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1 साल की उम्र में पिता को खोया, घर के किराए से मां ने पाला; अब रग्बी में नेशनल स्टार बनीं बिहार की बेटी खुशबू

Published: Fri, 30 Oct 2026 06:14 PM (IST)

Khushboo Kumari Story: अरवल की खुशबू कुमारी ने पिता के निधन और आर्थिक तंगी के बावजूद रग्बी में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।

खुशबू कुमारी। (फाइल फोटो)

खुशबू कुमारी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. खुशबू कुमारी ने रग्बी में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।

  2. पिता के निधन के बाद मां ने किया पालन-पोषण।

  3. पटना में स्वर्ण और दिल्ली में रजत पदक जीता।

शिव मिश्रा, अरवल। कहते हैं कि हौसलों के आगे मुश्किलें भी घुटने टेक देती हैं। अरवल जिले के करपी बाजार की 17 वर्षीय खुशबू कुमारी इसकी जीवंत मिसाल बन गई हैं।

कभी आर्थिक तंगी और पिता के साये से महरूम जिंदगी की चुनौतियों के बीच पली-बढ़ी इस बेटी ने रग्बी के मैदान में ऐसी छलांग लगाई कि आज उसकी पहचान जिले की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है।

खुशबू की सफलता सिर्फ पदकों की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, मां के त्याग और बेटियों के अटूट हौसले की दास्तान है। खुशबू महज एक साल की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया।

परिवार की पूरी जिम्मेदारी मां शोभा देवी के कंधों पर आ गई। वर्ष 2010 में पति को खोने के बाद उन्होंने घर से मिलने वाले किराये की आमदनी के सहारे एक बेटा और एक बेटी का पालन-पोषण किया।

सीमित संसाधनों के बावजूद बेटी के सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। शोभा देवी बताती हैं कि वर्ष 2022 में स्कूल में पढ़ाई के दौरान खुशबू का रुझान खेल की ओर बढ़ा।

जिला स्तरीय प्रतियोगिता में पदक जीतने के बाद उसका आत्मविश्वास बढ़ा और फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2024 में पटना में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर उसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

अरवल का बढ़ाया मान

वहीं, 29 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल कर एक बार फिर अरवल का मान बढ़ाया।

फिलहाल खुशबू करपी में ही 11वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही हैं। पढ़ाई और खेल के बीच तालमेल बनाकर आगे बढ़ रही इस बेटी की उपलब्धि उन परिवारों के लिए भी संदेश है, जहां आज भी बेटियों के सपनों पर बंदिशें लगाई जाती हैं।

मां शोभा देवी गर्व से कहती हैं कि आज उनकी बेटी की पहचान उसके अपने नाम से है। समाज में उन्हें खुशबू की मां के रूप में सम्मान मिलता है। उनका मानना है कि बेटियों को अवसर और प्रोत्साहन मिले तो वे माता-पिता ही नहीं, पूरे देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

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