बिहार के पश्चिमी चंपारण में रेलवे ट्रैक पर आया हाथी, वंदे भारत समेत छह ट्रेनें दो घंटे फंसी रहीं
Vande Bharat Delayed Bihar: बिहार के पश्चिमी चंपारण में वाल्मीकिनगर-पनियहवा रेलवे ट्रैक पर एक जंगली हाथी आ जाने से शुक्रवार ...और पढ़ें

शुक्रवार की रात 8:54 बजे से 10:45 बजे तक रेल परिचालन बाधित रहा।
HighLights
पश्चिमी चंपारण में रेलवे ट्रैक पर आया जंगली हाथी।
वंदे भारत समेत छह ट्रेनें दो घंटे तक फंसी रहीं।
वन विभाग और रेलवे ने हाथी को सुरक्षित हटाया।
जागरण संवाददाता, बगहा (पश्चिमी चंपारण)। Bihar Railway Elephant Track: बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में वाल्मीकिनगर और पनियहवा रेलवे स्टेशनों के बीच शुक्रवार की रात बड़ा रेल व्यवधान सामने आया।
रेलवे ट्रैक पर अचानक एक जंगली हाथी के आ जाने से इस रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। गेट संख्या 62 के गेटमैन से मिली जानकारी के अनुसार रात 8:54 बजे से 10:45 बजे तक रेल परिचालन बाधित रहा।
छह ट्रेनें प्रभावित
ट्रैक पर हाथी के मौजूद रहने के कारण लगभग दो घंटे तक रेल यातायात पूरी तरह रुका रहा। इस दौरान वंदे भारत एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस समेत कुल छह प्रमुख ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोकना पड़ा।
अचानक ट्रेनें रुकने से रात के समय यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
वीटीआर की हथिनी
गेटमैन ने समय रहते ट्रैक पर हाथी के मौजूद होने की सूचना रेलवे नियंत्रण कक्ष और संबंधित अधिकारियों को दी। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) की पालतू हथिनी 'मणिकांता' जंगल से भटककर ट्रैक पर पहुंच गई थी।
सूचना मिलते ही वन विभाग और रेलवे की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए हथिनी को ट्रैक से सुरक्षित हटाया।
पूर्व में भी टल चुका है बड़ा हादसा
- 12 अक्टूबर की घटना: उत्तर बंगाल के बागडोगरा-नक्सलबाड़ी रेलखंड पर रेलवे ट्रैक पर 77 हाथियों का बड़ा झुंड आ गया था।
- महानंदा एक्सप्रेस को रोका: ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी के दौरान दिल्ली से अलीपुरद्वार जा रही सिलीगुड़ी महानंदा एक्सप्रेस गुजरने वाली थी, जिसे समय रहते रोका गया।
- वनकर्मी की तत्परता: कुर्सियांग वन प्रमंडल के वनकर्मी आकाश केरकेट्टा ने अपनी जान जोखिम में डालकर सतर्कता दिखाई और ट्रेन-हाथी की भीषण टक्कर टाल दी।
- सुरक्षित रेस्क्यू: वन विभाग, भारतीय रेलवे और दार्जिलिंग पुलिस के बेहतर तालमेल से सभी 77 हाथियों को नदियों और रेलवे लाइन (पुल सं. 46) के पार सुरक्षित निकाला गया था।
