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औरंगाबाद में कृषि यंत्रों की खरीद पर मिलेगी 80 प्रतिशत तक सब्सिडी, 767 पर परमिट जारी

Published: Wed, 04 Nov 2026 08:52 PM (IST)

औरंगाबाद में दो दिवसीय कृषि यांत्रिकरण मेले का शुभारंभ हुआ, जहाँ किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।

कृषि यंत्रों की खरीद पर मिलेगी 80 प्रतिशत तक सब्सिडी (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

कृषि यंत्रों की खरीद पर मिलेगी 80 प्रतिशत तक सब्सिडी (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। अब खेती में न श्रम की अधिक मशक्कत होगी और न ही समय की बर्बादी। आधुनिक कृषि यंत्रों से खेती को आसान और कम खर्चीला बनाने के लिए सरकार किसानों को 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। इसी उद्देश्य से बुधवार को संयुक्त कृषि भवन परिसर में दो दिवसीय कृषि यांत्रिकरण मेले का शुभारंभ किया गया। 

जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने अधिकारियों के साथ दीप प्रज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया। उपनिदेशक कृषि अभियंत्रण डा. सोनू कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले के किसानों के लिए प्रथम केंद्रीकृत ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 767 कृषि यंत्रों के परमिट जारी किए गए हैं। 

इनके लिए करीब 276 लाख रुपये अनुदान का किया गया है। इसके अलावा कस्टम हायरिंग के तहत छह, कृषि यंत्र बैंक के लिए एक तथा स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर के तहत सात किसानों को परमिट मिला है। कुल 86 प्रकार के कृषि यंत्रों की खरीद पर अनुदान दिया जा रहा है।

फसल अवशेष प्रबंधन वाले यंत्रों पर जोर

मेले में डीएम ने विभिन्न कृषि यंत्रों के स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े यंत्रों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और किसानों को इनके उपयोग के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया। 

कहा कि आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। स्ट्रा रीपर, स्ट्रा बेलर, सुपर सीडर, जीरो टिलेज मशीन, रोटावेटर, पैडी ट्रांसप्लांटर, पावर टिलर और लेजर लैंड लेवलर जैसे यंत्र किसानों के लिए उपयोगी साबित होंगे।

लागत घटेगी, उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ेगी

अधिकारियों ने बताया कि कृषि यंत्रों के उपयोग से विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों को समय पर खेती के कार्य पूरे करने में मदद मिलेगी। इससे श्रम और लागत में कमी आएगी तथा उत्पादन एवं उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ेगी। 

धान, गेहूं, दलहन, तेलहन और उद्यानिक फसलों की खेती में आधुनिक यंत्रों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र, सिरिस के वैज्ञानिकों ने किसानों को यंत्रों के संचालन और उपयोग की जानकारी दी। मेला पांच नवंबर तक चलेगा।

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