बिहार में लगातार हादसों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, बेगूसराय में बिना रजिस्ट्रेशन धड़ल्ले से चल रहीं नावें
बेगूसराय में 307 नावों में से केवल 150 पंजीकृत हैं, जिससे सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बछवाड़ा ...और पढ़ें

नावों में सवार यात्री। फोटो जागरण
HighLights
जिले में 307 नावों में से केवल 150 पंजीकृत।
बछवाड़ा नाव दुर्घटना में दो लोगों की मौत।
सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल।
जागरण संवाददाता, बेगूसराय। जिले में नावों के परिचालन की व्यवस्था में सुरक्षा मानकों की अनदेखी यात्रियों की जान पर भारी पड़ रही है। बछवाड़ा प्रखंड में दो दिन पूर्व नाव दुर्घटना में दो लोगों की मौत के बाद नावों के निबंधन और प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
जिले में 307 नावों का परिचालन हो रहा है, लेकिन इनमें से महज 150 का ही निबंधन हुआ है। यानी आधे से अधिक नावों के निबंधन का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में सवाल उठता है कि बिना निबंधन चल रही नावों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और इन पर निगरानी कौन रख रहा है?
मटिहानी में सर्वाधिक 74 नाव निबंधित
जिले के पांच प्रखंडों में कुल 150 नावों का निबंधन हुआ है। इनमें सबसे अधिक 74 नावें मटिहानी प्रखंड में निबंधित हैं। इसके अलावा बलिया में 37, शाम्हो अकहा कुरहा में 32, नावकोठी में छह और चेरिया बरियारपुर में एक नाव का निबंधन हुआ है।
आंकड़ों के मुताबिक जिले के अन्य प्रखंडों में संचालित नावों के निबंधन की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में नावों के वास्तविक परिचालन और प्रशासनिक रिकार्ड के बीच बड़ा अंतर सामने आ रहा है।
जांच के बाद ही मिलता है निबंधन
नावों के निबंधन के लिए मालिकों से आवेदन लिया जाता है। आवेदन मिलने के बाद परिवहन विभाग के मोटरयान निरीक्षक (एमवीआइ) नाव की भौतिक जांच करते हैं। इसमें नाव की लंबाई, चौड़ाई और गहराई मापने के साथ उसकी वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाता है।
इंजन से चलने वाली नावों के संयंत्र और निर्माण से संबंधित पूरी जानकारी भी ली जाती है। इसके बाद एमवीआइ अपनी जांच रिपोर्ट संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को भेजते हैं। रिपोर्ट के आधार पर एसडीओ अपने क्षेत्र की नावों का निबंधन करते हैं।
नाव पर निबंधन चिह्न और क्षमता दर्ज करने का प्रविधान
निबंधित नावों की पहचान के लिए प्रशासन की ओर से उन पर बीआरजे निबंधन चिह्न लगाया जाता है। इसके साथ नाव पर कितने व्यक्ति, मवेशी या कितना माल ढोया जा सकता है, इसकी क्षमता भी दर्ज करने का प्रावधान है।
इसका उद्देश्य क्षमता से अधिक यात्रियों और सामान के परिवहन पर रोक लगाना है। निर्देशों का उल्लंघन करने पर नाव का निबंधन रद करने का भी प्रावधान है। इसके बावजूद नावों के परिचालन में निर्धारित मानकों के अनुपालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मौत के बाद चार लाख मुआवजा, कार्रवाई पर सवाल
नाव दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मौत होने पर आपदा राहत कोष से चार लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान है। दुर्घटना के बाद घटना की जांच भी कराई जाती है। हालांकि, अब तक नाव दुर्घटनाओं के मामलों में नाव मालिकों और नाविकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के उदाहरण सामने नहीं आए हैं।
ऐसे में दुर्घटना के बाद मुआवजा भुगतान और जांच की प्रक्रिया के साथ-साथ हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदारी तय करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी राजू कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से केवल बाढ़ के दौरान ही नावों का परिचालन कराया जाता है। इस दौरान नाव मालिकों को सरकार द्वारा निर्धारित दर से भुगतान किया जाता है, ताकि आम लोगों से किराया नहीं लिया जाए।
फिलहाल सरकारी नावों का परिचालन बंद है। निजी नाव मालिक किस तरह नावों का परिचालन कर रहे हैं, यह उनका मामला है। हालांकि, किसी भी दुर्घटना के बाद जांच कराई जाती है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है।
उन्होंने बताया कि बछवाड़ा नाव दुर्घटना में मृत दोनों व्यक्तियों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये मुआवजे का भुगतान कर दिया गया है। दुर्घटना की जांच भी की जा रही है।
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