रेणु की कहानियों में रेल, अब रेलवे ने दिया सम्मान: कटिहार में फणीश्वरनाथ रेणु के नाम पर रेलवे संस्थान का उद्घाटन
कटिहार जंक्शन के पास पूसी रेल द्वारा फणीश्वरनाथ रेणु रेलवे संस्थान का उद्घाटन रेल महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर डीआरएम किरेन्द्र नरह भी मौजूद थे।
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संवाद सूत्र, रेणुग्राम (अररिया)। कटिहार रेल मंडल अन्तर्गत कटिहार जंक्शन के समीप पूसी रेल द्वारा फणीश्वरनाथ रेणु रेलवे संस्थान का विधिवत उद्घाटन बुधवार को रेल महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर कटिहार रेल मंडल के डीआरएम किरेन्द्र नरह मौजूद थे। उक्त जानकारी देते हुए अमर कथा शिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु के सुपुत्र दक्षिणेश्वर प्रसाद राय ने कहा कि यह सम्मान रेल विभाग ने रेणु को नहीं दिया है बल्कि विभाग रेणु के नाम से धन्य हुआ।
फणीश्वरनाथ रेणु अपनी कहानियों एवं अपने जीवन काल में रेलवे को आत्मसात कर चलते रहे। उनकी मशहूर फिल्म 'तीसरी कसम' का अंत भी रेल से ही हुआ है, जहां फिल्म की नायिका हीराबाई (वहीदा रहमान) मेला खत्म होने के बाद नायक हीरामन (राजकपूर) को छोड़कर रेल से विदा होती है।
इसके अलावे भी रेणु की अनेक कहानियां हैं जिसमें रेल रेणु के साथ चलती है। तीर्थोदक, में गंगा स्थान के लिए मनिहारी की यात्रा का लाजवाब वर्णन है तो वहीं संवदिया कहानी में हरगोबिंद बड़ी बहुरिया का संवाद लेकर चलता है जहां थानाबिहपुर की रोचक यात्रा करता है।
इसके अलावे 'न जाने केहि वेष' कहानी में रेणु खुद रेल से सफर करते हैं जहां चादर ओढ़कर सोए रेणु के लटकते बड़े बाल देखकर सहयात्री उन्हें महिला समझ लेते हैं। उन्होंने कहा कि तमाम बातें ठीक है, लेकिन कितनी विडंबना है कि रेणु का गृह स्टेशन सिमराहा है जहां बचपन में रेणु जिस स्टेशन का स्टेशन मास्टर बनना चाहते थे, उनके दिवंगत होने के पांच दशक बाद भी उस स्टेशन का नाम रेणु के नाम पर रेणुग्राम नहीं हो सका है।
यह एक बड़ा दुर्भाग्य है हमारे देश व यहां का दिल्ली,पटना में प्रतिनिधित्व करने वाले राजनीतिज्ञों के लिए। ये लोग विधानसभा या लोकसभा में कभी भी जोरदार ढंग से आजतक इस बात को रखने में सही ढंग से साबित नही हुए हैं। इन्हें तो बस रेणु के नाम राजनीति करना आता है।
