बांका में किसान खुद बनाएंगे वर्मी कंपोस्ट, 1200 खाद पीट का लक्ष्य, रासायनिक खाद का घटेगा खर्च
बांका में रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से बंजर हो रही मिट्टी को सुधारने के लिए किसानों को जैविक खाद (वर्मी कंपोस्ट) बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

एआई द्वारा जनरेट की गई सांकेतिक तस्वीर है।
HighLights
किसानों को जैविक खाद (वर्मी कंपोस्ट) बनाने हेतु प्रोत्साहन।
चालू वित्तीय वर्ष में 1200 जैविक खाद पीट का लक्ष्य।
रासायनिक खाद का खर्च घटेगा, मिट्टी की सेहत सुधरेगी।
संवाद सूत्र, बांका। जिले में रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से बंजर होती जा रही खेतों की मिट्टी की सेहत सुधारने और जैविक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी कड़ी में अब बांका के किसानों को खुद अपने खेतों और घरों के पास जैविक खाद यानी वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत कृषि विभाग की ओर से किसानों को जैविक खाद पीट के निर्माण पर आर्थिक सहायता व अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है।
चालू वित्तीय वर्ष में पूरे जिले के अंतर्गत कुल 1200 जैविक खाद पीट का निर्माण कराया जाना है, जिसके लिए कृषि विभाग द्वारा प्रखंडवार लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक संजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि किसान बेहद आसानी से अपने घर या खेत पर जैविक खाद तैयार कर सकते हैं।
इसके इस्तेमाल से न केवल किसानों की खेती की लागत में भारी कमी आएगी, बल्कि फसलों के उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में जानकारी के अभाव में किसान धड़ल्ले से खेतों में रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं, जो मिट्टी के प्राकृतिक पोषक तत्वों को तेजी से नष्ट कर रही है।
मिट्टी में मुख्य रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी तत्व होते हैं, जो उसकी उर्वरक क्षमता को बनाए रखते हैं। रासायनिक खादें इन तत्वों को खत्म कर देती हैं, जबकि वर्मी कंपोस्ट इन पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाने में बेहद मददगार साबित होती है।
इस तरह बेहद आसान है वर्मी कंपोस्ट तैयार करना
विशेषज्ञों के मुताबिक, वर्मी कंपोस्ट पीट के माध्यम से जैविक खाद बनाना बेहद सरल प्रक्रिया है:
सबसे पहले ईंटों की मदद से जरूरत और जगह के अनुसार एक छोटा टब या पीट (गड्ढा/संरचना) बनाया जाता है।
इस पीट के भीतर गोबर, सड़े-गले पत्ते, गीला कचरा सहित अन्य कार्बनिक पदार्थों को भर दिया जाता है।
इसके बाद इसमें केंचुओं को छोड़ दिया जाता है।
सामान्यतः करीब तीन सप्ताह (21 दिन) के भीतर उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनकर पूरी तरह तैयार हो जाती है।
यदि इस दौरान इस मिश्रण को तीन से चार बार हल्के हाथों से उलट-पलट (हिला) दिया जाए, तो खाद की गुणवत्ता और अधिक बेहतर हो जाती है।
इस जैविक खाद का उपयोग किसान अपने किचन गार्डन, बाग-बगीचों से लेकर मुख्य खेतों की फसलों में बेझिझक कर सकते हैं।
जैविक खेती को प्रोत्साहित करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दे रही है। इसी क्रम में किसानों को वर्मी कंपोस्ट यूनिट बनाने के लिए अनुदान भी दिया जा रहा है। इस साल पूरे जिले में 1200 जैविक खाद पीट बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मिट्टी दोनों को मजबूती मिलेगी।
— त्रिपुरारी शर्मा, जिला कृषि पदाधिकारी, बांका
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