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खराब फोन और चार्जर को कूड़ेदान में मत फेंकिए; बेगूसराय के इस स्कूल से सीखिए ई-वेस्ट का सही मतलब

Published: Mon, 02 Nov 2026 06:11 PM (IST)

बेगूसराय के एक स्कूल में बच्चों को ई-वेस्ट के प्रति जागरूक करने के लिए अनोखी पहल की गई है।

बच्चियों ने दी जानकारी। (जागरण)

बच्चियों ने दी जानकारी। (जागरण)

HighLights

  1. बेगूसराय स्कूल में ई-वेस्ट जागरूकता अभियान चलाया गया।

  2. बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सही निपटान का महत्व समझाया।

  3. स्कूल में ई-वेस्ट के लिए अलग डस्टबिन रखा गया।

डिजिटल डेस्क, बेगूसराय। हम सभी अपने घरों में साफ-सफाई करते हैं और कूड़ा डस्टबिन में डाल देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर का खराब चार्जर, टूटा हुआ फोन या फ्यूज हो चुका बल्ब किस कचरे के डिब्बे में जाना चाहिए, इसे ई-वेस्ट कहते हैं और इसे सामान्य कूड़े के साथ फेंकना हमारे पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इसी खतरे के प्रति जागरूक करने के लिए बेगूसराय के एक स्कूल में बहुत ही अनोखी पहल की गई है।

खराब फोन और चार्जर को कूड़े में न फेंके

बेगूसराय के बरौनी स्थित उर्दू प्राथमिक विद्यालय,पिपरा देवस में शिक्षक रितेश सर ने अपने बच्चों को ई-वेस्ट के प्रति जागरूक करने का जिम्मा उठाया है।

उन्होंने स्कूल में एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया, जिसका मकसद बच्चों को यह समझाना था कि खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कैसे और कहां फेंकना चाहिए।

उन्होंने बच्चों को समझाया कि कोई भी पुराना मोबाइल, बैटरी, चार्जर, इयरफोन या बल्ब सामान्य कचरा नहीं है, इसलिए इसे अन्य कूड़े के साथ नहीं फेंकना चाहिए।

रुक्सार और ईशा ने समझाया ई-वेस्ट का मतलब

इस अभियान में स्कूल के बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कक्षा की दो छात्राओं, रुक्सार और ईशा ने ई-वेस्ट के बारे में अपनी समझ को बहुत ही आसान शब्दों में साझा किया।

रुक्सार ने बताया कि ई-वेस्ट एक इलेक्ट्रॉनिक कचरा है। जैसे कि पुराने मोबाइल, पुराने चार्जर, पुराने बल्ब, मिक्सर, टीवी, और इयरफोन। इन बच्चियों ने अपने घर और आस-पास से कुछ पुराना ई-कचरा भी इकट्ठा किया था, जिसमें खराब चार्जर, बल्ब, इयरबड और एक पुराना फोन शामिल था।

बच्चियों ने बताया कि पहले उन्हें ई-वेस्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन अब वे जान गई हैं कि इसे अलग से जमा करना कितना जरूरी है।

ई-वेस्ट के लिए बना अलग डस्टबिन

बच्चों में सही आदत विकसित करने के लिए स्कूल में एक अलग ई-वेस्ट डस्टबिन भी रखा गया है, ताकि वे इस तरह के कचरे को पहचानें और उसे सही जगह डालें।

रितेश सर ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने आस-पड़ोस के लोगों को भी इसके बारे में जागरूक करें और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।

बच्चों को बचपन से ही पर्यावरण और कचरा प्रबंधन की ऐसी समझ देना, न केवल उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाएगा, बल्कि हमारे समाज को भी एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य की ओर ले जाएगा।

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