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भागलपुर में दुर्गोत्सव ने दिया संदेश, मां के दरबार में आस्था का उजास, सड़कों पर बेटियों का दिखा आत्मविश्वास

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:26 PM (IST)

भागलपुर में इस बार दुर्गापूजा बेहद शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, जहां महिलाओं और युवतियों ने देर रात तक पंडालों में आत्मविश्वास के साथ भाग लिया।

भागलपुर में दुर्गापूजा के दौरान पंडालों में उमड़ी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेती पुलिस व प्रशासन की टीम

भागलपुर में दुर्गापूजा के दौरान पंडालों में उमड़ी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेती पुलिस व प्रशासन की टीम

HighLights

  1. महिलाओं ने देर रात तक पंडालों में आत्मविश्वास से भागीदारी की।

  2. जिला प्रशासन और पुलिस की मुस्तैदी से उत्सव शांतिपूर्ण संपन्न।

  3. दुर्गापूजा ने सुरक्षा और आपसी सौहार्द का मजबूत संदेश दिया।

ललन त‍िवारी, भागलपुर। त्योहार की असली रौनक तभी पूरी होती है, जब खुशियों के बीच किसी के मन में असुरक्षा का भाव न हो। जब मां दुर्गा के दर्शन के लिए निकलती बेटियों के कदमों में झिझक नहीं, बल्कि आत्मविश्वास हो और परिवार की महिलाएं देर रात तक पंडालों में घूम सकें।

इस बार भागलपुर की दुर्गापूजा ने एक ऐसी ही बेहद सकारात्मक और सुकून भरी तस्वीर पेश की है। दशहरा के इस महापर्व में 'आधी आबादी' की भागीदारी देखते ही बनती थी।

महिलाएं और युवतियां देर रात तक पूजा पंडालों में पहुंचती रहीं, मां दुर्गा के दर्शन किए और मेले का भरपूर आनंद उठाया। गुरुवार देर रात प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ जब इस उत्सव का समापन हुआ, तो शहर अपने पीछे शांति, आपसी सौहार्द और सुरक्षा का एक मजबूत संदेश छोड़ गया।

इस आयोजन की ऐतिहासिक सफलता के पीछे जिला प्रशासन की कड़ी तैयारियों, पुलिस की मुस्तैदी और आम नागरिकों के सामूहिक सहयोग की अहम भूमिका रही है।

जिला प्रशासन ने पूजा के हर पहलू की लगातार सूक्ष्म समीक्षा की। जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने बैठकों से लेकर धरातल पर व्यवस्थाओं की निगरानी तक हर बिंदु पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया। परिणाम यह रहा कि पूरे उत्सव के दौरान किसी भी अप्रिय घटना या तनाव की कोई सूचना सामने नहीं आई।

चार महीनों में चुनौतियों को अवसर में बदला

बीती 22 जून को भागलपुर का पदभार संभालने के बाद जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय के सामने कई बड़ी और जटिल चुनौतियां थीं। विक्रमशिला सेतु पर आवागमन की भारी समस्या, बेली ब्रिज हटने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करना और जलयान सेवा की तैयारियों के बीच श्रावणी मेला का सफल आयोजन एक बड़ी परीक्षा थी।

डीएम ने इन सभी चुनौतियों को एक अवसर के रूप में लिया और अपने मजबूत नेतृत्व व प्रबंधन क्षमता से इसे साबित कर दिखाया। 3श्रावणी मेला के बाद दुर्गापूजा के दौरान प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन, सुचारु यातायात, कड़ी सुरक्षा और विसर्जन मार्गों की व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाए रखने की चुनौती थी, जिसे प्रशासनिक टीम ने पूरी मुस्तैदी से निभाया।

महिलाओं की उपस्थिति ने बढ़ाया उत्सव का उत्साह

दुर्गापूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल, सांस्कृतिक परंपराओं और सामूहिक उल्लास का बड़ा अवसर है। इस बार पूजा पंडालों में परिवारों के साथ पहुंचती महिलाओं और युवतियों की बड़ी संख्या सबसे खास आकर्षण रही। शाम ढलने के बाद भी पंडालों में अद्भुत चहल-पहल बनी रही।

पिछले दिनों राज्य के कुछ हिस्सों में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं ने महिला सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ाई थी, ऐसे माहौल में भागलपुर की दुर्गापूजा के दौरान सामने आई यह तस्वीर अत्यंत राहत देने वाली रही।

महिलाओं का देर रात तक उत्सव में सहजता से शामिल होना और पुलिस की सक्रिय मौजूदगी ने शहर के लिए एक बेहतरीन सकारात्मक संकेत दिया है।

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