अंग्रेजों के हाई लेवल बांध और जमींदारी तटबंधों की होगी डिजिटल मैपिंग, भागलपुर में बाढ़-कटाव से बचाव की नई रणनीति तैयार
Bhagalpur Ganga Digital Mapping: गंगा के कटाव और बाढ़ से ऐतिहासिक तटबंधों को बचाने के लिए भागलपुर में डिजिटल मैपिंग ...और पढ़ें

Bhagalpur Ganga Digital Mapping: भागलपुर के ब्रिटिशकालीन हाई लेवल और जमींदारी तटबंधों को मिलेगा डिजिटल सुरक्षा कवच
HighLights
भागलपुर में गंगा तटबंधों की डिजिटल मैपिंग होगी।
ब्रिटिशकालीन और जमींदारी बांधों का संरक्षण मुख्य लक्ष्य।
उपग्रह-ड्रोन तकनीक से कटाव व संरचना का आकलन।
ललन तिवारी, भागलपुर। Bhagalpur Ganga Digital Mapping: गंगा की उफनती धारा ने जब अपने प्राकृतिक किनारों को लांघकर दियारा और मैदानी इलाकों की ओर रुख किया, तो केवल लहलहाते खेत-खलिहान, सड़कें और आशियाने ही जलमग्न नहीं हुए, बल्कि इतिहास के वे मजबूत सुरक्षा कवच भी संकट में घिर गए, जो सदियों और दशकों से इस पूरे भूभाग को प्रलयंकारी बाढ़ से बचाते रहे हैं।
ब्रिटिश हुकूमत के दौर का ऐतिहासिक 'हाई लेवल तटबंध' हो या रियासती दौर में बने पारंपारिक 'जमींदारी बांध'—इस बार गंगा के भीषण कटाव और धारा के अप्रत्याशित बदलाव ने इनके वजूद पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब इन धरोहरनुमा तटबंधों के संरक्षण, सुदृढ़ीकरण और स्थायी सुरक्षा के लिए एक युगांतरकारी तकनीकी पहल होने जा रही है।
भागलपुर जिले में गंगा और उसके विस्तृत कछारी (तटीय) क्षेत्र की विशेष डिजिटल मैपिंग कराई जाएगी। इसके तहत आधुनिक उपग्रह व ड्रोन तकनीक के जरिए गंगा की मुख्य धारा, उसके फैलाव, कटाव की गति और सभी ऐतिहासिक तटबंधों की वर्तमान भौतिक स्थिति का एक-एक बिंदुवार डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि यह मैपिंग बक्सर से भागलपुर तक प्रस्तावित राज्यस्तरीय मैपिंग से बिल्कुल पृथक होगी और यह भागलपुर का अपना स्वतंत्र डिजिटल भौगोलिक दस्तावेज (Digital Geographic Document) बनेगी।
वैज्ञानिक आकलन से तैयार होगी भविष्य की सुरक्षा रणनीति
इस उच्चस्तरीय डिजिटल मैपिंग का मुख्य उद्देश्य केवल तटबंधों की लकीरों को नक्शे पर खींचना नहीं है, बल्कि उनकी वास्तविक संरचनात्मक क्षमता, ढलान, ऊंचाई और अत्यंत संवेदनशील (कटावग्रस्त) हिस्सों की सटीक जियो-टैगिंग करना है। गंगा की धारा किस कोण पर तटबंधों से टकरा रही है और मिट्टी का क्षरण किस गति से हो रहा है, इसका वैज्ञानिक व हाइड्रोलॉजिकल आकलन किया जाएगा।
इस डिजिटल रिकॉर्ड का एक सबसे बड़ा प्रशासनिक लाभ यह होगा कि जिले के वे दर्जनों छोटे और स्थानीय महत्व के बांध, जो अब तक जल संसाधन या राजस्व विभाग के आधिकारिक नक्शों और अभिलेखों में दर्ज नहीं हो सके थे, वे भी पहली बार सरकारी डिजिटल पटल पर आ जाएंगे। इससे आपदा प्रबंधन और बजट आवंटन के समय किसी भी तटबंध की अनदेखी नहीं होगी।
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ब्रिटिशकालीन हाई लेवल बांध और जमींदारी परंपरा पर खतरा
भागलपुर के गंगा तटवर्ती इलाके में फैले इन तटबंधों का निर्माण तत्कालीन प्रशासनिक प्राथमिकताओं और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया था। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान निर्मित 'हाई लेवल तटबंध' सामरिक और संरक्षा की दृष्टि से मील का पत्थर माना जाता था। इसे बाढ़ के उच्चतम जलस्तर से भी अधिक ऊंचा बनाया गया था और एक समय इस पर ट्रेनों के परिचालन के लिए रेलवे लाइन तक बिछाई गई थी।
वहीं दूसरी ओर, जमींदारी बांध स्थानीय रसूखदारों व जमींदारों की दूरदर्शिता का हिस्सा थे, जिन्होंने अपनी उपजाऊ कृषि भूमि, अन्न के भंडारों और ग्रामीण बस्तियों को बाढ़ के पानी से महफूज रखने के लिए मजबूत मिट्टी के बांधों की श्रृंखला तैयार की थी।
विशेष रूप से दियारा क्षेत्र के रंगरा, इस्माइलपुर, गोपालपुर और बिहपुर जैसे प्रखंडों में गंगा और कोसी के दोहरे प्रकोप से बचाव के लिए ये जमींदारी बांध जीवन रेखा साबित होते रहे हैं। इनमें धोबनिया जमींदारी बांध और काजीकोरैया-राघोपुर बांध ऐतिहासिक मिसाल हैं। इन बांधों की अहमियत केवल बाढ़ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके साथ पूरे दियारा इलाके की सामाजिक बनावट, बसावट, कृषि अर्थव्यवस्था और जनजीवन का सजीव इतिहास जुड़ा हुआ है।
भागलपुर जिले के संपूर्ण गंगा तटीय क्षेत्र की विशेष डिजिटल मैपिंग कराई जाएगी। इस उच्चस्तरीय तकनीकी पहल से हमारे ऐतिहासिक तटबंधों और बांधों की अद्यतन भौतिक स्थिति की सटीक जानकारी मिलेगी, जिससे भविष्य में बाढ़ और कटाव के स्थायी वैज्ञानिक समाधान की दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाई जा सकेगी। इसके साथ ही भागलपुर की सदियों पुरानी भौगोलिक पहचान भी डिजिटल रूप से हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाएगी।
— नीतीश मिश्रा, प्रभारी मंत्री, भागलपुर
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