Jitiya Vrat 2026: बच्चों के लिए माताओं की कठोर साधना, शुक्रवार को नहाय खाय के साथ शुरू होगा निर्जला व्रत
संतानों की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना के लिए माताओं का प्रमुख जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा।

जितिया व्रत। फाइल फोटो
HighLights
जितिया व्रत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ होगा शुरू।
माएं शनिवार को पूरे दिन और रात निर्जला व्रत रखेंगी।
रविवार सुबह 7:30 बजे के बाद पारण कर व्रत होगा समाप्त।
जागरण संवाददाता, बेगूसराय। संतानों की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना को लेकर माताओं का प्रमुख पर्व जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत इस बार श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। पर्व को लेकर महिलाओं ने घरों में तैयारी शुरू कर दी है।
शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ व्रत का अनुष्ठान शुरू होगा। शनिवार को महिलाएं पूरे दिन और रात निर्जला व्रत रखेंगी। रविवार की सुबह 7:30 बजे के बाद पारण कर व्रत का समापन किया जाएगा।
जिमूतवाहन ने नागवंश के बच्चों को दिया था जीवनदान
पंडितों की मानें तो पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में जिमूतवाहन नामक एक धर्मात्मा और दयालु राजकुमार थे। एक दिन उन्होंने नाग माता को अपने पुत्र के प्राणों की रक्षा के लिए विलाप करते देखा।
नागवंश के बच्चों को प्रतिदिन गरुड़ के लिए भोजन के रूप में भेजा जाता था। नाग माता का दुख देखकर जिमूतवाहन ने स्वयं को गरुड़ के सामने प्रस्तुत कर दिया और नागपुत्र के स्थान पर अपना जीवन देने का संकल्प लिया।
जिमूतवाहन की दया और त्याग से प्रसन्न होकर गरुड़ ने उन्हें जीवनदान दिया और नागपुत्र को भी मुक्त कर दिया। इसी मान्यता से जीवित्पुत्रिका व्रत में माताएं जिमूतवाहन की पूजा कर अपनी संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती हैं।
निर्जला व्रत में भी नहीं डिगती आस्था
जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। महिलाएं पूजा सामग्री, फल, मिठाई और अन्य आवश्यक सामान की खरीदारी में जुटी हैं।
शनिवार को सूर्योदय से व्रत शुरू होने के बाद महिलाएं जल तक ग्रहण नहीं करेंगी। रविवार को निर्धारित समय सुबह के साढ़े सात बजे के बाद विधि-विधान से पूजा कर पारण किया जाएगा। घर-घर में पर्व को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है।
