बांका में 50 हेक्टेयर में होगी अमरूद और नींबू की खेती, किसानों को मिलेगी सब्सिडी
बांका में किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग 50 हेक्टेयर भूमि पर अमरूद और नींबू की क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दे रहा है।

50 हेक्टेयर में होगी अमरूद और नींबू की खेती (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
संवाद सूत्र, बांका। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को भी प्रोत्साहित कर रहा है। इसके तहत जिले में किसान समूह बनाकर बड़े पैमाने पर अमरूद और नींबू की खेती करेंगे। दोनों फलों के लिए एक-एक क्लस्टर विकसित किया जाएगा। प्रत्येक क्लस्टर के लिए 25 हेक्टेयर जमीन निर्धारित है। शुरुआती चरण में कुल 50 हेक्टेयर भूमि पर बाग लगाने की योजना है।
इस पहल का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को एकजुट कर बागवानी से जोड़ना है। अब तक अधिकतर किसान धान, गेहूं, मक्का और अन्य पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं। विभाग किसानों के समूह बनाकर उन्हें वैज्ञानिक तरीके से अमरूद और नींबू उगाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इससे एक ही क्षेत्र में बड़े पैमाने पर फल उत्पादन संभव होगा।
दो किस्तों में मिलेगा अनुदान
क्लस्टर आधारित खेती के लिए किसानों को आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। पौधों की खरीद और खेतों की घेराबंदी सहित कार्यों के लिए दो किस्तों में अनुदान मिलेगा। इससे बागवानी शुरू करने में शुरुआती पूंजी की समस्या कम होगी।
सामूहिक खेती से खेत तैयार करने, पौधे लगाने और उनकी देखरेख में भी सहूलियत होगी। किसानों को उन्नत कृषि तकनीक की जानकारी भी दी जाएगी।
कम लागत में होगा ज्यादा उत्पादन
जिला उद्यान पदाधिकारी दिवाकर कुमार भारती ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को एकजुट कर उनकी आय बढ़ाना है। सामूहिक खेती से उत्पादन लागत कम होगी और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ मिलेगा।
क्लस्टर विकसित होने से जिले में फल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इससे बागवानी को रोजगार और आमदनी के स्थायी विकल्प के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
मार्केटिंग की नहीं होगी परेशानी
अमरूद और नींबू की उपज बेचना किसानों के सामने चुनौती हो सकती है। हालांकि, क्लस्टर के तहत बड़े पैमाने पर एक साथ उत्पादन से बाजार तक पहुंच आसान हो सकती है। किसान उपज को एक जगह एकत्र कर थोक व्यापारियों और फल मंडियों तक पहुंचा सकेंगे। स्थानीय बाजार के अलावा आसपास के जिलों की मंडियां भी बिक्री का माध्यम बन सकती हैं।
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