भागलपुर में ₹98.12 लाख गबन मामले में DEO व DPO स्थापना समेत 6 पर FIR; DPO हिरासत में, बांका से ऑपरेटर अविनाश अरेस्ट
Bhagalpur Education Scam 98 Lakh: भागलपुर जिला शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के गबन मामले में DEO, DPO स्थापना ...और पढ़ें

Bhagalpur Education Scam 98 Lakh: शिक्षा विभाग में ₹98 लाख का गबन! DEO व DPO स्थापना समेत 6 पर FIR; DPO हिरासत में, बांका से मास्टरमाइंड ऑपरेटर अरेस्ट
HighLights
शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के गबन का मामला।
DEO, DPO स्थापना सहित छह लोगों पर FIR दर्ज।
मास्टरमाइंड ऑपरेटर अविनाश राज बांका से गिरफ्तार।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Education Scam 98 Lakh: जिला शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के गबन मामले में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। डीईओ चंदन कुमार डीपीओ (स्थापना) शशि चंदन चौधरी, लिपिक शिशिर कुमार झा और सेवामुक्त आपरेटर अविनाश राज के अलावा अविनाश की पत्नी काजल व तनुजा देवी शामिल हैं।
मामले में अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। वहीं इस मामले को लेकर डीपीओ स्थापना को पुलिस ने हिरासत में लेकर गुरुवार रात से ही पूछताछ कर रही है। जबकि मास्टरमाइंड अविनाश राज को डीआईओयू की टीम ने बांका से गिरफ्तार किया है और उससे भी पूछताछ जारी है।
एचआरएमएस टीम से जानकारी मिलने के बाद वित्तीय सचिव के निर्देश पर जिलाधिकारी के नेतृत्व में कार्रवाई आगे बढ़ी। इसके बाद क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष कुमार गुप्ता जोगसर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया। आवेदन में फर्जी शिक्षिका तनु श्री के नाम पर वेतन भुगतान करने और कार्यालय की लागिन आईडी का दुरुपयोग कर सरकारी राशि निकालने का आरोप लगाया गया है।
दो महीने में खाते में भेजे गए 98 लाख
मामले का खुलासा सात अक्टूबर को हुआ। एचआरएमएस कोषांग से जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को सूचना मिली कि एक शिक्षिका के खाते में जुलाई में 43.62 लाख रुपये से अधिक का वेतन भुगतान किया गया है। इसके बाद कार्यालय स्तर पर जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि संबंधित शिक्षिका को अप्रैल 2026 में पहली बार मार्च महीने का वेतन दिया गया था। इसके बाद मई 2025 से फरवरी 2026 तक के वेतन का भुगतान अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से किया गया।
₹98.12 लाख गबन कांड
गबन की कुल राशि: ₹98,12,773 (जुलाई 2026 में ₹43,62,168 और अगस्त 2026 में ₹46,95,775 का भुगतान)।
प्राथमिकी का स्थान: जोगसर थाना, भागलपुर।
वादी (शिकायतकर्ता): सुभाष कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (RDDE), भागलपुर।
नामजद आरोपी (6 लोग):
चंदन कुमार (जिला शिक्षा पदाधिकारी - DEO)
शशि चंदन चौधरी (जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना - DPO)
शिशिर कुमार झा (उच्च वर्गीय लिपिक / संचिका प्रभारी)
अविनाश राज (सेवामुक्त संविदा ऑपरेटर - मास्टरमाइंड)
काजल कुमारी (अविनाश राज की पत्नी)
तनुजा देवी (खाताधारक) एवं अन्य अज्ञात।
वर्तमान पुलिस कार्रवाई: डीपीओ स्थापना पुलिस हिरासत में; ऑपरेटर अविनाश राज बांका से गिरफ्तार; डीईओ बॉन्ड पर रिहा।
घोटाले का तरीका: लिपिक की लॉगिन आईडी का अनाधिकृत इस्तेमाल, एचआरएमएस (HRMS) पर फर्जी शिक्षिका 'तनुश्री' का सृजन और HRA/CTA भत्तों में भारी हेरफेर।
जांच में जुलाई 2026 में 43,62,168 रुपये और अगस्त में 46,95,775 रुपये भुगतान का पता चला। दोनों महीनों में कुल 90 लाख रुपये से अधिक का भुगतान हुआ। पहले के भुगतान को मिलाकर कुल राशि 98,12,773 रुपये पहुंच गई। दस्तावेजों की जांच में संबंधित शिक्षिका के फर्जी होने की बात सामने आई।
लागिन आईडी से छेड़छाड़ कर बढ़ाई राशि
सेवामुक्त आपरेटर अविनाश राज पर कार्यालय कर्मियों की लागिन आईडी का गलत इस्तेमाल कर फर्जी शिक्षिका को वेतन पाने वाले के रूप में जोड़ने का आरोप है। एचआरएमएस के जानकारी होने के कारण नियोजित और विशिष्ट शिक्षकों के वेतन भुगतान के बिल बनाने की जिम्मेदारी इसकी थी।
जिसका फायदा उठाते हुए उसने फर्जी शिक्षिका के एचआरएमएस में हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) और सिटी ट्रांसपोर्ट अलाउंस (सीटीए) की राशि भी बढ़ाई थी। इस काम में लिपिक शिशिर कुमार झा की लागिन आईडी के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
आवेदन में डीपीओ स्थापना और डीईओ की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में निगरानी और मंजूरी की जिम्मेदारी किस स्तर पर निभाई गई, इसकी जांच की मांग की गई है। पुलिस अब बैंक खातों, लेनदेन और एचआरएमएस पर हुए बदलावों की जांच करेगी।
देर रात तक जोगसर थाने में चली कार्रवाई
गबन मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने को लेकर गुरुवार देर रात तक जिला शिक्षा विभाग और प्रमंडलीय टीम के लोग जोगसर थाने में मौजूद रहे। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक रात में ही डीईओ चंदन कुमार और डीपीओ स्थापना शशि चंदन चौधरी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था लेकिन बाद में डीईओ चंदन कुमार को बॉन्ड पर छोड़ दिया गया था। जबकि डीपीओ से लगातार पूछताछ जारी है।
