भागलपुर: जिस तालाब में बूंद भर पानी नहीं, वहां बोटिंग का सपना दिखाकर निगम ने खर्च किए 68 लाख
भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड तालाब के जीर्णोद्धार पर 'अमृत मिशन 2.0' के तहत 68 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, ...और पढ़ें

भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में अमृत मिशन 2.0 के तहत निर्माणाधीन तालाब।
HighLights
68 लाख खर्च के बावजूद सैंडिस कंपाउंड तालाब सूखा।
वन विभाग ने तालाब के पक्कीकरण पर लगाई रोक।
मेयर ने तालाब में जलभराव सुनिश्चित करने का दावा किया।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर शहर के प्रमुख खेल एवं मनोरंजन स्थल सैंडिस कंपाउंड (जयप्रकाश उद्यान परिसर) में इंडोर हॉल के समीप स्थित ऐतिहासिक तालाब के जीर्णोद्धार को लेकर नगर निगम प्रशासन द्वारा 'अमृत मिशन 2.0' के तहत भव्य योजना तैयार की गई थी।
इस योजना के माध्यम से शहरवासियों को तालाब में बोटिंग (नौकायन) और एक आकर्षक मनोरंजन स्थल विकसित करने का सपना दिखाया गया, जिस पर 68 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जा रही है।
हालांकि, धरातल पर स्थिति यह है कि जिस तालाब में मानसून की बारिश का पानी तक नहीं ठहर पाता, वहां अब सूखे धरातल में जल भंडारण करना नगर निगम प्रशासन और अभियंताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
68 लाख की योजना पर उठे सवाल
योजना की वित्तीय प्रगति और धरातलीय स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। स्वीकृत 68 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि में से करीब 50 लाख रुपये केवल तालाब की झाड़ियों की कटाई, री-प्लांटेशन, परिसर की सामान्य सफाई और पूर्व से निर्मित वाकवे की टूटी चेकर टाइल्स को बदलने में खर्च किए जा चुके हैं।
इसके अलावा यहां एक शौचालय भवन और डीप बोरिंग का निर्माण कराया गया है। हालांकि, इतने बड़े वित्तीय खर्च के बावजूद योजना के मूल उद्देश्य यानी 'तालाब में पानी का ठहराव सुनिश्चित करने' की दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है, जिससे निगम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
पक्कीकरण पर वन विभाग की रोक
तालाब में पानी न रुकने का सबसे बड़ा तकनीकी कारण इसका रेतीला और रिसाव वाला धरातल है। नगर निगम के अभियंताओं की योजना थी कि यदि तालाब की सतह का पक्कीकरण (कॉन्क्रीटीकरण) कर दिया जाए, तो पानी आसानी से ठहर सकता है।
लेकिन सैंडिस कंपाउंड परिसर वन विभाग के अधीन आता है और वन विभाग ने पर्यावरण व जल-संरक्षण के नियमों का हवाला देते हुए तालाब के धरातल को पक्का करने पर स्पष्ट रूप से रोक लगा दी है। वन विभाग के इस कड़े रुख के कारण नगर निगम की पक्कीकरण वाली योजना पूरी तरह अटक गई है।
बोल्डर और GTF शीट से पानी रोकने का प्लान
वन विभाग की रोक के बाद अब नगर निगम प्रशासन और उसके तकनीकी अभियंता पानी के ठहराव के लिए वैकल्पिक समाधान तलाशने में जुटे हैं। अभियंताओं ने नगर आयुक्त को सुझाव दिया है कि पक्कीकरण के बिना पानी के रिसाव को रोकने के लिए तालाब की सतह पर पत्थरों के बोल्डर बिछाए जा सकते हैं।
इसके अलावा जीटीएफ (GTF) फिल्टर शीट बिछाकर जलभराव की व्यवस्था पर भी गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है, ताकि भू-गर्भ में पानी के अत्यधिक रिसाव को नियंत्रित किया जा सके और सतह पर पानी का ठहराव संभव हो सके।
डीप बोरिंग के भरोसे जलभराव की तैयारी
चूंकि इस तालाब में पानी का कोई प्राकृतिक स्रोत मौजूद नहीं है, इसलिए नगर निगम ने जलभराव के उद्देश्य से तालाब परिसर के समीप एक डीप बोरिंग का निर्माण कराया है।
निगम का मानना है कि बोरिंग चलाकर तालाब को भरा जाएगा, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सतह के रिसाव को पूरी तरह बंद नहीं किया जाता, तब तक डीप बोरिंग का पानी भी धरातल में समा जाएगा और कुछ ही घंटों में तालाब फिर से सूख जाएगा। ऐसे में केवल बोरिंग के भरोसे बोटिंग की व्यवस्था खड़ा करना संशय के घेरे में है।
मेयर ने मांगी रिपोर्ट, सुधार का दावा
तालाब जीर्णोद्धार में आ रही तकनीकी दिक्कतों और जनता के बीच उठ रहे सवालों पर भागलपुर की मेयर डॉ. वसुंधरा लाल ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना पानी के तालाब का निर्माण बेमानी है।
मेयर ने अमृत मिशन 2.0 की इस पूरी योजना से संबंधित रिपोर्ट तलब की है और भरोसा दिलाया है कि योजना में मौजूद सभी खामियों और तकनीकी रुकावटों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि हर हाल में जल भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित कर शहरवासियों को बोटिंग की आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
"योजना के तहत तालाब की सफाई, बोरिंग, वाकवे मरम्मत और गार्ड वाल का निर्माण किया जा रहा है। सतह पर पानी रोकने को लेकर निगम प्रशासन के स्तर पर विचार-विमर्श जारी है। जल्द ही बेहतर समाधान निकाला जाएगा।"
— अरुण कुमार, सहायक अभियंता (भागलपुर नगर निगम)
