फर्जी शिक्षिका के नाम से 1 करोड़ का गबन, HRMS पटना की जांच में खुला खेल; भागलपुर के बर्खास्त ऑपरेटर पर केस की तैयारी
Bhagalpur Education Department Fraud: भागलपुर शिक्षा विभाग में एक करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला सामने आया है, जहाँ एक संविदा ...और पढ़ें

Bhagalpur Education Department Fraud: भागलपुर शिक्षा विभाग में ₹1 करोड़ का घोटाला।
HighLights
भागलपुर शिक्षा विभाग में एक करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया।
संविदा ऑपरेटर अविनाश राज ने फर्जी 'तनुश्री' आईडी बनाई।
एचआरएमएस पोर्टल की कमजोरियों का फायदा उठाकर पैसे निकाले गए।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Education Department Fraud: जिला शिक्षा विभाग में डिजिटल व्यवस्था और पोर्टल की खामियों का फायदा उठाकर सरकारी खजाने में सेंधमारी का एक अत्यंत सनसनीखेज मामला सामने आया है। विभाग की स्थापना शाखा में वर्ष 2019 से संविदा पर कार्यरत रहे कंप्यूटर ऑपरेटर ने 'तनुश्री' नाम से एक फर्जी 'विशिष्ट शिक्षिका' की आईडी तैयार कर करीब एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का वारा-न्यारा कर दिया।
इस सुनियोजित महाघोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ, जब पटना स्थित मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) की केंद्रीय जांच टीम ने डिजिटल डेटा का सत्यापन किया और यह संदिग्ध आईडी पकड़ में आई। प्राथमिक जांच में विभागीय संविदा ऑपरेटर अविनाश राज (निवासी: बबरगंज, थाना- भागलपुर) की सीधी संलिप्तता उजागर हुई है। इस मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ - स्थापना) शशि चंदन चौधरी ने आरोपी ऑपरेटर के खिलाफ साइबर थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने की विधिवत प्रक्रिया शुरू कर दी है।
फर्जी पैन कार्ड और जनधन खाते से रची गई साजिश
विभागीय पड़ताल में सामने आया है कि यह फर्जी शिक्षक आईडी अप्रैल 202 में बेहद शातिराना तरीके से बनाई गई थी। आईडी को सिस्टम में वैध दिखाने के लिए फर्जी पैन कार्ड, मनगढ़ंत स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या (PRAN) और अन्य जाली दस्तावेज अपलोड किए गए थे।
हैरत की बात यह है कि जिस बैंक खाते को वेतन भुगतान के लिए लिंक किया गया, वह एक जनधन खाता बताया जा रहा है। शुरुआत में शक से बचने के लिए अप्रैल से जून तक इस खाते में 30 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक के कई छोटे लेनदेन वेतन और एरियर के नाम पर किए गए।
सेवा समाप्त होने के बाद भी 67 लाख का संदिग्ध ट्रांसफर
ऑपरेटर अविनाश राज की संदिग्ध कार्यशैली को देखते हुए शिक्षा विभाग ने इसी वर्ष जून महीने में उसकी संविदा समाप्त कर उसे कार्य से हटा दिया था। लेकिन इसके बावजूद इस फर्जी आईडी से संदिग्ध वित्तीय निकासी का खेल थमा नहीं। प्रारंभिक वित्तीय जांच के अनुसार, पिछले दो महीनों में इस फर्जी आईडी के माध्यम से दो अलग-अलग मौकों पर करीब 27 लाख रुपये और 40 लाख रुपये (कुल 67 लाख रुपये) का भारी लेनदेन किया गया।
फरीदाबाद कनेक्शन
जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि सरकारी राशि को पहले हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक बैंक खाते में भेजा गया और फिर वहां से भागलपुर के बैंक खाते में रूट किया गया। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी अविनाश के परिवार के कुछ सदस्य फरीदाबाद में रहते हैं, जहां से इस मनी ट्रेल को अंजाम दिया गया।
HRMS के 'एडिट विकल्प' से छेड़छाड़
इस घोटाले ने शिक्षा विभाग के ऑनलाइन वेतन भुगतान सिस्टम एचआरएमएस पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय जानकारों का कहना है कि पोर्टल पर शिक्षकों के नगर परिवहन भत्ता (सीटीए) और मकान किराया भत्ता (एचआरए) को अपडेट करने के लिए 'एडिट' का विकल्प दिया गया है।
अन्य फर्जी आईडी की भी होगी जांच
आरोपी ऑपरेटर अविनाश ने इसी एडिट टूल की कमजोरियों का फायदा उठाकर फर्जी डेटा फीड किया और बिना किसी रोक-टोक के लाखों रुपये की निकासी को मंजूरी दिलाता रहा। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह खेल सिर्फ 'तनुश्री' नाम की एकलौती आईडी तक सीमित था या सिस्टम में ऐसी अन्य फर्जी आईडी भी सक्रिय की गई थीं? साइबर थाना पुलिस और विभागीय ऑडिट टीम अब पूरे डिजिटल लॉग और संलिप्त अधिकारियों व कर्मियों की भूमिका की गहन जांच में जुट गई है।
