‘आपकी यात्रा मंगलमय हो’! भागलपुर बियाडा गंगा घाट पर मेले जैसा नजारा, टोचन के सहारे किनारे लगे बड़े जहाज
विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद भागलपुर के बियाडा गंगा घाट पर जलयान सेवा से जिंदगी पटरी पर लौट रही ...और पढ़ें

Bhagalpur BIADA Ghat Ferry Service: विक्रमशिला पुल बंदी के 7वें दिन बियाडा घाट पर मेले सा नजारा
HighLights
बियाडा घाट पर जलयान सेवा से मेले जैसा माहौल बना।
बड़े जहाजों को गंगा की तेज धारा में टोचन करना पड़ा।
यात्रियों को आवागमन में अभी भी कई चुनौतियों का सामना।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur BIADA Ghat Ferry Service: विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बंद होने के बाद गंगा की लहरों पर जिंदगी की रफ्तार अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटती दिख रही है। जलयान सेवा के सातवें दिन बुधवार को भागलपुर के बियाडा गंगा घाट पर ऐसा नजारा देखने को मिला, मानो गंगा किनारे कोई छोटा-मोटा मेला सज गया हो।
कहीं दफ्तर और स्कूल पहुंचने की जल्दी में भागते यात्री दिखे, तो कहीं चाय-नाश्ते की अस्थायी दुकानों पर लोगों की गपशप और चुस्कियां चलती रहीं। इस बीच घाट पर लाउडस्पीकर से लगातार गूंजता रहा— "आपकी यात्रा मंगलमय हो।"
बुधवार सुबह 8:30 बजे तक बियाडा घाट से तीन बड़े जलयान नवगछिया के जहान्वी चौक के लिए रवाना हो चुके थे, जबकि जहान्वी चौक की ओर से दो जलयान यात्रियों को लेकर बियाडा पहुंचे। राहत की बात यह रही कि गंगा का जलस्तर घटने से घाट की भौगोलिक स्थिति पहले की तुलना में काफी सुधरी है। प्लेटफार्म पर पानी कम होने से जलयान अब व्यवस्थित तरीके से लग रहे हैं, जिससे मुसाफिरों को चढ़ने-उतरने में पहले जैसी मशक्कत नहीं करनी पड़ रही।
गंगा की धारा में हांफ रहे बड़े जहाज, टोचन कर पहुंचाया जेटी
घाट पर स्थिति सुधरने के बावजूद तकनीकी चुनौतियां जस की तस हैं। बुधवार को एक बड़े जलयान को जेटी पर लगाने में कर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। धारा के दबाव के कारण जब वह किनारे नहीं लग सका, तो दूसरे जलयान से रस्सी बांधकर (टोचन कर) उसे जेटी तक खींचा गया।
रवाना होने के बाद भी उसे सुरक्षित आगे बढ़ाने के लिए कुछ दूर तक टोचन करना पड़ा। यात्रियों का कहना है कि यह परेशानी पिछले कई दिनों से है। जहाज आकार में तो काफी बड़ा है, लेकिन गंगा के तेज बहाव में उसकी इंजन क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर साबित हो रही है।
-1791347887354.webp)
सुबह 3 बजे से शुरू होती है रीना की गंगा पार करने की दौड़
जलमार्ग ने आवागमन का विकल्प तो दे दिया है, लेकिन दैनिक मुसाफिरों की शारीरिक और मानसिक थकान कम नहीं हुई है। गुडहट्टा चौक निवासी शिक्षिका रीना कुमारी बताती हैं कि उन्हें रोज गंगा पार स्कूल जाना होता है। इसके लिए उनकी दिनचर्या भोर में तीन बजे से ही शुरू हो जाती है।
घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभालने के बाद वह टोटो पकड़कर पहले भागलपुर स्टेशन पहुंचती हैं, फिर वहां से दूसरा ऑटो या टोटो बदलकर बियाडा घाट आती हैं। रीना का कहना है कि घाट पर जहाज लगा होने के बावजूद वह तुरंत नहीं खुलता; पूरा भरने का इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, तमाम दिक्कतों के बीच गंगा की लहरों पर सफर का एक अलग अनुभव भी है।
इसी बीच, जहान्वी चौक से एक बीमार मरीज को लेकर परिजन बियाडा पहुंचे। लोहे की संकरी रेलिंग के सहारे मरीज को जहाज से उतारने में काफी जद्दोजहद हुई। गनीमत रही कि बियाडा घाट पर प्रशासनिक एंबुलेंस फौरन मिल गई और मरीज को बिना वक्त गंवाए मायागंज अस्पताल पहुंचा दिया गया।
चाय-नाश्ते से गुलजार हुआ घाट
बियाडा घाट अब सिर्फ आवागमन का पड़ाव नहीं, बल्कि एक छोटा बाजार बन चुका है। घाट के मुहाने पर आधा दर्जन से अधिक चाय, नाश्ते, बिस्कुट और पानी की दुकानें खुल गई हैं। अच्छी बिक्री होने से स्थानीय छोटे दुकानदारों के चेहरे खिले हैं। यात्रियों के सुचारू आवागमन के लिए प्रशासन ने रास्ते तय कर दिए हैं।
चाक-चौबंद रहा प्रशासनिक अमला
जहान्वी चौक से आने वाले मुसाफिरों को पश्चिम दिशा से बाहर निकाला जा रहा है, जबकि जाने वालों के लिए दक्षिण और पश्चिम दोनों ओर से प्रवेश मार्ग दिया गया है। जिलाधिकारी अलंकृता पाण्डेय के निर्देश पर विधि-व्यवस्था एडीएम राकेश रंजन, एसडीएम विकास कुमार, सबौर सीओ दिव्या कुमारी, आपदा एडीएमओ ज्ञानेश गुंजन और सहायक निदेशक रतन जी के साथ आपदा मित्र लगातार घाट पर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा निगरानी में मुस्तैद रहे।
