टेंडर के बाद भी अटकीं 5 करोड़ की योजनाएं, कर्ण द्वार व ढेबर गेट का काम फंसा; भागलपुर निगम ने मांगी वर्क आर्डर की छूट
भागलपुर में कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव की आचार संहिता के कारण करीब पांच करोड़ रुपये की विकास ...और पढ़ें

भागलपुर में आचार संहिता में फंसीं ₹5 करोड़ की योजनाएं!
HighLights
एमएलसी चुनाव आचार संहिता से भागलपुर के विकास कार्य प्रभावित।
करीब पांच करोड़ रुपये की 13 योजनाएं अधर में लटकीं।
नगर निगम ने वर्क आर्डर जारी करने की अनुमति मांगी।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को लेकर लागू हुई आदर्श आचार संहिता का सीधा असर अब भागलपुर शहर की विकास योजनाओं पर दिखने लगा है। नगर निगम की ओर से निविदा (टेंडर) प्रक्रिया समय पर पूरी करा लिए जाने के बावजूद वर्क आर्डर जारी नहीं होने और संवेदकों के साथ विधिवत एग्रीमेंट न हो पाने के कारण करीब पांच करोड़ रुपये की विकास योजनाएं अधर में लटक गई हैं।
इस गतिरोध को दूर करने के लिए नगर निगम प्रशासन ने नगर विकास एवं आवास विभाग को औपचारिक पत्र भेजकर आचार संहिता से पूर्व स्वीकृत इन योजनाओं के वर्क आर्डर जारी करने और एग्रीमेंट की अनुमति मांगी है। शहर के विभिन्न वार्डों व प्रमुख स्थलों के कायाकल्प के लिए नगर निगम ने करीब 14.88 करोड़ रुपये की लागत से कुल 33 योजनाओं की निविदा निकाली थी।
इनमें से नौ योजनाओं में तकनीकी कारणों से पुनर्निविदा करानी पड़ी, जबकि चार योजनाओं के टेंडर रद कर दिए गए। बची 20 योजनाओं में से सात के लिए आचार संहिता लागू होने से पहले ही संवेदकों को वर्क आर्डर निर्गत कर दिया गया था, जिन पर धरातल पर काम शुरू हो चुका है।
23 जुलाई को ही पूरी हो चुकी थी टेंडर प्रक्रिया
पेच शेष बची 13 महत्वपूर्ण योजनाओं पर फंसा है, जिनका वर्क आर्डर और एग्रीमेंट नहीं हो सका था। निगम अधिकारियों का कहना है कि इन योजनाओं की निविदा प्रक्रिया विगत 23 जुलाई को ही पूरी कर ली गई थी।
योजनाओं की स्थिति एक नजर में
कुल जारी निविदाएं: 33 योजनाएं (लागत: लगभग ₹14.88 करोड़)।
वर्क आर्डर जारी (काम शुरू): 07 योजनाएं (आचार संहिता लागू होने से पहले जारी)।
अटकी हुई योजनाएं: 13 योजनाएं (लागत: करीब ₹5 करोड़, वर्क आर्डर व एग्रीमेंट लंबित)।
रद/पुनर्निविदा: 04 योजनाएं रद, 09 योजनाओं में पुनर्निविदा की प्रक्रिया।
निगम का तर्क: 23 जुलाई को ही निविदा प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी थी, इसलिए विकास कार्यों के हित में अनुमति दी जाए।
नगर निगम ने विभाग को भेजे पत्र में तर्क दिया है कि चूंकि निविदा निष्पादन का कार्य आचार संहिता लागू होने से पहले ही विधिवत संपन्न हो चुका था, इसलिए केवल प्रशासनिक औपचारिकता (वर्क आर्डर व एग्रीमेंट) बाकी है। यदि विभाग से विशेष अनुमति मिल जाती है, तो शहर के विकास कार्य बाधित नहीं होंगे।
लाजपत पार्क के पास ढेबर गेट और चंपा पुल पर कर्ण द्वार का काम फंसा
आचार संहिता के फेर में फंसी प्रमुख योजनाओं में शहर के सौंदर्यीकरण और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं:
ढेबर गेट निर्माण: लाजपत पार्क के समीप करीब 34 लाख रुपये की लागत से ढेबर गेट का निर्माण कराया जाना है, जो अब रुक गया है।
कर्ण द्वार: चंपा पुल के पास अंगराज कर्ण की स्मृति में करीब 34.97 लाख रुपये की लागत से भव्य 'कर्ण द्वार' बनना प्रस्तावित है। अनुमति नहीं मिलने पर यह काम अब चुनाव बाद ही शुरू हो पाएगा।
जलजमाव निदान व नाला निर्माण: बरारी स्थित किलकारी भवन के समीप जलभराव के स्थायी समाधान के लिए नाला निर्माण की योजना प्रभावित हुई है।
मुंदीचक व लोहापट्टी: मुंदीचक गढ़ैया दुर्गा मंदिर परिसर में पेवर ब्लॉक बिछाने का कार्य अटका है। वहीं, लोहापट्टी मुहाने से डिक्शन चौक तक नाला निर्माण और दवा पट्टी में पुलिया निर्माण (लागत लगभग ₹49 लाख) का काम भी अधर में है, जिसके लिए पुनर्निविदा की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है।
चुनाव के कारण विकास की गति न थमे, इसलिए मांगी छूट
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि जल निकासी, सड़क सुदृढ़ीकरण और प्रवेश द्वारों के निर्माण जैसी जनहितैषी योजनाओं की प्रक्रिया अंतिम चरण में थी। यदि वर्क आर्डर जारी करने की हरी झंडी मिल जाती है, तो संवेदक तुरंत फील्ड में काम शुरू कर सकेंगे, जिससे आम जनता को जलजमाव और जर्जर रास्तों से जल्द निजात मिल सकेगी। अब सबकी नजरें नगर विकास एवं आवास विभाग से मिलने वाले दिशा-निर्देश पर टिकी हैं।
