तानों से खाकी तक का सफर: बेगूसराय की स्वाति बनीं बिहार पुलिस का हिस्सा, अब दारोगा बनने का सपना
Swati Kumari Success Story: स्वाति कुमारी ने बचपन में पिता को खोने और आर्थिक तंगी के बावजूद हार नहीं मानी।

स्वाति कुमारी। (फाइल फोटो)
HighLights
पिता के निधन के बाद भी स्वाति ने जारी रखी पढ़ाई।
प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाकर अपनी शिक्षा का खर्च उठाया।
समाज के तानों को अनसुना कर बिहार पुलिस में चयन।
मो. खालिद, बेगूसराय। बेटी को बोझ समझने और उसके सपनों पर सवाल उठाने वाले समाज के लिए सदर प्रखंड के पन्हास की स्वाति कुमारी एक मिसाल हैं।
बचपन में पिता का साया सिर से उठ गया, आर्थिक मुश्किलों ने घेरा और समाज ने भी कदम-कदम पर ताने दिए। लेकिन स्वाति ने हार नहीं मानी।
प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्च निकाला। लड़की होकर दौड़ने जाने और लड़कों की तरह कपड़े पहनने पर लोगों ने सवाल उठाए, लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की।
मेहनत और हौसले के दम पर स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई पूरी की और बिहार पुलिस में चयनित होकर अपनी पहचान बनाई। अब उनका अगला लक्ष्य दारोगा बनना है।
स्वाति की कहानी बताती है कि बेटियों को अवसर और परिवार का साथ मिले, तो वे मुश्किलों को पीछे छोड़ सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं।
पिता का साया उठा, फिर भी नहीं रुकी पढ़ाई
बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र के पन्हास गांव निवासी स्वाति कुमारी स्व. त्रिभुवन सिंह की तीन संतानों में सबसे छोटी हैं। उनकी बड़ी बहन और एक भाई हैं।
बचपन में ही पिता का निधन हो जाने के बाद उनके सामने पढ़ाई जारी रखने और भविष्य संवारने की चुनौती थी। आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद स्वाति ने अपने सपनों से समझौता नहीं किया।
उन्होंने प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और उससे होने वाली आमदनी से पढ़ाई व तैयारी का खर्च उठाया। मुश्किलों के बीच उन्होंने स्नातकोत्तर तक शिक्षा हासिल की।
भाई ने बढ़ाया हौसला, मेहनत लाई रंग
संघर्ष के इस सफर में स्वाति के भाई का साथ बेहद अहम रहा। भाई ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने का भरोसा दिया।
परिवार से मिले इसी संबल के सहारे स्वाति विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहीं। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन बिहार पुलिस में हो गया।
कभी जिनके दौड़ने और पहनावे पर सवाल उठाए जाते थे, आज वही स्वाति वर्दी पहनकर अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। स्वाति की सफलता बताती है कि बेटी परिवार की जिम्मेदारी ही नहीं, उसकी ताकत और गौरव भी है।
जरूरत है उसकी उड़ान पर सवाल उठाने के बजाय उसे आगे बढ़ने का अवसर देने की। समाज के तानों के बीच स्वाति ने अपनी मेहनत से जो पहचान बनाई है, वह हर उस बेटी के लिए उम्मीद की किरण है, जो अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखती है।