कटिहार जोगबनी रेलखंड पर मेमू ट्रेन चलाने की मांग तेज, सांसद ने रेल मंत्रालय को लिखा पत्र
कटिहार-जोगबनी रेलखंड पर डीएमयू की जगह मेमू ट्रेनें चलाने की मांग तेज हो गई है, जिसमें अररिया सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने रेल मंत्रालय को पत्र लिखा है।

सांसद प्रदीप सिंह। फोटो जागरण
HighLights
कटिहार-जोगबनी रेलखंड पर मेमू ट्रेन चलाने की मांग तेज।
अररिया सांसद प्रदीप सिंह ने रेल मंत्रालय को लिखा पत्र।
यात्री डीएमयू में झटके और जगह की कमी से परेशान।
संवाद सूत्र, अररिया। कटिहार-जोगबनी रेलखंड पर डीएमयू ट्रेनों की जगह मेमू ट्रेनें चलाने की मांग तेज हो गई है। विद्युतीकरण के बाद भी इस रेलखंड पर बेहतर यात्री सुविधाओं की मांग को लेकर स्थानीय लोग आवाज उठा रहे हैं।
अब अररिया के सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने भी इस मामले में पहल करते हुए रेल मंत्रालय को पत्र लिखा है। वहीं, कथा शिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु के पुत्र दक्षिणेश्वर रेणु ने भी यात्रियों की मांग का समर्थन किया है।
अररिया से ट्रेन पकड़ने पहुंचे यात्री सत्यम कुमार ने बताया कि डीएमयू ट्रेन में सफर के दौरान काफी झटके लगते हैं। साथ ही, डिब्बों में जगह की कमी के कारण यात्रियों को परेशानी होती है।
उन्होंने कहा कि अधिक क्षमता वाली आधुनिक इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाई जानी चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा यात्री आराम से सफर कर सकें। यात्री मुकर्रम ने भी ट्रेन में जगह की कमी की समस्या उठाई।
उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधा को देखते हुए रेलवे को अधिक जगह वाली इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाने पर विचार करना चाहिए।
दक्षिणेश्वर रेणु ने कहा कि कटिहार-जोगबनी रेलखंड पर मेमू ट्रेन चलाने की मांग लंबे समय से हो रही है। डीएमयू में सफर के दौरान यात्रियों को अधिक झटके लगते हैं और डिब्बों में जगह की कमी भी रहती है।
उन्होंने सरकार से इस रेलखंड पर मेमू ट्रेन चलाने की मांग की है। वहीं, सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। इस संबंध में उन्होंने रेल मंत्रालय को पत्र लिखकर यात्रियों की परेशानी से अवगत कराया है।
108 किलोमीटर के रेलखंड पर हजारों यात्रियों की निर्भरता
कटिहार-जोगबनी रेलखंड करीब 108 किलोमीटर लंबा है। यह अररिया समेत पूरे सीमांचल के लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन है।
अररिया कोर्ट, अररिया, फारबिसगंज और जोगबनी सहित विभिन्न स्टेशनों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र, नौकरीपेशा लोग, व्यापारी और आम यात्री सफर करते हैं। यात्रियों का कहना है कि व्यस्त समय में ट्रेनों में भीड़ बढ़ जाती है।
सीमित जगह के कारण कई लोगों को खड़े होकर यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे में अधिक क्षमता वाली ट्रेनें चलने से यात्रियों को राहत मिल सकती है।
यात्रियों का कहना है कि जब रेलखंड पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों के परिचालन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध है, तो रेलवे को यहां आधुनिक यात्री ट्रेनें चलाने की संभावना पर विचार करना चाहिए।
हालांकि, मेमू के परिचालन का निर्णय रेलवे की तकनीकी जरूरतों, उपलब्ध रेक और परिचालन योजना पर निर्भर करेगा। अब सांसद के पत्र और यात्रियों की मांग पर रेल मंत्रालय के रुख का इंतजार है।
