अनंत चतुर्दशी 2026: श्रीहरि की पूजा और बप्पा की विदाई का महासंयोग, 14 गांठों वाले 'अनंत सूत्र' से दूर होंगे कष्ट
इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को सर्वार्थसिद्धि और रवियोग के विशेष संयोग में मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु ...और पढ़ें

25 सितंबर को सर्वार्थसिद्धि और रवियोग के शुभ संयोग में अनंत चतुर्दशी (AI Generated Image)
HighLights
25 सितंबर को सर्वार्थसिद्धि और रवियोग के शुभ संयोग में अनंत चतुर्दशी।
भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा, अनंत सूत्र धारण का महत्व।
दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन भी इसी दिन होगा, विसर्जन परंपरा।
संवाद सहयोगी, कलेर (अरवल)। सनातन धर्म में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी दिन अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है।
इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, शांति और संकटों से मुक्ति की कामना की जाएगी। ज्योतिषाचार्य हर्ष मिश्रा के अनुसार इस बार अनंत चतुर्दशी पर सर्वार्थसिद्धि योग और रवियोग का विशेष संयोग बन रहा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसे शुभ संयोग में भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और अनंत सूत्र धारण करने का विशेष महत्व माना जाता है। उन्होंने बताया कि अनंत चतुर्दशी पर विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में आने वाले संकट और लंबे समय से चले आ रहे कष्टों से मुक्ति की कामना की जाती है।
चौदह गांठ का विशेष महत्व:
अनंत सूत्र के लिए सूत के धागे में हल्दी अथवा कुमकुम से चौदह गांठ लगाई जाती है। मान्यता के अनुसार ये गांठें भगवान विष्णु के चौदह लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं। पूजा के बाद इसे विधिपूर्वक धारण किया जाता है।
पुरुष दाहिनी, महिलाएं बाईं भुजा में बांधेंगी:
धार्मिक परंपरा के अनुसार, पुरुष अनंत सूत्र को अपनी दाहिनी भुजा में तथा महिलाएं बाईं भुजा में धारण करती हैं। मान्यता है कि अनंत सूत्र भगवान विष्णु के प्रति आस्था और संरक्षण का प्रतीक है। इसे धारण करने से परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और संकटों से सुरक्षा की कामना की जाती है।
सुबह 6:12 से दोपहर 12:36 तक विशेष समय:
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 25 सितंबर को सुबह 6:12 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक अनंत सूत्र धारण करना विशेष फलदायी रहेगा। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। वहीं, चर एवं लाभ मुहूर्त दोपहर 12:15 बजे से 3:18 बजे तक बताया गया है।
दस दिवसीय गणेशोत्सव का भी होगा समापन:
अनंत चतुर्दशी के दिन दस दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का भी समापन होता है। श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के बाद उनकी प्रतिमा का विधिवत विसर्जन करते हैं। इस तरह यह दिन भगवान विष्णु की आराधना के साथ गणपति उत्सव के समापन का भी महत्वपूर्ण अवसर बन जाता है।
