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औरंगाबाद: सिलाई के हुनर से 3 बच्चों का भविष्य संवार रहीं पिंकी, हर महीने 10 से 15 हजार रुपये की कमाई

Published: Mon, 12 Oct 2026 06:01 PM (GMT+05:30)

2018 में पति की मृत्यु के बाद पिंकी देवी ने तीन बच्चों की परवरिश के लिए सिलाई का हुनर अपनाया। ...और पढ़ें

सिलाई के हुनर से तीन बच्चों का भविष्य संवार रहीं पिंकी

सिलाई के हुनर से तीन बच्चों का भविष्य संवार रहीं पिंकी

HighLights

  1. पति की मृत्यु के बाद पिंकी ने सिलाई सीखी।

  2. जन शिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण लेकर बनीं आत्मनिर्भर।

  3. हर माह 10-15 हजार कमाकर बच्चों को पाल रहीं।

शुभम कुमार सिंह, औरंगाबाद। साल 2018 में सड़क दुर्घटना में पति डबलू रजक की मौत ने पिंकी देवी की जिंदगी बदल दी। जिस उम्र में उन्हें पति के साथ परिवार के सपने पूरे करने थे, उसी समय तीन बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।

एक ओर पति को खोने का दुख था, तो दूसरी ओर बच्चों के भविष्य की चिंता। आर्थिक तंगी ने मुश्किलें बढ़ाईं, लेकिन पिंकी ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने हुनर को ताकत बनाया और मेहनत से बच्चों के भविष्य को संवारने की राह चुनी।

दर्द को ताकत बनाकर चुनी आत्मनिर्भरता की राह

औरंगाबाद के रायपुरा गांव की 30 वर्षीय पिंकी के लिए पति की मौत के बाद जिंदगी आसान नहीं थी। उस समय उनकी उम्र 22 वर्ष थी। तीन बच्चों की परवरिश, घर का खर्च और उनकी पढ़ाई की जिम्मेदारी निभाना बड़ी चुनौती थी।

परिवार की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि मुश्किल वक्त में पर्याप्त सहारा मिल सके। ऐसे में पिंकी ने अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला किया। उन्हें जन शिक्षण संस्थान, औरंगाबाद के जरिए सिलाई-कटाई का प्रशिक्षण लेने की जानकारी मिली।

उन्होंने इस अवसर का लाभ उठाया और लगन से प्रशिक्षण पूरा किया। इससे उनका हुनर निखरा और आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने तय किया कि अपनी मेहनत से बच्चों की जिंदगी संवारेंगी।

सुई-धागे से बुन रहीं बच्चों के भविष्य के सपने

प्रशिक्षण के बाद पिंकी ने घर पर ही सिलाई का काम शुरू किया। शुरुआत में काम मिलना चुनौती था, लेकिन मेहनत और काम की गुणवत्ता से धीरे-धीरे उन्हें पहचान मिली। आसपास के लोग और महिलाएं कपड़े सिलवाने के लिए उनके पास आने लगे।

आज वह सिलाई से हर माह करीब 10 से 15 हजार रुपये कमाती हैं। लग्न के मौसम में उनकी आमदनी बढ़ जाती है। इसी कमाई से वह घर चलाने के साथ बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरतें पूरी कर रही हैं।

पति को खोने का दर्द आज भी उनके जीवन का हिस्सा है, लेकिन बच्चों की मुस्कान उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

पिंकी की कहानी बताती है कि हुनर, मेहनत और हौसले से विपरीत परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है। वह मुश्किलों के बीच आत्मनिर्भर बनने का सपना देखने वाली महिलाओं के लिए मिसाल हैं।

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