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मछली पालन और चारे पर 60% तक सब्सिडी! घर बैठे करें ऑनलाइन आवेदन; योग्यता, दस्तावेज और पूरी प्रक्रिया को आप समझ लें

Published: Wed, 30 Sep 2026 04:31 PM (IST)

Bihar Fish Farming Subsidy 2026: बिहार सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और राज्य की समेकित मत्स्य विकास योजना के तहत ...और पढ़ें

Bihar Fish Farming Subsidy 2026: मछली पालन से बढ़ाएं आमदनी

Bihar Fish Farming Subsidy 2026: मछली पालन से बढ़ाएं आमदनी

HighLights

  1. मछली पालन पर 40-60% तक सरकारी अनुदान उपलब्ध।

  2. नए तालाब, बीज, चारा और फीड मिल पर सब्सिडी।

  3. महिलाएं, SC/ST लाभार्थी 60% तक अनुदान प्राप्त करें।

ड‍ि‍जि‍टल डेस्‍क, भागलपुर।Bihar Fish Farming Subsidy 2026: कृषि के साथ-साथ सहायक आजीविका के रूप में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में इजाफा करने के लिए सरकार ने व्यापक कार्ययोजना लागू की है। मछली पालन में सबसे बड़ा खर्च चारे पर आता है, इसलिए सरकार चारे के उत्पादन और खरीद पर विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और राज्य सरकार की समेकित मत्स्य विकास योजना के तहत नए तालाबों के निर्माण, मछली के उन्नत बीज (फिंगरलिंग) और पोषक मछली चारा (फ्लोटिंग फीड) की खरीद पर 40 से 60 प्रतिशत तक का आकर्षक अनुदान दिया जा रहा है।

किसको कितना मिलता है अनुदान

विभाग द्वारा निर्धारित नियमावली के अनुसार:

  • सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के पुरुष मत्स्य पालकों को: परियोजना लागत का अधिकतम 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।

  • सभी वर्ग की महिला मत्स्य पालकों तथा अनुसूचित जाति (SC) व अनुसूचित जनजाति (ST) के आवेदकों को: परियोजना लागत का अधिकतम 60 प्रतिशत तक अनुदान देय होता है।

यह अनुदान नए तालाब के निर्माण, तालाब में पहले वर्ष के इनपुट (मछली का बीज, फ्लोटिंग फीड, दवाइयां व खाद) तथा आधुनिक बायोफ्लॉक या आरएएस (RAS) तकनीक लगाने पर चरणबद्ध तरीके से दिया जाता है।

मछली चारे (फीड) पर कैसे मिलता है लाभ

मछली पालन में होने वाले कुल खर्च का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा चारे (फीड) पर व्यय होता है। इसे सुगम बनाने के लिए दो तरह से सहायता दी जाती है:

  1. इनपुट लागत सहायता: पहले वर्ष तालाब में मछली पालने के दौरान उपयोग होने वाले फ्लोटिंग फीड (तैरने वाले चारे) की खरीद पर इनपुट सब्सिडी दी जाती है।

  2. फीड निर्माण मिल (Feed Mill Unit): बड़े स्तर पर चारा उत्पादन के लिए सरकार मिनी फीड प्लांट (2 टन प्रतिदिन क्षमता) और मध्यम फीड प्लांट लगाने पर व्यक्तिगत उद्यमियों और मत्स्य पालक समूहों को 40 से 60 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी प्रदान करती है, ताकि स्थानीय स्तर पर सस्ता चारा मिल सके।

मछली पालन व चारा अनुदान: योजना की रूपरेखा एक नजर में

  • नोडल विभाग: पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग (मत्स्य निदेशालय)।

  • प्रमुख घटक: नया तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक/आरएएस यूनिट, इनपुट कॉस्ट (मछली जीरा व चारा), और फीड निर्माण मिल।

  • अनुदान का प्रतिशत:

    • सामान्य व पिछड़ा वर्ग (पुरुष): 40%

    • महिलाएं (सभी वर्ग) एवं SC/ST: 60%

  • आवेदन माध्यम: आधिकारिक विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन।

  • भुगतान माध्यम: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

इच्छुक किसानों के पास निम्नलिखित कागजात होने आवश्यक हैं:

  • आधार कार्ड और मोबाइल नंबर (जो बैंक खाते से लिंक हो)।

  • जमीन का अद्यतन राजस्व रसीद या एलपीसी (LPC)। यदि जमीन लीज (किराए) पर है, तो न्यूनतम 9 से 10 वर्ष का निबंधित लीज एग्रीमेंट।

  • बैंक खाता पासबुक की प्रति।

  • जाति प्रमाण पत्र (एससी/एसटी वर्ग के लिए अनिवार्य)।

  • पासपोर्ट साइज फोटो।

  • मत्स्य पालन का प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (यदि हो तो प्राथमिकता मिलती है)।

  • विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR - बड़ी इकाइयों या फीड मिल के लिए)।

कैसे करें आवेदन: स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

  1. पोर्टल पर जाएं: मत्स्य विभाग के आधिकारिक पोर्टल (fisheries.bihar.gov.in या केंद्र सरकार के pmmsy.dof.gov.in) पर जाएं।

  2. पंजीकरण: पोर्टल पर जाकर 'नया किसान पंजीकरण' (Fisheries Registration) विकल्प चुनें और अपनी बुनियादी जानकारी दर्ज कर आईडी-पासवर्ड बनाएं।

  3. योजना का चयन: लॉगिन करने के बाद 'मत्स्य पालन/तालाब निर्माण/इनपुट एवं चारा अनुदान' के विकल्प पर क्लिक करें।

  4. दस्तावेज अपलोड: मांगी गई जमीन की विवरणी भरें और संबंधित दस्तावेज (आधार, जमीन रसीद, बैंक पासबुक) स्कैन कर अपलोड करें।

  5. सत्यापन व चयन: आवेदन सबमिट होने के बाद जिला मत्स्य पदाधिकारी (DFO) के नेतृत्व में स्थलीय भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाता है।

  6. कार्य प्रारंभ व अनुदान भुगतान: तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद आवेदक काम शुरू करते हैं। कार्य पूरा होने के बाद विभाग द्वारा जियो-टैगिंग की जाती है और अनुदान की राशि डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेज दी जाती है।

यह भी जान लें : इच्छुक किसान अधिक जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए अपने जिले के जिला मत्स्य कार्यालय (District Fisheries Office) में मत्स्य प्रसार पदाधिकारी या जिला मत्स्य पदाधिकारी से किसी भी कार्य दिवस में सीधा संपर्क कर सकते हैं।

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