बांका मिलिट्री ग्राउंड में भाई संग बहाया पसीना, एक साथ दारोगा बनीं दो बहनें; प्रियंका कटिहार तो पूजा लखीसराय में SI
Banka Sisters Priyanka & Pooja Sub Inspector Success Story: बांका की प्रियंका और पूजा कुमारी, एक किराना दुकानदार की बेटियां, ...और पढ़ें

Banka Sisters Priyanka & Pooja Sub Inspector Success Story: प्रियंका कुमारी कटिहार जिले के कोढ़ा थाना में पदस्थापित हैं, पूजा कुमारी लखीसराय जिले के एससी-एसटी थाना में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
HighLights
किराना दुकानदार की बेटियों ने एक साथ दारोगा पद हासिल किया।
प्रियंका कटिहार, पूजा लखीसराय में पुलिस अवर निरीक्षक के रूप में कार्यरत।
भाई के साथ मिलिट्री ग्राउंड में कड़ी मेहनत से सफलता पाई।
संवाद सूत्र, बांका। Banka Sisters Priyanka & Pooja Sub Inspector Success Story: पिता की एक छोटी सी किराना दुकान, सीमित आमदनी और चार बच्चों की परवरिश की भारी जिम्मेदारी। साधारण परिवारों में अक्सर ऐसे हालात सपनों के आगे दीवार बन जाते हैं, लेकिन बांका के करहरिया की दो सगी बहनों ने इन चुनौतियों को अपनी ताकत बना लिया।
अपनी अटूट लगन, कड़े परिश्रम और आत्मविश्वास के दम पर प्रियंका कुमारी और पूजा कुमारी ने एक साथ बिहार पुलिस में दारोगा (पुलिस अवर निरीक्षक) बनकर सफलता की अद्भुत मिसाल पेश की है।
एक बहन कोढ़ा तो दूसरी लखीसराय में संभाल रहीं कमान
वर्तमान में बड़ी बहन प्रियंका कुमारी कटिहार जिले के कोढ़ा थाना में पदस्थापित हैं, जबकि छोटी बहन पूजा कुमारी लखीसराय जिले के एससी-एसटी थाना में अपनी सेवाएं दे रही हैं। खास बात यह है कि दोनों बहनों ने चार साल पूर्व एक ही साथ दारोगा भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण कर खाकी वर्दी हासिल की थी। आज दोनों बहनें पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ कानून-व्यवस्था संवारने और जरूरतमंदों को न्याय दिलाने में जुटी हैं।
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सीमित कमाई में भी पिता ने शिक्षा से नहीं किया समझौता
प्रियंका और पूजा के पिता भोला प्रसाद गुप्ता शहर में एक छोटी सी किराना दुकान चलाते हैं, जबकि मां मनोरमा देवी गृहिणी हैं। पिता के सामने चार बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर चलाने की बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने कभी अपनी बेटियों की शिक्षा में रुकावट नहीं आने दी।
परिवार के बड़े बेटे पंकज कुमार गुप्ता का चयन वर्ष 2013 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में हुआ, जिससे परिवार को संबल मिला। वहीं छोटा भाई प्रदीप कुमार गुप्ता पिता के पुराने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटा रहा है। पिता भोला प्रसाद गुप्ता आज भी अपनी दुकान चलाकर कर्मठता की मिसाल पेश कर रहे हैं।
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लोको पायलट में चयन के बाद भी नहीं छोड़ी खाकी की जिद
दारोगा बनने का सफर दोनों बहनों के लिए आसान नहीं था। पहले प्रयास में दोनों को असफलता हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2020 में दोनों बहनों की प्रतिभा का डंका बजा और उनका चयन मुंबई में रेलवे लोको पायलट के पद पर हो गया। हालांकि, घर से अत्यधिक दूरी होने और दिल में बिहार पुलिस में जाकर सेवा करने का जज्बा होने के कारण दोनों ने उस नौकरी को छोड़ दिया और अपना पूरा ध्यान फिर से पुलिस सेवा की तैयारी पर केंद्रित कर दिया।
मिलिट्री ग्राउंड में भाई संग बहाया पसीना, दूसरे प्रयास में मिली सफलता
लिखित परीक्षा के साथ-साथ शारीरिक दक्षता परीक्षा पास करने के लिए दोनों बहनों ने बांका के मिलिट्री ग्राउंड को अपना साधना स्थल बनाया। छोटा भाई प्रदीप, जो खुद भी सेना भर्ती की तैयारी कर रहा था, हर सुबह अपनी दोनों बहनों को ग्राउंड ले जाता था।
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मैदान में दौड़ लगाने से लेकर ऊंची कूद और लॉन्ग जंप तक, प्रदीप अपनी बहनों का हौसला बढ़ाता रहा। भाई-बहनों की इस तिकड़ी और अटूट तालमेल का सुखद परिणाम यह रहा कि दूसरे ही प्रयास में दोनों बहनों ने एक साथ दारोगा भर्ती परीक्षा पास कर ली।
दैनिक जागरण के विशेष अभियान 'लक्ष्मी मेरी लाडो' के तहत प्रियंका और पूजा की यह गौरवमयी यात्रा साबित करती है कि अगर परिवार का विश्वास और बेटियों का संकल्प मजबूत हो, तो साधारण घरों की बेटियां भी समाज के सर्वोच्च पदों पर आसीन होकर परिवार और जिले का नाम रोशन कर सकती हैं।
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