भागलपुर में 350 शिक्षकों को एक ही माह में कई बार हुआ वेतन भुगतान; शिक्षा विभाग ने कहा- अतिरिक्त राशि लौटा दें
Bhagalpur Teacher Salary Scam: भागलपुर में शिक्षा विभाग की गंभीर खामियां सामने आई हैं, जहां पिछले तीन वर्षों में 350 ...और पढ़ें
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Bhagalpur Teacher Salary Scam: भागलपुर में 350 शिक्षकों को एक ही माह में कई बार भेजा वेतन
HighLights
भागलपुर में 350 शिक्षकों को मिला दोहरा वेतन भुगतान।
कैडर परिवर्तन के दौरान हुई वेतन निकासी में गड़बड़ी।
शिक्षकों को राशि लौटाने का निर्देश, एफआईआर की चेतावनी।
अभिषेक प्रकाश, भागलपुर। Bhagalpur Teacher Salary Scam: भागलपुर जिले के शिक्षा विभाग में वेतन निकासी और प्रबंधन की गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। जिले में पिछले तीन वर्षों (2024 से 2026) के दौरान 350 शिक्षकों को एक ही महीने में एक से अधिक बार वेतन, एचआरए (मकान किराया भत्ता), सीटीए (परिवहन भत्ता) और बकाये का दोहरा भुगतान कर दिया गया।
विभागीय स्तर पर जांच में मामला पकड़ में आने के बाद जिला शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा ने ऐसे सभी 350 शिक्षकों की प्रखंडवार सूची संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को सत्यापन के लिए भेज दी है।
सूची में शिक्षकों के नाम, पदस्थापन, बैंक खाता और उन्हें माहवार किए गए अतिरिक्त भुगतान का संपूर्ण ब्योरा दर्ज है। स्थापना शाखा ने प्रखंड अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे शिक्षकों के सेवा अभिलेख और बैंक विवरणी का मिलान कर वास्तविक अतिरिक्त राशि का निर्धारण करें।
पीरपैंती में वर्ष 2025 के सभी 109 मामले, गोपालपुर में छह बार भुगतान
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में सर्वाधिक 214 शिक्षकों के खातों में एक से अधिक बार वेतन हस्तांतरित हुआ। वर्ष 2025 में 109 मामले पकड़े गए, और चौंकाने वाली बात यह है कि 2025 के सभी 109 मामले अकेले पीरपैंती प्रखंड के हैं। वहीं वर्ष 2026 में अब तक 27 ऐसे मामलों की पहचान की गई है।
अतिरिक्त भुगतान की बानगी इन मामलों से समझी जा सकती है:
केस 1: पीरपैंती प्रखंड के शिक्षक अरुण कुमार रजक को जुलाई 2025 में एक ही महीने के भीतर चार बार वेतन राशि भेजी गई। वे पूर्व में विशिष्ट शिक्षक थे और बाद में उत्क्रमित होकर प्राथमिक विद्यालय में प्रधान शिक्षक बने थे।
केस 2: गोपालपुर प्रखंड में पदस्थापित शिक्षक रवि रोशन झा को फरवरी से अप्रैल 2024 के बीच कुल छह बार चेक के माध्यम से भुगतान किया गया। उस समय वे शाहकुंड प्रखंड में कार्यरत थे।
केस 3: शिक्षक आलोक कुमार चौधरी को भी जुलाई 2025 में चार बार अलग-अलग किस्तों में वेतन जारी हुआ। वे भी संवर्ग परिवर्तन के तहत विशिष्ट से प्रधान शिक्षक बने थे।
संवर्ग परिवर्तन के दौरान खुली वेतन प्रबंधन की पोल
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट बताती है कि दोहरा और अतिरिक्त भुगतान सबसे अधिक शिक्षकों के संवर्ग परिवर्तन (Cadre Transition) के दौरान हुआ। राज्य सरकार द्वारा जब नियोजित शिक्षकों को 'विशिष्ट शिक्षक', विशिष्ट शिक्षकों को 'प्रधान शिक्षक/प्रधानाध्यापक' और नियोजित को बिहार लोक सेवा आयोग के तहत 'विद्यालय अध्यापक' बनाया गया, उस दौरान पुराने और नए दोनों संवर्गों से वेतन विपत्र तैयार कर भुगतान कर दिया गया।
अब विभागीय जांच का विषय यह है कि जब पुराने संवर्ग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और अंतिम वेतन प्रमाण पत्र (LPC) निर्गत नहीं हुआ था, तो किस आधार पर दोनों जगह से एक साथ राशि खातों में भेज दी गई।
शिक्षकों को एफआईआर की चेतावनी, पर लापरवाह कर्मियों पर चुप्पी
जिला शिक्षा विभाग ने अतिरिक्त राशि पाने वाले सभी शिक्षकों को सख्त आदेश जारी करते हुए 2 नवंबर तक पूरी राशि चालान के माध्यम से सरकारी खजाने में जमा कराने का निर्देश दिया है। स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्धारित तिथि तक राशि नहीं लौटाने वाले शिक्षकों के विरुद्ध सीधे संबंधित थानों में गबन और धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण में शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। किसी भी शिक्षक के वेतन भुगतान से पूर्व विद्यालय की उपस्थिति विवरणी, अनुपस्थिति विवरणी और स्वीकृत राशि का गहन मिलान होता है। इसके उपरांत विभाग में 'मेकर-चेकर' प्रणाली के जरिए दो स्तरों पर जांच के बाद ही सीएफएमएस (CFMS) पोर्टल से ट्रेजरी द्वारा राशि अंतरित होती है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल तकनीकी चूक थी या स्थापना शाखा के लिपिकों व अधिकारियों की मिलीभगत से जानबूझकर सरकारी धन की बंदरबांट की गई? फिलहाल सारा दबाव शिक्षकों पर बनाया जा रहा है, जबकि लापरवाह कर्मियों पर कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।
"वर्तमान में सरकारी राशि की शत-प्रतिशत रिकवरी विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिन शिक्षकों के खातों में तकनीकी या अन्य कारणों से अतिरिक्त राशि चली गई है, वे स्वेच्छा से आगे आकर राशि जमा करा रहे हैं। इसके साथ ही इस पूरे मामले की प्रशासनिक जांच कराई जा रही है कि किन परिस्थितियों में अतिरिक्त वेतन बिल स्वीकृत हुए। मेकर-चेकर स्तर पर चूक कहां हुई और किस पटल के कर्मी की लापरवाही रही, इसकी जवाबदेही तय की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मियों और पदाधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई होगी।"
— सुभाष कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (RDEO), भागलपुर
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