भागलपुर में ₹98 लाख के वेतन गबन के बाद मुख्यालय सख्त; HRMS भुगतान के बदले नियम, 7 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट
Bhagalpur Teacher Salary Embezzlement HRMS Rules: भागलपुर में फर्जी शिक्षिका आईडी बनाकर 98.12 लाख रुपये के वेतन गबन के बाद ...और पढ़ें

Bhagalpur Teacher Salary Embezzlement HRMS Rules: भागलपुर में ₹98.12 लाख के गबन। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
भागलपुर में 98 लाख के वेतन गबन का खुलासा।
HRMS भुगतान प्रणाली में कड़े नए नियम लागू।
सभी जिलों को 7 दिन में देनी होगी रिपोर्ट।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Teacher Salary Embezzlement HRMS Rules: भागलपुर जिले में फर्जी शिक्षिका की आईडी बनाकर 98.12 लाख रुपये के वेतन भुगतान में हुए सुनियोजित गबन के सनसनीखेज खुलासे ने शिक्षा विभाग मुख्यालय की वित्तीय कार्यप्रणाली पर कड़े कदम उठाने को मजबूर कर दिया है।
फर्जी कर्मी आईडी के सहारे सरकारी राशि की अवैध निकासी और तय दर से अधिक आवास किराया भत्ता (HRA) भुगतान जैसे गंभीर मामलों को देखते हुए विभाग ने मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) से होने वाले वेतन भुगतान की व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव किए हैं।
निदेशक (प्रशासन) ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) और डीपीओ (स्थापना) को विस्तृत मार्गदर्शिका जारी की है। इसमें वेतन विपत्र तैयार करने से लेकर उसकी आंतरिक जांच, अनुमोदन और अंतिम भुगतान तक के प्रत्येक चरण में पदाधिकारियों व कर्मियों की जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय कर दी गई है।
डीईओ सह जिला एडमिन करेंगे हर आईडी और खाते का सत्यापन
जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला एडमिन (एचआरएमएस) को अपने जिले के प्रत्येक शिक्षक और कर्मी की पहचान, पदस्थापन, पदनाम, वेतन निर्धारण, सेवा की वर्तमान स्थिति और उनके आधार व बैंक खाते का शत-प्रतिशत सत्यापन करना होगा।
इसके साथ ही फर्जी, दोहरी और अनियमित आईडी को तत्काल चिह्नित कर ब्लॉक किया जाएगा। विभाग में बनने वाली नई आईडी, दोबारा सक्रिय (री-एक्टिवेट) की गई आईडी और संशोधित विवरण की हर महीने समीक्षा करनी होगी।
किसी भी शिक्षक या कर्मी के स्थानांतरण, सेवानिवृत्ति, सेवामुक्ति अथवा बर्खास्तगी की स्थिति में संबंधित कार्यालय का लॉगिन तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया गया है, ताकि किसी भी निष्क्रिय खाते से वेतन निकासी की गुंजाइश न रहे।
डीडीओ को खुद देखनी होगी सूची
वेतन भुगतान प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) को प्रत्येक बिल के अंतिम अनुमोदन से पूर्व कर्मीवार भुगतान सूची का स्वयं अनिवार्य रूप से अवलोकन करना होगा। एचआरएमएस पोर्टल की सत्यापित सूची का सीएफएमएस (व्यापक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली) की प्रविष्टियों से पूर्ण मिलान होने के बाद ही कोषागार से भुगतान की हरी झंडी दी जाएगी।
CFMS से मिलान के बाद ही निकासी
यदि किसी शिक्षक के वेतन या भत्ते में असामान्य वृद्धि दर्ज होती है, तो उसका सक्षम प्राधिकार के आधिकारिक स्वीकृति आदेश से मिलान करना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, किसी भी प्रकार के बकाया (एरियर) भुगतान से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित अवधि का भुगतान पूर्व में तो नहीं कर दिया गया है।
मेकर, चेकर और अप्रूवर की त्रिस्तरीय जांच व्यवस्था लागू
विभाग ने बिल तैयार करने और पास करने वाले कर्मियों के कार्य विभाजन को बेहद पारदर्शी बना दिया है। मेकर द्वारा तैयार किए गए विपत्र की चेकर को स्वतंत्र रूप से जांच करनी होगी, जिसमें स्वीकृत दर, गणना और कर्मचारी सूची का मूल सेवा अभिलेखों से मिलान शामिल है।
किसी भी प्रकार की त्रुटि पाए जाने पर बिल को स्पष्ट कारण दर्ज कर वापस लौटाना होगा। वहीं, अप्रूवर को अंतिम भुगतान सूची, कुल राशि, कटौतियों और शुद्ध देय राशि का सूक्ष्मता से मिलान करना होगा। अब किसी भी स्तर पर बिना भौतिक सत्यापन और जांच के विपत्र स्वीकृत नहीं किए जा सकेंगे।
इसके साथ ही आवंटन, वास्तविक खर्च, कोषागार से निकासी और बैंक भुगतान का प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से समाधान (रिकॉन्सिलेशन) किया जाएगा। असफल भुगतान (बाउंस ट्रांजेक्शन) की राशि वापस आने की पुष्टि और बैंक खाते का नए सिरे से सत्यापन किए बिना दोबारा भुगतान पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
7 दिनों में सभी जिलों को देना होगा शुद्धता प्रमाण पत्र
भागलपुर में उजागर हुए वित्तीय फर्जीवाड़े को नजीर बनाते हुए मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों में फर्जी और अनधिकृत भुगतानों की तत्काल आंतरिक जांच कराने का निर्देश दिया है। गड़बड़ी पाए जाने पर दोषी कर्मियों और अधिकारियों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने सहित कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सभी जिलों को एचआरएमएस का लॉगिन विवरण, ऑडिट ट्रेल, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और कोषागार के अभिलेख सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। सभी डीईओ को पत्र प्राप्ति के सात दिनों के भीतर अपने जिले के वेतन भुगतान की शुद्धता और आवंटन-व्यय के शत-प्रतिशत मिलान का प्रमाण पत्र व विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को समर्पित करनी होगी।
जिले स्तर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी और प्रमंडल स्तर पर क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (आरडीडीई) को इस पूरी व्यवस्था का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का जिम्मा सौंपा गया है।
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