क्या विकास योजनाओं में मेयर को 10 और डिप्टी मेयर को मिलेगी 5% हिस्सेदारी? भागलपुर नगर निगम में प्रस्ताव पर भारी बवाल
भागलपुर नगर निगम की बोर्ड बैठक में विकास योजनाओं के आवंटन को लेकर जोरदार घमासान हुआ। मेयर और डिप्टी मेयर ...और पढ़ें

Bhagalpur Nagar Nigam Board Meeting: विकास योजनाओं में हिस्सेदारी पर नगर निगम बोर्ड बैठक में भारी हंगामा
HighLights
विकास योजनाओं के आवंटन पर भागलपुर नगर निगम में घमासान।
मेयर-डिप्टी मेयर को 10% व 5% हिस्सेदारी का प्रस्ताव।
हंगामे के बाद भी बहुमत से प्रस्ताव हुआ पारित।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Nagar Nigam Board Meeting: नगर निगम की शनिवार को आयोजित सामान्य बोर्ड की बैठक में विकास योजनाओं के आवंटन को लेकर जोरदार घमासान मच गया। सदन में उस समय अप्रत्याशित स्थिति उत्पन्न हो गई जब विभिन्न वार्डों से प्राप्त जनसमस्याओं और विकास आवेदनों के निष्पादन के लिए कुल आवंटित राशि में से मेयर को 10 प्रतिशत और डिप्टी मेयर को 5 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव लाया गया।
इस प्रस्ताव पर पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि अपने अधिकारों पर सवाल उठाए जाने से क्षुब्ध होकर मेयर डॉ. बसुंधरा लाल और डिप्टी मेयर डॉ. सलाहउद्दीन अहसन सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए बाहर चले गए। इस हाई वोल्टेज ड्रामे के चलते बैठक करीब एक घंटे तक पूरी तरह बाधित रही।
प्रस्ताव पर नगर पालिका अधिनियम और ऑडिट की उठीं आपत्तियां
दरअसल, बैठक के दौरान पार्षद जावेद अंसारी ने सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि मेयर और डिप्टी मेयर के पास पूरे शहर के अलग-अलग वार्डों से बड़ी संख्या में आम नागरिक विकास योजनाओं और जनहित की समस्याओं से जुड़े आवेदन लेकर आते हैं। ऐसे में उनके माध्यम से अनुशंसित योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के लिए कुल आवंटित राशि में निश्चित हिस्सेदारी निर्धारित की जानी चाहिए और उसी आधार पर निविदाएं प्रकाशित होनी चाहिए।
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प्रस्ताव पेश होते ही पार्षद अनिल पासवान और संजय सिन्हा ने कड़ा एतराज जताया। उन्होंने तर्क दिया कि बिहार नगर पालिका अधिनियम में मेयर या डिप्टी मेयर के लिए अलग से राशि का प्रतिशत निर्धारित करने का कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। यदि इस प्रकार का प्रस्ताव बिना विभागीय मार्गदर्शन के पारित किया गया, तो भविष्य में वित्तीय ऑडिट के दौरान गंभीर कानूनी व वित्तीय आपत्तियां खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पहले नगर विकास विभाग से इस पर विधि सम्मत परामर्श लिया जाए।
"जब अधिकार ही नहीं तो बैठने का क्या औचित्य?"
सदन के भीतर जब प्रस्ताव के वैधानिक पक्ष को लेकर बहस उग्र हो गई, तो मेयर डॉ. बसुंधरा लाल बेहद भावुक और नाराज हो गईं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब सदन की अध्यक्षता करने के बावजूद उनके पास कोई प्रशासनिक अधिकार ही नहीं रहेगा, तो उनके बैठक में बैठने का क्या औचित्य है। इसके बाद मेयर और डिप्टी मेयर दोनों अपनी कुर्सियां छोड़कर अपने-अपने कार्यालय कक्ष में चले गए। उन्होंने पार्षदों से तल्ख लहजे में कहा कि वे जो उचित समझें, खुद तय कर लें।
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सदन छोड़ निकलीं मेयर
मेयर के वॉकआउट से सदन में भारी असमंजस की स्थिति बन गई। आनन-फानन में कई पार्षद उन्हें मनाने के लिए उनके कक्ष में पहुंचे। पार्षदों के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए मेयर ने कहा कि शहर की जनता ने उन्हें पूरे भागलपुर के सर्वांगीण विकास के लिए चुना है। यदि उनके पास आने वाली जनता की समस्याओं और योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए कोई वित्तीय व्यवस्था ही नहीं होगी, तो वे शहरवासियों की अपेक्षाओं पर कैसे खरा उतरेंगी।
1 घंटे तक चला मान-मनौव्वल का दौर, फिर पारित हुआ प्रस्ताव
इस अभूतपूर्व गतिरोध के दौरान नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा सभागार में लगातार डटे रहे और उन्होंने पार्षदों के माध्यम से समन्वय स्थापित करने की पहल की। वरिष्ठ पार्षदों की लंबी मान-मनौव्वल और समझाइश के बाद गतिरोध समाप्त हुआ और करीब एक घंटे बाद मेयर व डिप्टी मेयर पुनः सदन में लौटे।
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उनके लौटने के बाद सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से शुरू हुई। अंततः बहुमत के आधार पर नगर निगम क्षेत्र में प्राप्त आवेदनों पर विकास योजनाओं के निष्पादन हेतु आवंटित राशि में से मेयर के लिए 10 प्रतिशत और डिप्टी मेयर के लिए 5 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने के प्रस्ताव को सदन की मंजूरी दे दी गई।
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