एक साथ जलीं तीन चिताएं, बालाजी के दर्शन कर लौट रहे बांका के परिवार का उजड़ा संसार! एक्सप्रेसवे पर हुआ भीषण एक्सीडेंट
Banka Family Accident Delhi Mumbai Expressway: मेहंदीपुर बालाजी से लौट रहे बांका के एक परिवार के साथ दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ...और पढ़ें

Banka Family Tragedy 3 Dead in Delhi Mumbai Expressway Accident : एक साथ उठीं तीन अर्थियां
HighLights
मेहंदीपुर बालाजी से लौटते समय परिवार हादसे का शिकार।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कार बस से टकराई, तीन की मौत।
बांका के भद्रार गांव और रजोकरी में शोक की लहर।
डिजिटल डेस्क, बांका। Banka Family Accident Delhi Mumbai Expressway: हाथों में मेहंदीपुर बालाजी का पवित्र प्रसाद था, मन में परिवार के सुख-चैन और बच्चों के सुनहरे भविष्य की दुआएं थीं... लेकिन नियति ने कुछ ऐसा क्रूर खेल खेला कि मंदिर की चौखट से निकली यह यात्रा कभी घर की दहलीज तक नहीं पहुंच पाई।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के हुआ एक भीषण सड़क हादसा एक पूरे हंसते-खेलते परिवार को लील गया। जिस घर के आंगन में कुछ घंटे पहले तक मासूमों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां से शुक्रवार को जब एक साथ तीन अर्थियां उठीं, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा फट पड़ा।
इस दिल दहला देने वाली त्रासदी ने बिहार के बांका जिले के सदर प्रखंड स्थित भद्रार गांव से लेकर देश की राजधानी दिल्ली के रजोकरी तक मातम का ऐसा सन्नाटा पसार दिया है, जिसे चीखें भी भेद नहीं पा रही हैं।
दोस्त से मांग कर लाए थे गाड़ी
मूल रूप से बांका के भद्रार गांव निवासी बम बम शाह (कुमार) बीते 14 वर्षों से दिल्ली के रजोकरी गार्डन में किराए का कमरा लेकर रह रहे थे। वह इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दिन-रात टैक्सी चलाकर अपने परिवार की परवरिश कर रहे थे। परिवार की खुशहाली की मन्नत मांगने के लिए वह अपने एक परिचित से कार मांग कर पत्नी रूपा देवी, 11 वर्षीय बेटे आयुष, बेटी माही और 1 साल की दुधमुंही बच्ची को लेकर राजस्थान स्थित प्रसिद्ध मेहंदीपुर बालाजी धाम गए थे।

सुबह 4 बजे एक्सप्रेसवे पर चीख उठी जिंदगी
दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद पूरा परिवार खुशी-खुशी दिल्ली लौट रहा था। बुधवार की भोर करीब 4 बजे, जब कार गुरुग्राम के सोहना स्थित दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भोंडसी थाना क्षेत्र के धुनेला गांव के पास पहुंची, तभी काल बनकर सड़क किनारे खड़ी एक टूरिस्ट बस के पिछले हिस्से में कार जा घुसी।
टक्कर इतनी प्रलयंकारी थी कि कार का अगला हिस्सा लोहे के मलबे में तब्दील हो गया और कार के परखच्चे उड़ गए। आगे की सीटों पर बैठे बम बम शाह, उनकी पत्नी रूपा देवी और मासूम माही अंदर ही बुरी तरह दब गए और घटनास्थल पर ही उन्होंने अंतिम सांस ली।
अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे दो मासूम
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राहगीरों और पुलिस को शवों को बाहर निकालने के लिए लोहे की चद्दरों को काटना पड़ा। पिछली सीट पर बैठे 11 वर्षीय आयुष और मात्र एक वर्ष की मासूम सोनी खून से लथपथ हालत में मिले।
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सिर से उठा मां-बाप का साया
दोनों बच्चों को नाजुक स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक साल की मासूम बच्ची को तो यह इल्म भी नहीं है कि अब इस दुनिया में उसे अपनी छाती से लगाने वाली मां और कंधे पर बिठाने वाला पिता हमेशा के लिए चले गए हैं। दोनों मासूमों के सिर से एक ही झटके में माता-पिता और बहन का साया छिन जाने के इस दर्द ने अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मियों की आंखें भी नम कर दी हैं।
रजोकरी में एक साथ जलीं तीन चिताएं
शुक्रवार को जब पोस्टमार्टम के बाद दिल्ली के रजोकरी में तीनों शव पहुंचे, तो पूरे मोहल्ले में कोहराम मच गया। पति, पत्नी और बेटी की अर्थी एक साथ सजी और एक ही श्मशान घाट पर तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। तीनों चिताओं को एक साथ जलते देख श्मशान में मौजूद हर आंख रो पड़ी।
बांका के भद्रार गांव में नहीं जले चूल्हे
उधर, जैसे ही हादसे की खबर बांका के भद्रार गांव पहुंची, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों की चीत्कार से पूरा वातावरण गमगीन हो गया और पड़ोसियों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले। 14 साल पहले रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली गए गांव के बेटे की इस तरह दर्दनाक मौत की खबर ने हर ग्रामीण को स्तब्ध और निशब्द कर दिया है।
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