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Inspiring Story : शादी के 8 साल बाद बनीं दारोगा! बांका की SI संगीता की प्रेरक कहानी, परिवार संभालते हुए पाई सफलता

Published: Thu, 05 Nov 2026 08:15 AM (IST)

Inspiring Story : बांका टाउन थाना में पदस्थापित दारोगा संगीता कुमारी ने शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखी ...और पढ़ें

Inspiring Story : शादी के 8 साल बाद परिवार संभालते हुए संगीता बनीं दरोगा।

Inspiring Story : शादी के 8 साल बाद परिवार संभालते हुए संगीता बनीं दरोगा।

HighLights

  1. शिक्षिका बनने का सपना छोड़ पुलिस दारोगा बनीं संगीता कुमारी।

  2. शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ पाई बड़ी सफलता।

  3. महिलाओं को आत्मनिर्भरता और साहस का सशक्त संदेश देती कहानी।

संवाद सूत्र, बांका। Inspiring Story : सपने कभी परिस्थितियों के मोहताज नहीं होते। यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति, हौसला और निरंतर परिश्रम का जज्बा हो तो पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।

इसकी जीवंत मिसाल बनी हैं बांका टाउन थाना में पदस्थापित महिला पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) संगीता कुमारी। कभी कलम थामकर शिक्षिका बनने का ख्वाब संजोने वाली संगीता आज खाकी वर्दी पहनकर समाज की सुरक्षा और जरूरतमंदों की सेवा में पूरी निष्ठा से जुटी हुई हैं।

शिक्षकों के परिवार में पली-बढ़ीं

मूल रूप से भोजपुर जिले के डिहरा गांव की रहने वाली संगीता कुमारी का बचपन शैक्षणिक माहौल में बीता। उनके परिवार में ज्यादातर सदस्य शिक्षक हैं। इसी परिवेश से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा और बीएड (B.Ed.) की पढ़ाई पूरी की तथा शिक्षिका बनने की तैयारी में जुट गईं। उनका शुरुआती लक्ष्य अध्यापन के क्षेत्र में जाकर बच्चों का भविष्य संवारना था।

2015 में विवाह, बच्चों को पढ़ाती रहीं ट्यूशन

वर्ष 2015 में विवाह के बंधन में बंधने के बाद उनके जीवन में पारिवारिक और घरेलू जिम्मेदारियों का दायरा काफी बढ़ गया। आम तौर पर ऐसी परिस्थितियों में महिलाएं अपने करियर से समझौता कर लेती हैं, लेकिन संगीता ने अपनी पढ़ाई का सिलसिला थमने नहीं दिया। वे घर के सारे कामकाज निपटाने के साथ-साथ 12वीं तक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती रहीं। इससे एक तरफ उनकी शैक्षणिक निरंतरता बनी रही, तो दूसरी तरफ उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता गया।

दारोगा भर्ती में आजमाया भाग्य, 2022 में बांका बनी पहली कर्मभूमि

ट्यूशन और गृहस्थी के इसी दौर में जब बिहार पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) भर्ती का विज्ञापन निकला, तो संगीता ने इसमें आवेदन किया। दिन-रात की कड़ी मेहनत और अनुशासन का फल मिला और वे दारोगा पद के लिए अंतिम रूप से चयनित हो गईं। वर्ष 2022 में पुलिस सेवा में विधिवत योगदान देने के बाद बांका टाउन थाना उनकी पहली पोस्टिंग बनी। उल्लेखनीय है कि उनके पति भी झारखंड पुलिस में सेवारत हैं, जिससे उन्हें कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने का निरंतर संबल मिलता है।

खाकी महज नौकरी नहीं, आत्मनिर्भरता और सेवा का माध्यम

संगीता कुमारी का कहना है कि पुलिस सेवा में रहकर जब वे किसी असहाय, पीड़ित या जरूरतमंद की मदद करती हैं, तो उन्हें असीम आत्मिक संतुष्टि मिलती है। आज उनके लिए यह खाकी वर्दी सिर्फ एक आजीविका या सरकारी नौकरी नहीं है, बल्कि यह नारी के आत्मसम्मान, साहस, आत्मनिर्भरता और जनसेवा का सशक्त प्रतीक है। उनका यह संघर्ष ग्रामीण और विवाहित महिलाओं को यह संदेश देता है कि शादी के बाद भी सपनों को नई उड़ान दी जा सकती है।

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