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तनुश्री की आईडी से तनुजा के खाते में गए 98.12 लाख, भागलपुर शिक्षा विभाग में HRMS की चूक से हुआ गबन

Published: Tue, 13 Oct 2026 10:45 PM (IST)

भागलपुर शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के गबन मामले में एचआरएमएस पोर्टल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं।

एआई जनरेटेड सांकेतिक तस्वीर

एआई जनरेटेड सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. एचआरएमएस पोर्टल की खामियों से 98.12 लाख रुपये का गबन।

  2. तनुश्री की आईडी से तनुजा देवी के खाते में भुगतान हुआ।

  3. पोर्टल ने नाम और बैंक खाते के विवरण का मिलान नहीं किया।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिला शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के गबन के मामले में एचआरएमएस पोर्टल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहा। जिस पोर्टल पर कथित तौर पर छेड़छाड़ कर आपरेटर अविनाश राज ने सरकारी राशि के भुगतान की प्रक्रिया को अंजाम दिया, उसी व्यवस्था में कई ऐसी खामियां सामने आ रही हैं, जिन पर समय रहते ध्यान दिया जाता तो गड़बड़ी पकड़ी जा सकती थी।

क्योंकि अविनाश को इस बात का जानकारी थी कि एचआरएमएस पोर्टल पर किस तरह छेड़छाड़ करने पर कहीं से भी जल्दी पकड़ में आने की संभावना कम है। दरअसल एफआईआर के मुताबिक शिक्षिका का नाम तनुश्री था लेकिन संबंधित बैंक खाते का नाम तनुजा देवी का है। साथ ही वह बैंक खाता फरीदाबाद का है।

ऐसे में सवाल है कि ई-पेमेंट आईडी तैयार करने के दौरान शिक्षिका के नाम, पदस्थापन और बैंक खाते के विवरण का मिलान क्यों नहीं किया गया। नाम में अंतर होने पर पोर्टल ने कोई त्रुटि क्यों नहीं दिखाई। यदि ऐसी विसंगतियों को पकड़ने की व्यवस्था होती तो भुगतान से पहले ही मामले की जांच संभव थी।

एचआरए और सीटीए की सीमा पर भी सवाल

नियमानुसार एचआरए की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत है। जो राज्य में पटना में सर्वाधिक है। आरोप है कि अविनाश ने इसमें बदलाव कर इसे 2000 प्रतिशत तक बढ़ाने की प्रक्रिया अपनाई। इसके बावजूद पोर्टल ने इसे रोकने के लिए कोई तकनीकी चेतावनी क्यों नहीं दी।

इसी तरह सीटीए की अधिकतम निर्धारित राशि 1600 रुपये है। इसमें भी निर्धारित सीमा से अधिक राशि दर्ज किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लाखों शिक्षकों के वेतन भुगतान से जुड़े पोर्टल पर ऐसी सीमाएं लागू नहीं होना व्यवस्था की निगरानी पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

पासवर्ड बदलने पर सूचना नहीं

जिला शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मियों के अनुसार, मेकर, चेकर और अप्रूवल आईडी के पासवर्ड बदलने पर संबंधित नोडल पदाधिकारी को सूचना अलर्ट देने की व्यवस्था नहीं है। यानी नियमित कर्मचारी वर्क लोड की वजह से या कर्मचारी कमी के कारण दूसरे संविदा या खुद अलग कर्मी को लॉगिन आईडी खोल कर देता है। 

वह पासवर्ड चेंज कर ले तो संबंधित व्यक्ति को पता भी नहीं चलेगा जब तक वह दोबारा खोले नहीं तो, ऐसे में सवाल है कि यदि किसी कर्मी ने पासवर्ड बदल दिया तो अधिकारियों को इसकी जानकारी कैसे मिलेगी और अनधिकृत बदलावों की पहचान कैसे होगी।

चार साल में भौतिक प्रशिक्षण नहीं

शिक्षा विभाग में जुलाई 2021 से एचआरएमएस के माध्यम से काम हो रहा है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों को आनलाइन प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें राज्यभर के कर्मी एक साथ शामिल होते थे। लेकिन जिले में अब तक भौतिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया।

समय-समय पर व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलने से पोर्टल की खामियों और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता था।

नोडल पदाधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ की मांग

एचआरएमएस के माध्यम से राज्यभर में लाखों शिक्षकों का भुगतान होता है। ऐसे में प्रत्येक जिले में नोडल पदाधिकारी के साथ तकनीकी विशेषज्ञ की नियुक्ति होनी चाहिए। इससे पोर्टल से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान करने, संदिग्ध बदलावों की निगरानी करने और भुगतान प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।

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