भुगतान की प्रक्रिया में बार-बार बदलाव किए जाने और उनसे पुनः प्रमाण पत्रों की मांग किए जाने पर शिक्षकों में भारी असंतोष व्याप्त हो गया है। प्रारंभिक माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस दोहरी कागजी कवायद पर कड़ा एतराज जताया है।
आरडीडीई से शिकायत
संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. शेखर गुप्ता ने क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (आरडीडीई) से व्यक्तिगत वार्ता कर इस गैर-जरूरी प्रक्रिया पर तीव्र नाराजगी प्रकट की। उन्होंने दोटूक कहा कि हाल ही में जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) कार्यालयों में शिक्षकों ने अपने शैक्षणिक व प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्र चार-चार प्रतियों में विधिवत जमा कराए थे।
इसके बावजूद विपत्र तैयार करने के नाम पर नए-नए प्रारूप बनाकर शिक्षकों से बार-बार कागजात मांगे जा रहे हैं, जिससे शिक्षण कार्य बाधित हो रहा है और शिक्षक मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। शिक्षकों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आरडीडीई ने भरोसा दिलाया है कि अनावश्यक कागजी उलझनों को समाप्त किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित विपत्र कर्मियों और प्रधानाध्यापकों को दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। यदि किसी कर्मी द्वारा जानबूझकर शिक्षकों से अनावश्यक दस्तावेज मांगकर भुगतान में विलंब किया गया, तो उनके विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाएगी।
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